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सी.आर. पाटिल ने नमामि गंगा मिशन के अंतर्गत जलीय जैव विविधता संरक्षण की महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया

मीठे जल के संरक्षण की दिशा में नई पहल

CR Paatil, Chandrakant Raghunath Paatil, Union Minister for Jal Shakti, BJP, Bharatiya Janata Party
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देहरादून , 14 Jan 2026

Last updated on: Jan 15, 2026, 15:16 IST

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सरकार की नदियों को केवल जलमार्ग के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-सहायक इकोसिस्‍टम के रूप में संरक्षित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नदी के स्वास्थ्य का सच्चा सूचक जलीय जैव विविधता का फलना-फूलना है। उन्‍होंने देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) में नमामि गंगा मिशन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण और दूरगामी पहलों का उद्घाटन किया। 

इस अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें श्री पाटिल ने नदी पुनर्जीवन और जलीय जीवन संरक्षण पर केंद्रित नई और उन्नत परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार रुहेल्ला, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल सहित वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता, संरक्षण विशेषज्ञ और छात्र उपस्थित थे।

नमामि गंगा कार्यक्रम ने जलीय जैव विविधता संरक्षण के लिए अध्ययन, अनुसंधान और नीतिगत सहायता हेतु एक समर्पित केंद्र विकसित करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ साझेदारी की है। जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने राष्ट्र को समर्पित इस केंद्र का उद्घाटन किया। गंगा और अन्य नदियों में जलीय जीवन की निगरानी और संरक्षण के लिए एक संगठित और उन्नत संस्थागत ढांचे के तहत यह निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है।

यह निगरानी केंद्र आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से जलीय प्रजातियों की निगरानी, ​​संरक्षण और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। भविष्य में, यह नीति निर्माण, अनुसंधान और संरक्षण रणनीतियों में मार्गदर्शक भूमिका निभाएगा। निगरानी केंद्र में जल और प्रजातियों से नमूने लेने और हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए एक इकोटॉक्सिकोलॉजी, एक्वेटिक इकोलॉजी और एक विशेष इकोलॉजी प्रयोगशाला है। 

निगरानी केंद्र में पारिस्थितिकी तंत्र में सूक्ष्म प्लास्टिक की पहचान के लिए एक माइक्रोप्लास्टिक प्रयोगशाला भी है। कार्यक्रम के दौरान टर्टल सर्वाइवल एलायंस इंडिया (टीएसएएफआई) की डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस का उद्घाटन किया गया, जिससे डॉल्फिन संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। यह एम्बुलेंस गंगा डॉल्फिनों के लिए शीघ्र, संवेदनशील और वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी। 

श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि गंगा डॉल्फिन नदी के स्वास्थ्य का एक संवेदनशील संकेतक है और यह पहल जलीय जीवन की सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता और तत्परता को दर्शाती है। यह एम्बुलेंस डॉल्फिन संरक्षण और बचाव में एनएमसीजी का एक बड़ा प्रयास है और भारत के राष्ट्रीय जलीय जीवों के संरक्षण में सहायक होगी। श्री सी.आर. पाटिल ने वर्ल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के शोधकर्ताओं और एमएससी छात्रों से भी बातचीत की। 

नमामि गंगा कार्यक्रम के तत्वावधान में, डब्ल्यूआईआई ने मीठे जल के संरक्षण में दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें छात्रों को विज्ञान, क्षेत्र कार्य और नीतिगत अध्ययनों के माध्यम से भारत की नदियों, आर्द्रभूमि और मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे भविष्य के संरक्षणवादियों को नदी पुनर्स्थापन, जैव विविधता और सतत जल प्रबंधन के लिए तैयार किया जा सके। 

श्री सी.आर. पाटिल ने इस विशिष्ट पाठ्यक्रम को चुनने और नदी संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रति समर्पित रहने के लिए छात्रों की सराहना की। केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने भारतीय वन्यजीव संस्थान में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को समर्पित वृक्षारोपण अभियान चलाया। वृक्षारोपण नमामि गंगा कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग है और समग्र नदी इकोसिस्‍टम के संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस कार्यक्रम के दौरान बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) द्वारा भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना की शुरुआत की गई। इस पहल के माध्यम से गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों में दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों को एक संरचित और व्यवस्थित रूप दिया गया है। यह परियोजना इस बात पर बल देती है कि नदी संरक्षण केवल जल या जलीय प्रजातियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नदी के संपूर्ण इकोसिस्‍टम के संतुलित संरक्षण की ओर निरंतर विकसित हो रहा है। 

ये प्रजातियाँ न केवल नदी के स्वास्थ्य का सूचक हैं, बल्कि हमारे जल संसाधनों की समृद्धि का प्रतीक भी हैं। निर्बाध प्रवाह, स्वच्छता और जैव विविधता संरक्षण को समान महत्व देते हुए इस मिशन ने एक बहुआयामी, वैज्ञानिक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है। केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने टीएसएएफआई की कछुआ संरक्षण परियोजना के पहले चरण की सफलता पर प्रकाश डाला और कहा कि कछुए नदी प्रणालियों के मूक प्रहरी के रूप में कार्य करते हैं और उनकी उपस्थिति नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिक संतुलन का संकेत है। 

इस परियोजना ने यह दर्शाया है कि वैज्ञानिक पुनर्प्रवेश, निरंतर निगरानी और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लुप्तप्राय प्रजातियों का पुनरुद्धार किया जा सकता है। पुनर्वनीकरण और जनसंख्या पुनर्प्राप्ति घटक के तहत, परियोजना ने कई राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल कीं। मध्य यमुना में  पाले गए 15 चित्रा इंडिका कछुओं को छोड़ा गया।

इनमें से 10 कछुओं को रेडियो-ट्रांसमीटर से टैग किया गया और उनकी निगरानी की गई। इसके अतिरिक्त 20 बटागुर कछुओं को एकॉस्टिक ट्रांसमीटर से टैग किया गया और उन्हें हैदरपुर आर्द्रभूमि परिसर के पास ऊपरी गंगा में पुनः छोड़ा गया - यह इस प्रजाति का तीन दशकों के बाद अपनी ऐतिहासिक सीमा में पहला निगरानीपूर्ण पुनर्प्रवेश है।

श्री सी.आर. पाटिल ने गंगा नदी में जैव विविधता संरक्षण के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा डब्ल्यूआईआई को स्वीकृत परियोजना के समग्र परिणामों की समीक्षा की और कार्यक्रम के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब न केवल अपनी नदियों को साफ करने, बल्कि उनकी जैव विविधता, जलीय जीवन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। 

यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं कि आने वाली पीढ़ियां को एक स्वस्थ, संतुलित और जीवनदायी नदी प्रणाली विरासत में मिले। श्री सी.आर. पाटिल ने गंगा प्रहरियों से बातचीत की और कहा कि गंगा प्रहरियों और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य सुरक्षित हाथों में है। उनकी ऊर्जा, समर्पण और सक्रिय भागीदारी ने नदी संरक्षण और स्वच्छता में उल्लेखनीय प्रगति की है। 

गंगा में 6,000 से अधिक डॉल्फ़िन की बढ़ती आबादी एक मजबूत प्रमाण है कि हमारी नदियाँ स्वच्छ और अधिक जीवनदायी बन रही हैं। यह उपलब्धि सरकारी प्रयासों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। श्री सी.आर. पाटिल ने इस कार्यक्रम में वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के दो प्रकाशनों लुप्तप्राय घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति और संरक्षण कार्य योजना और 'मिल्लेट्स फॉर लाइफ' का विमोचन किया। 

पहले प्रकाशन में गंगा बेसिन में घड़ियाल का विवरण दिया गया है। वहीं दूसरा प्रकाशन जैव विविधता संरक्षण को खाद्य और पोषण सुरक्षा से जोड़ता है। नमामि गंगा मिशन के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान में शुरू की गई ये महत्वपूर्ण पहलें देश में जलीय जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। 

वैज्ञानिक हस्तक्षेप, संस्थागत सहयोग और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से, मिशन नदियों के पुनर्जीवन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना जारी रखता है, जिससे गंगा और अन्य नदी पारिस्थितिक तंत्रों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सके। स्थानीय समुदायों ने न केवल नदी संरक्षण में योगदान दिया है, बल्कि गंगा प्रहरी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाया है। 

हमारी नदियों और पर्यावरण की स्थिति में सुधार के लिए अतिरिक्त कदमों पर विचार करना समय की मांग है। हमें निरंतर और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से, भारत के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और समृद्ध इकोसिस्‍टम बनाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए।

 

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