Saturday, 13 June 2026

 

 

खास खबरें मावां -धीयाँ सम्मान योजना का लाभ हर पात्र महिला तक पहुंचाना हमारा संकल्प : जय कृष्ण सिंह रौड़ी नायब सिंह सैनी ने बाबा भूमणशाह, सिरसा गद्दी महंत श्री ब्रह्म दास जी से की भेंट, लिया आशीर्वाद भारत की अध्यक्षता में ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’, वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणापत्र आप की उम्मीद से पहले ही उलटी गिनती शुरू हो चुकी है : अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग जेल में बंद गैंगस्टर से जुड़े दो व्यक्ति बठिंडा से गिरफ्तार ; दो पिस्तौल बरामद प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल सेवा, सुशासन और संकल्प की मिसाल : हरदीप सिंह पुरी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप : पाकिस्तान के खिलाफ जीत के साथ अभियान शुरू करना चाहेगा भारत असद अली खान : कहानी रुद्र वीणा के उस साधक की, जिनके बाद खाली पड़ गई एक परंपरा बीएचयू में निर्माणाधीन ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का योगी आदित्यनाथ ने किया स्थलीय निरीक्षण मध्य प्रदेश पुलिस की पहली जिम्मेदारी जनता में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास कायम करना : सीएम मोहन यादव कविन्द्र गुप्ता ने माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की शाहपुर में गैस किल्लत पर सख्त हुए केवल सिंह पठानिया राजनाथ सिंह ने डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में 217वें कोर्स की संयुक्त दीक्षांत परेड का निरीक्षण किया कल्याड़ा में 50 लाख से बनेगा ओबीसी भवन : केवल सिंह पठानिया अनिल विज ने साहा इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर में फायर ब्रिगेड तैनात करने के दिए निर्देश ऑस्ट्रेलिया ओपन : पीवी सिंधु सेमीफाइनल में यामागुची से हारीं, भारत का अभियान समाप्त 30 जून को सेना प्रमुख का पद संभालेंगे लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ महाराष्ट्र के धुले में बस ने बाइक को मारी टक्कर, मां-बेटे सहित तीन की दर्दनाक मौत पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की उल्टी गिनती शुरू : नायब सिंह सैनी रक्षा खडसे ने जीवंत ग्राम कार्यक्रम के अंतर्गत लद्दाख के सीमावर्ती गांवों का तीन दिवसीय दौरा पूरा किया भजन लाल की विरासत को आगे बढ़ा रहे कुलदीप बिश्नोई जैसे जननेताओं की हरियाणा को जरूरत : वीरेश शांडिल्य

 

नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित किया

एक हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर पर ध्वज लहरा रहा है, जो दुनिया को भारत की ताकत और भावना की याद दिलाता है : नरेंद्र मोदी

Narendra Modi, Modi, BJP, Bharatiya Janata Party, Prime Minister of India, Prime Minister, Narendra Damodardas Modi, Bhupendra Patel, Bhupendrabhai Rajnikantbhai Patel, Chief Minister of Gujarat, Somnath Swabhiman Parv, Shaurya Yatra
Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

सोमनाथ (गुजरात) , 11 Jan 2026

Last updated on: Jan 12, 2026, 17:05 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित किया। इस मौके  पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय असाधारण है, यह वातावरण असाधारण है और यह उत्सव भी असाधारण है। उन्होंने कहा कि यहां एक ओर स्वयं भगवान महादेव विराजमान हैं, तो दूसरी ओर विशाल समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और भक्ति का प्रवाह देखने को मिलता है। 

उन्होंने कहा कि इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के सभी भक्तों की उपस्थिति इस अवसर को दिव्य और भव्य बना रही है। श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय रूप से सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने 72 घंटों तक निरंतर ओंकार का जाप और मंत्रों के निरंतर पाठ का उल्लेख किया। 

उन्होंने बताया कि कल शाम एक हजार ड्रोन और वैदिक गुरुकुलों के एक हजार छात्रों की उपस्थिति में सोमनाथ के हजार वर्षों की गाथा प्रस्तुत की गई और आज 108 घोड़ों के साथ शौर्य यात्रा मंदिर पहुंची। उन्होंने कहा कि मंत्रों और भजनों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता और इस अनुभव को केवल समय ही व्यक्त कर सकता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्सव गौरव और सम्मान, गरिमा और ज्ञान, भव्यता और विरासत, आध्यात्मिकता और आत्मीयता, अनुभव, आनंद और आत्मीयता का प्रतीक है और इन सबसे बढ़कर इसमें भगवान महादेव का आशीर्वाद समाहित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज इस मौके पर संबोधित करते हुए उनके मन में बार-बार यह विचार आता है कि ठीक एक हजार साल पहले इसी स्थान पर, जहाँ आज लोग बैठे हैं, कैसा वातावरण रहा होगा। 

उन्होंने कहा कि यहाँ मौजूद लोगों के पूर्वजों, हमारे पुरखों ने अपने विश्वास, अपनी आस्था और अपने भगवान महादेव के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और अपना सब कुछ अर्पित कर दिया। एक हजार साल पहले आक्रमणकारियों को लगा होगा कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज, एक सहस्राब्दी बाद भी, सोमनाथ महादेव मंदिर के शीर्ष पर लहराता ध्वज पूरी सृष्टि को हिंदुस्तान की शक्ति और क्षमता का प्रमाण देता है। 

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि प्रभास पाटन की मिट्टी का हर कण शौर्य, साहस और वीरता का साक्षी है और अनगिनत शिव भक्तों ने सोमनाथ के स्वरूप के संरक्षण के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर, वे उन सभी वीर पुरुषों और महिलाओं को नमन करते हैं जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और भगवान महादेव को अपना सब कुछ अर्पित कर दिया।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि प्रभास पाटन न केवल भगवान शिव का क्षेत्र है, बल्कि भगवान श्री कृष्ण ने भी इस स्थल को पावन बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि महाभारत काल में पांडवों ने भी इस पवित्र स्थल पर तपस्या की थी। लिहाज़ा यह अवसर भारत के असंख्य आयामों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ की स्वाभिमान यात्रा के हजार वर्ष पूरे होने के साथ ही 1951 में इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं, जो एक सुखद संयोग है। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर विश्व भर के लाखों श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि यह त्योहार केवल हजार वर्ष पूर्व हुए विनाश की स्मृति नहीं है, बल्कि यह हजार वर्षों की यात्रा के साथ-साथ भारत के अस्तित्व और गौरव का उत्सव है। 

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हर कदम और हर पड़ाव पर सोमनाथ और भारत के बीच अनूठी समानताएं देखी जा सकती हैं। जिस प्रकार सोमनाथ को नष्ट करने के अनगिनत प्रयास हुए, उसी प्रकार सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत को नष्ट करने का प्रयास किया। फिर भी न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत, क्योंकि भारत और उसके धार्मिक स्थल अविभाज्य रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

श्री मोदी ने कहा कि हमें एक हजार वर्ष पूर्व के इतिहास की कल्पना करनी चाहिए, जब 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर पहली बार आक्रमण किया और उसे नष्ट कर दिया और ये मान लिया कि उसने मंदिर का अस्तित्व ही मिटा दिया है। लेकिन कुछ ही वर्षों में सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ और बारहवीं शताब्दी में राजा कुमारपाल ने मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार करवाया। 

उन्होंने बताया कि तेरहवीं शताब्दी के अंत में अलाउद्दीन खिलजी ने एक बार फिर सोमनाथ पर आक्रमण करने का साहस किया, लेकिन जालौर के शासक ने खिलजी की सेनाओं के खिलाफ बहादुरी से युद्ध किया। चौदहवीं शताब्दी के आरंभ में जूनागढ़ के राजा ने एक बार फिर मंदिर की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया और बाद में उसी शताब्दी में मुजफ्फर खान ने सोमनाथ पर आक्रमण किया, लेकिन उसका प्रयास भी विफल रहा।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पंद्रहवीं शताब्दी में सुल्तान अहमद शाह ने मंदिर को अपवित्र करने का प्रयास किया था और उनके पोते सुल्तान महमूद बेगड़ा ने इसे मस्जिद में बदलने की कोशिश की थी, लेकिन महादेव के भक्तों के प्रयासों से मंदिर का पुनरुद्धार हुआ। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी के दौरान, औरंगजेब ने सोमनाथ को अपवित्र करते हुए इसे फिर से मस्जिद में बदलने का प्रयास किया, लेकिन उस समय अहिल्याबाई होल्कर ने बाद में एक नए मंदिर की स्थापना करके सोमनाथ को पुनर्जीवित किया। 

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, "सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आक्रमणकारी आते रहे, धार्मिक आतंक के नए हमले होते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा सदियों लंबा संघर्ष, निरंतर प्रतिरोध, पुनर्निर्माण में असीम धैर्य, रचनात्मकता और दृढ़ता, और संस्कृति और आस्था में अटूट विश्वास विश्व इतिहास में अद्वितीय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हमें अपने पूर्वजों की वीरता को भूलना चाहिए और क्या हमें उनके साहस से प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी पुत्र या वंशज को अपने पूर्वजों के वीरतापूर्ण कार्यों को नहीं भूलना चाहिए। अपने पूर्वज़ों का इस प्रकार स्मरण करना न केवल कर्तव्य है, बल्कि शक्ति का स्रोत भी है और उन्होंने सभी से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि हमारे पूर्वजों के बलिदान और वीरता हमारी चेतना में जीवित रहें।

श्री मोदी ने आगे कहा कि जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक के आक्रमणकारियों ने सोमनाथ पर हमला किया, तो उन्हें लगा कि उनकी तलवारें शाश्वत सोमनाथ पर विजय प्राप्त कर रही हैं, लेकिन वे यह समझने में विफल रहे कि 'सोम' नाम में ही अमृत का सार समाहित है, जिसमें विष ग्रहण करने के बाद भी अमर रहने का विचार निहित है।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ में सदाशिव महादेव की चेतन शक्ति निवास करती है, जो दयालु भी है और उग्र "प्रचंड तांडव शिव" भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान भगवान महादेव के नामों में से एक नाम मृत्युंजय है, जो मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले और समय के साक्षात स्वरूप हैं। एक श्लोक का पाठ करते हुए श्री मोदी ने समझाया कि सृष्टि उन्हीं से उत्पन्न होती है और उन्हीं में विलीन हो जाती है। 

शिव समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त हैं और प्रत्येक कण में शंकर समाहित हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शंकर के असंख्य रूपों को कोई नष्ट नहीं कर सकता। चूंकि जीवित प्राणियों में भी हम शिव को देखते हैं और इसलिए कोई भी शक्ति हमारी आस्था को विचलित नहीं कर सकती। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि समय के चक्र ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश करने वाले उन कट्टर आक्रमणकारियों को इतिहास के पन्नों तक सीमित कर दिया है, जबकि मंदिर आज भी विशाल सागर के तट पर अपने ऊंचे धर्म-ध्वज को बुलंद रखे हुए है। 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ का शिखर कहता है, "मैं चंद्र शेखर शिव में विश्वास रखता हूं, समय भी मेरा क्या बिगाड़ सकता है?" श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल ऐतिहासिक गौरव का त्योहार है, बल्कि भविष्य के लिए एक शाश्वत यात्रा को जीवंत रखने का माध्यम भी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस अवसर का उपयोग हमारे अस्तित्व और पहचान को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जहां कुछ देश अपनी कुछ सदियों पुरानी विरासत को विश्व के सामने अपनी पहचान के रूप में पेश करते हैं, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पवित्र स्थल हैं, जो शक्ति, प्रतिरोध और परंपरा के प्रतीक हैं। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि दुर्भाग्य से, स्वतंत्रता के बाद, औपनिवेशिक मानसिकता वाले लोगों ने ऐसी विरासत से खुद को दूर करने का प्रयास किया और इस इतिहास को मिटाने के दुर्भावनापूर्ण प्रयास किए गए। 

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों को याद करते हुए रावल कन्हारदेव जैसे शासकों के प्रयासों, वीर हमीरजी गोहिल की वीरता और वेग्दा भील की बहादुरी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई वीर इस मंदिर के इतिहास से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें कभी उचित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं की आलोचना की, जिन्होंने आक्रमणों के इतिहास को छिपाने का प्रयास किया, धार्मिक कट्टरता को मात्र लूटपाट का नाम दिया और सच्चाई को छुपाने के लिए किताबें लिखीं। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ पर एक बार नहीं, बल्कि बार-बार आक्रमण हुए और यदि ये आक्रमण केवल आर्थिक लूट के लिए होते, तो एक हजार साल पहले हुए पहले बड़े लूटपाट के बाद ही रुक जाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सोमनाथ की पवित्र मूर्तियों को तोड़ा गया, मंदिर का स्वरूप बार-बार बदला गया, और फिर भी लोगों को यह सिखाया जाता है कि सोमनाथ को केवल लूट के लिए नष्ट किया गया था, जबकि घृणा, उत्पीड़न और आतंक के क्रूर इतिहास को हमसे छिपाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अपने धर्म के प्रति निष्ठावान कोई भी व्यक्ति ऐसी चरमपंथी सोच का समर्थन नहीं करेगा, हांलाकि तुष्टीकरण की भावना से प्रेरित लोग हमेशा ऐसी सोच के आगे झुकते रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ और सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब उन्हें रोकने के प्रयास किए गए और यहां तक ​​कि 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समय पर भी आपत्तियां उठाई गईं।

उन्होंने याद दिलाया कि उस समय सौराष्ट्र के शासक जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने राष्ट्रीय गौरव को सर्वोपरि रखते हुए सोमनाथ मंदिर के लिए एक लाख रुपये का दान दिया और ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष के रूप में बेहद जिम्मेदारी से कार्य किया। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश, आज भी देश में सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें सक्रिय हैं। 

हांलाकि अब भारत के खिलाफ साजिशें, तलवारों के बजाय अन्य दुर्भावनापूर्ण तरीकों से रची जा रही हैं। उन्होंने सतर्कता, शक्ति, एकता और लोगों को विभाजित करने वाली हर ताकत को पराजित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि जब हम अपने धर्म, अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं और अपनी विरासत को पूरे गर्व के साथ संरक्षित करते हैं, तभी हमारी सभ्यता की नींव मजबूत होती है। 

उन्होंने कहा कि हजार वर्षों का सफर हमें अगले हजार वर्षों के लिए तैयार होने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने याद करते हुए कहा कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने भारत के लिए एक हजार साल का भव्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए "देव से देश" के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की बात कही थी। 

उन्होंने कहा कि आज भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण करोड़ों नागरिकों में नया आत्मविश्वास भर रहा है, हर भारतीय एक विकसित भारत के लिए प्रतिबद्ध है और 140 करोड़ लोग भविष्य के लक्ष्यों के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमनाथ मंदिर के आशीर्वाद से मिली ऊर्जा के बल पर भारत अपने गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, गरीबी के खिलाफ लड़ाई जीतेगा और विकास के नए स्तर हासिल करेगा, जिसका लक्ष्य विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना और उससे भी आगे बढ़ना है। 

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज का भारत विरासत से लेकर विकास तक की प्रेरणाओं के साथ आगे बढ़ रहा है और सोमनाथ इन दोनों का प्रतीक है। 

उन्होंने मंदिर के सांस्कृतिक विस्तार, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, माधवपुर मेले की बढ़ती लोकप्रियता और गिर शेरों के संरक्षण से विरासत को मजबूती मिलने का उल्लेख किया और कहा कि प्रभास पाटन भी विकास के नए आयाम समेट रहा है। उन्होंने केशोद हवाई अड्डे के विस्तार का जिक्र किया, जिससे भारत और विदेश से तीर्थयात्रियों के लिए सीधी पहुँच संभव हो गई है, अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन के शुरू होने से यात्रा का समय कम हो गया है और क्षेत्र में एक तीर्थयात्रा सर्किट का विकास हुआ है। 

श्री मोदी ने कहा कि भारत आज अपनी आस्था को याद रखते हुए बुनियादी ढांचे, संपर्क और प्रौद्योगिकी के ज़रिए भविष्य के लिए इसे सशक्त बना रहा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि भारत की सभ्यता का संदेश कभी भी दूसरों को हराने का नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन बनाए रखने का रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था हमें घृणा की ओर नहीं ले जाती और शक्ति हमें विनाश का अहंकार नहीं देती। 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ सिखाते हैं कि सृजन का मार्ग लंबा है, लेकिन शाश्वत है, तलवार की नोक पर किसी का दिल नहीं जीता जा सकता और जो सभ्यताएं दूसरों को मिटाने की कोशिश करती हैं, वे स्वयं समय के साथ लुप्त हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया को दूसरों को हराकर जीतना नहीं, बल्कि दिलों को जीतकर जीना सिखाया है, जो एक ऐसा विचार है, जिसकी आज दुनिया को बहुत ज़रुरत है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सोमनाथ की हजार वर्ष पुरानी गाथा मानवता को यही पाठ पढ़ाती है। उन्होंने आग्रह किया कि हम अपने अतीत और विरासत से जुड़े रहते हुए विकास और भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लें, आधुनिकता को अपनाते हुए चेतना को संरक्षित रखें और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से प्रेरणा लेकर प्रगति के पथ पर तेजी से अग्रसर हों और हर चुनौती का सामना करते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें। उन्होंने सभी नागरिकों को एक बार फिर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक सोमनाथ में आयोजित किया जा रहा है। यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे।

यह कार्यक्रम 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। सदियों से इसे नष्ट करने के कई प्रयासों के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी दृढ़ता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का एक सशक्त प्रतीक है, जो इसे प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों का परिणाम है।

स्वतंत्रता के बाद, सरदार पटेल ने मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया। इस पुनरुद्धार यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 1951 में हासिल हुई, जब जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में भक्तों के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशेष महत्व बढ़ गया है।

इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संत भाग ले रहे हैं और मंदिर परिसर में 72 घंटे तक निरंतर 'ओम' का जाप किया जाएगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री की उपस्थिति भारत की सभ्यता की अटूट भावना को रेखांकित करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को ज़ाहिर करती है।

 

Tags: Narendra Modi , Modi , BJP , Bharatiya Janata Party , Prime Minister of India , Prime Minister , Narendra Damodardas Modi , Bhupendra Patel , Bhupendrabhai Rajnikantbhai Patel , Chief Minister of Gujarat , Somnath Swabhiman Parv , Shaurya Yatra

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD