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कुपोषण के खिलाफ लड़ाई बने सामूहिक राष्ट्रीय आंदोलन : पीयूष गोयल

पोषण, वहनीयता और अंतिम व्यक्ति तक वितरण सुनिश्चित करने के लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण : पीयूष गोयल

Piyush Goyal, Commerce and Industry Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, Rajiv Ranjan Singh, Krishan Pal Gurjar, Annpurna Devi, George Kurian, Professor SP Singh Baghel
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नई दिल्ली , 06 Jan 2026

Last updated on: Jan 07, 2026, 13:02 IST

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज इस बात पर जोर दिया कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को एक सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाना होगा, जिसमें सरकार, निगम, समुदाय और व्यक्ति सभी समान रूप से शामिल हों। नई दिल्ली में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से आयोजित ‘पोषण पर सीएसआर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि कुपोषण का उन्मूलन विकसित भारत के निर्माण और देश के दीर्घकालिक सामाजिक तथा आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जरूरी है।

श्री गोयल ने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) व्यापार को सामाजिक प्रभाव से जोड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, विशेष रूप से कुपोषण के उन्मूलन में। उन्होंने बताया कि कानून कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य करता है, लेकिन इसे न्यूनतम सीमा के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम सीमा के रूप में। 

उन्होंने सीएसआर को कंपनियों के लिए बोझ नहीं, बल्कि समाज में सार्थक योगदान देने का एक मूल्यवान अवसर बताया। श्री गोयल ने जोर देते हुए कहा कि सेवा भावना देश के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं में गहराई से समाई हुई है। उन्होंने कहा कि कई व्यक्ति और संगठन स्वेच्छा से अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाते हैं, जो कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की अनिवार्य आवश्यकता से कहीं अधिक है। 

उन्होंने कहा कि यह सीएसआर सम्मेलन सभी हितधारकों के लिए कुपोषण के खिलाफ प्रयासों को तेज करने का एक आह्वान है। सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सीएसआर सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली साधन बनकर उभरा है, जो परोपकार से आगे बढ़कर रणनीतिक सामाजिक निवेश का एक माध्यम बन गया है। 

उन्होंने कहा कि शिशु संजीवनी जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि सहकारी ढांचा स्थानीय भागीदारी, पारदर्शिता और प्रभाव सुनिश्चित करके सीएसआर संसाधनों को ठोस सामाजिक परिणामों में कैसे प्रभावी ढंग से परिवर्तित कर सकता है। एनडीडीबी की गिफ्ट मिल्क और शिशु संजीवनी जैसी पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये पहल आकांक्षी जिलों, आदिवासी क्षेत्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हैं और अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाते हैं। 

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर के माध्यम से एनडीडीबी फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन जैसे संस्थागत मंचों का समर्थन करना केवल एक वैधानिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि "सबका साथ, सबका विकास" की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण में एक सक्रिय योगदान है। सहयोगात्मक कार्रवाई के इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, श्री पीयूष गोयल ने कहा कि कुपोषण एक जटिल चुनौती है जिसके उन्मूलन के लिए समन्वित कार्रवाई की जरूरत है। 

श्री गोयल ने जोर देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम अंतर-मंत्रालयी समन्वय का एक सशक्त उदाहरण है, जिसमें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, पशुपालन और मत्स्य विभाग, सहकारिता मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री के "समग्र सरकारी दृष्टिकोण" के विजन के अनुरूप मिलकर काम कर रहे हैं। 

इसके तहत सभी विभाग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए तालमेल से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरी सरकार एक साथ मिलकर काम करती है, तो कार्यक्रम जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी और प्रभावशाली बनते हैं। श्री गोयल ने कहा कि इस कार्यक्रम में एनडीडीबी एक छत्र संगठन की भूमिका निभा रहा है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को संभव बना रहा है। 

उन्होंने पोषण के समृद्ध स्रोत विशेष रूप से दूध और मछली जैसे पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार समर्थित संस्थानों के माध्यम से पौष्टिक भोजन किफायती दामों पर उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे कुपोषण की समस्या का समाधान हो सके।

श्री गोयल ने कुपोषण के मूल कारणों को दूर करने में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था और प्रारंभिक बचपन के दौरान उचित पोषण सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुपोषण अक्सर जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के विकास के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण से दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।

व्यापक पहुंच के महत्व पर जोर देते हुए श्री गोयल ने कहा कि पोषण के ये कार्यक्रम हर गांव, हर घर और समाज के हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहल कॉरपोरेट्स को लाभार्थियों से जोड़ती है और यह सुनिश्चित करती है कि जमीनी स्तर तक पहुंचने में विभिन्न हितधारक अपनी-अपनी भूमिका निभाएं।

सहकारिता मंत्रालय और पंचायती राज संस्थाएं इन पहलों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और हर गांव और घर तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सभी पांच मंत्रालयों की सामूहिक भागीदारी पोषण, वहनीयता और अंतिम व्यक्ति तक वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समन्वित शासन को दर्शाती है।

श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार नवाचार और नवाचारी वित्तपोषण पर जोर देते हैं, क्योंकि सरकार अकेले कुपोषण का उन्मूलन नहीं कर सकती। उन्होंने इस कार्यक्रम को एक अभिनव मॉडल बताया जो सीएसआर को सीधे पोषण परिणामों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट्स, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई से जोड़कर  यह पहल समाज और अर्थव्यवस्था के लिए साझा मूल्य सृजित करती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुपोषण से निपटने से मत्स्य पालन और पशुपालन के जरिए किसानों की आय में वृद्धि होती है, जिससे उन्हें भी लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि एक ही कार्यक्रम से किसानों, महिलाओं और बच्चों को एक साथ लाभ मिल सकता है, और इन समूहों की व्यापक भागीदारी इस पहल की समावेशी प्रकृति को दर्शाती है।

प्रबंधन और नीतिगत दृष्टिकोण से, श्री गोयल ने मूल कारण विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कुपोषण को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए, गर्भावस्था और प्रारंभिक बचपन पर ध्यान केंद्रित करना होगा और बौनेपन तथा अल्पवजन जैसी स्थितियों से बचने के लिए बढ़ती उम्र के दौरान इसे जारी रखना होगा।

श्री गोयल ने कहा कि फिट इंडिया, योग और खेल जैसी पहलें भी स्वस्थ जीवन में योगदान देती हैं, और कुपोषण मुक्त भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यावश्यक है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई सतत विकास लक्ष्यों के तहत एक प्राथमिकता है, और जल जीवन मिशन जैसी पहलों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता कुपोषण का कारण बनने वाली बीमारियों को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कॉरपोरेट जगत से अपील करते हुए श्री गोयल ने कहा कि पोषण में निवेश करना भारत के भावी कार्यबल, भावी बाजारों और भावी आर्थिक विकास में निवेश करना है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे मजबूत, उत्पादक और रोजगार योग्य नागरिक बनते हैं, जिससे भावी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं का सृजन करके व्यवसायों को लाभ होता है।

श्री गोयल ने मीडिया से आग्रह किया कि वे सीएसआर आधारित पोषण पहलों के महत्व को उजागर करें, जो व्यापार और देश के भविष्य दोनों के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में योगदान से मिलने वाली संतुष्टि से जिम्मेदारी की गहरी भावना उत्पन्न होती है और इसे एक कर्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए।

कुपोषण के खिलाफ जन आंदोलन का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने कहा कि सीएसआर केवल कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों को व्यक्तिगत उपलब्धियों और उत्सवों को समाज सेवा के अवसरों के रूप में उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें अनाथालयों में बच्चों और अस्पतालों में मरीजों को भोजन कराना शामिल है।

देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए किए जा रहे प्रयासों का हवाला देते हुए श्री गोयल ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जारी रखना होगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि देश में एक भी बच्चा कुपोषित न हो या रोकथाम योग्य बीमारियों के साथ पैदा न हो।

केंद्रीय मंत्री श्री गोयल ने उपस्थित लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार प्रधानमंत्री की वेबसाइट और संबंधित मंत्रालयों सहित उपयुक्त माध्यमों से नए विचारों और रचनात्मक सुझावों का स्वागत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयास, नवाचार और समाज की सक्रिय भागीदारी से कुपोषण मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

 

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