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नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद में स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया

नरेन्द्र मोदी ने स्काईरूट के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I का अनावरण किया, जिसमें उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता है

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5 Dariya News

हैदराबाद , 27 Nov 2025

Last updated on: Nov 27, 2025, 18:35 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद, तेलंगाना में स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अभूतपूर्व अवसर का साक्षी बन रहा है। 

श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि निजी क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता के साथ भारत का अंतरिक्ष इको-सिस्‍टम एक बड़ी छलांग लगा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस भारत की नई सोच, नवाचार और युवा शक्ति को दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि देश के युवाओं का नवाचार, जोखिम उठाने की क्षमता और उद्यमशीलता नई ऊंचाइयों को छू रही है। 

श्री मोदी ने कहा कि आज का कार्यक्रम इस बात का प्रतिबिंब है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण इको-सिस्‍टम में कैसे एक अग्रणी के रूप में उभरेगा। उन्होंने श्री पवन कुमार चंदना और श्री नागा भरत डाका को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये दोनों युवा उद्यमी देश भर के अनगिनत युवा अंतरिक्ष उद्यमियों के लिए प्रेरणा हैं। 

उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों ने खुद पर भरोसा रखा, जोखिम लेने से पीछे नहीं हटे और उसके परिणामस्वरूप आज पूरा देश उनकी सफलता का गवाह बन रहा है और देश उन पर गर्व महसूस कर रहा है। श्री मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि देश की महत्वाकांक्षाएं कभी सीमित नहीं रहीं।

उन्होंने कहा कि साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से लेकर दुनिया के सबसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान विकसित करने तक, भारत ने साबित कर दिया है कि सपनों की ऊंचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से तय होती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "इसरो ने दशकों से भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नए पंख दिए हैं। 

उन्‍होंने इस बात पर बल दिया है कि विश्वसनीयता, क्षमता और मूल्य ने इस क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान स्थापित की है।" बदलते समय के बारे में चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार स्पष्ट है, क्योंकि यह संचार, कृषि, समुद्री निगरानी, ​​शहरी योजना, मौसम पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन गया है। 

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए, सरकार ने इसे निजी नवाचार के लिए खोल दिया और एक नई अंतरिक्ष नीति तैयार की। श्री मोदी ने यह भी कहा कि स्टार्टअप उद्यमों और उद्योगों को नवाचार से जोड़ने के प्रयास किए गए और स्टार्टअप उद्यमों को इसरो की सुविधाएं और तकनीक प्रदान करने के लिए इन-स्‍पेस की स्थापना की गई। 

प्रधानमंत्री ने कहा, "केवल पिछले छह-सात वर्षों में, भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को एक खुले, सहकारी और नवाचार-संचालित इको-सिस्‍टम में बदल दिया है।" उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम इसी परिवर्तन का प्रतिबिंब है। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के युवा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं और हर अवसर का सर्वोत्तम इस्‍तेमाल करते हैं, श्री मोदी ने कहा कि जब सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला, तो देश के युवा, विशेषकर जेन-जी पीढ़ी, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए आगे आए। 

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप भारत के अंतरिक्ष भविष्य को नई उम्मीदें दे रहे हैं। इसके बाद उन्‍होंने कहा कि इनमें से अधिकतर स्टार्टअप छोटी टीमों, कभी दो लोग, कभी पांच लोग, कभी एक छोटे से किराए के कमरे में, सीमित संसाधनों के साथ, लेकिन नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू हुए थे। 

प्रधानमंत्री ने ध्‍यान दिलाते हुए कहा, "इसी भावना ने भारत में निजी अंतरिक्ष क्रांति को जन्म दिया है।" उन्होंने कहा कि जेन-जी इंजीनियर, डिजाइनर, कोडर और वैज्ञानिक नई तकनीकों का निर्माण कर रहे हैं, चाहे वह प्रोपल्‍शन प्रणाली हो, मिश्रित सामग्री हो, रॉकेट चरण हों या उपग्रह प्लेटफॉर्म हों। 

उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के युवा ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया भर में एक अलग पहचान बना रही है। उन्‍होंने यह भी कहा कि आज, वैश्विक निवेशकों के लिए, भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है और प्रक्षेपणों की संख्‍या में भी वृद्धि हो रही है, इस पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि नई कंपनियां उपग्रह सेवाएं प्रदान करने के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष अब एक रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। 

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था कई गुना बढ़ेगी। उन्‍होंने कहा कि यह भारत के युवाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के पास अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐसी क्षमताएं हैं जो दुनिया के कुछ ही देशों के पास हैं। इसमें विशेषज्ञ इंजीनियरों की मौजूदगी, उच्च-गुणवत्ता वाला विनिर्माण तंत्र, विश्व-स्तरीय प्रक्षेपण स्थल और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली मानसिकता शामिल है।" 

उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमता किफायती और विश्वसनीय दोनों है, यही वजह है कि दुनिया को हमारे देश से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियां भारत में उपग्रहों का निर्माण करना चाहती हैं, भारत से प्रक्षेपण सेवाएं प्राप्त करना चाहती हैं और भारत के साथ तकनीकी साझेदारी करना चाहती हैं, इसलिए इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने पर हमारा ध्‍यान केंद्रित होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे बदलाव भारत में हो रही व्यापक स्टार्टअप क्रांति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, फिनटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक, क्लाइमेटटेक, एडुटेक और डिफेंसटेक जैसे विविध क्षेत्रों में स्टार्टअप उद्योगों की एक नई लहर उभरी है, जिसमें भारत के युवा, विशेषकर जेन-जेड पीढ़ी, हर क्षेत्र में अभिनव समाधान प्रदान कर रहे हैं। 

भारत की जेन-जेड पीढ़ी की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी रचनात्मकता, सकारात्मक मानसिकता और क्षमता निर्माण क्षमताएं दुनिया की जेन-जेड पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकती हैं। श्री मोदी ने कहा कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको-सिस्टम बन गया है। 

उन्‍होंने कहा कि एक समय था जब स्टार्टअप कुछ बड़े शहरों तक ही सीमित थे, लेकिन आज वे छोटे शहरों और गांवों से भी उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में अब 1.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, जिनमें से कई ने यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर लिया है। इस बात की चर्चा करते हुए कि भारत अब सिर्फ ऐप और सेवाओं तक सीमित नहीं है और अब डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और हार्डवेयर इनोवेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, प्रधानमंत्री ने जेन-जी पीढ़ी का आभार व्यक्त किया। 

उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कदम भारत के तकनीकी भविष्य की नींव मजबूत कर रहे हैं। श्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश भर में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां, चिप निर्माण और डिजाइन हब विकसित हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि चिप्स से लेकर सिस्टम तक, भारत एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि यह न केवल आत्मनिर्भरता के संकल्प का हिस्सा है, बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत और विश्वसनीय स्तंभ भी बनाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह अंतरिक्ष नवाचार को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया था, उसी तरह भारत अब परमाणु क्षेत्र को भी खोलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की मजबूत भूमिका सुनिश्चित की जा रही है, जिससे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों, उन्नत रिएक्टरों और परमाणु नवाचार के क्षेत्र में अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ये सुधार भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व को नई मजबूती प्रदान करेंगे। इस बात की चर्चा करते हुए कि भविष्य आज किए जा रहे अनुसंधान पर बहुत हद तक निर्भर करेगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को अनुसंधान के क्षेत्र में अधिकतम अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है। 

उन्होंने आधुनिक अनुसंधान को समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "एक राष्ट्र, एक सदस्यता" पहल ने सभी छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय जर्नलों तक पहुंच आसान बना दी है। उन्होंने कहा कि 1 लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष देश भर के युवाओं को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगा। 

श्री मोदी ने कहा कि छात्रों में अनुसंधान और नवाचार की भावना जगाने के लिए 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में 50,000 नई लैब स्थापित करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास भारत में नए नवाचारों की नींव रख रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि आने वाला युग भारत, उसके युवाओं और उसके नवाचारों का है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ महीने पहले, अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर, उन्होंने भारत की अंतरिक्ष आकांक्षाओं के बारे में एक चर्चा में कहा था कि अगले पांच वर्षों में भारत अपनी प्रक्षेपण क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और अंतरिक्ष क्षेत्र में पांच नए यूनिकॉर्न स्थापित करेगा। 

उन्होंने कहा कि स्काईरूट टीम की प्रगति यह सुनिश्चित करती है कि भारत अपने प्रत्येक निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करेगा। प्रधानमंत्री ने हर युवा, हर स्टार्टअप, वैज्ञानिक, इंजीनियर और उद्यमी को भरोसा दिलाया कि सरकार हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने एक बार फिर पूरी स्काईरूट टीम को बधाई दी और भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति देने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। 

अंत में उन्होंने सभी से 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने का आह्वान किया, चाहे वह धरती पर हो या अंतरिक्ष में। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का स्टार्टअप उद्योग यानी स्काईरूट इन्फिनिटी कैम्पस एक अत्याधुनिक केंद्र है, जिसमें लगभग 2,00,000 वर्ग फुट का कार्यक्षेत्र है और बहु-प्रक्षेपण वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण के लिए हर महीने एक कक्षीय रॉकेट बनाने में सक्षम है।

स्काईरूट भारत की अग्रणी निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जिसकी स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने की है, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के पूर्व-छात्र और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं और अब उद्यमी बन गए हैं। नवंबर 2022 में, स्काईरूट ने अपना सब-ऑर्बिटल रॉकेट, विक्रम-एस, लॉन्च किया, जिससे वह अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई।

निजी अंतरिक्ष उद्यमों का तेजी से उदय पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों की सफलता का प्रमाण है, जिससे एक आत्मविश्वास से परिपूर्ण और सक्षम वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में भारत का नेतृत्व मजबूत हुआ है।

 

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