संस्कृति मंत्रालय की प्रमुख पहल, ज्ञान भारतम्, ने आज देश भर के 17 प्रमुख संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (जयपुर हाउस) में आयोजित यह समारोह, राष्ट्र की पांडुलिपि विरासत की सुरक्षा, संरक्षण और पुनरुद्धार के भारत के सामूहिक प्रयास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम का प्रतीक था।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हुए और ज्ञान भारतम् की प्रशंसा करते हुए इसे एक दूरदर्शी पहल बताया जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को समझना और समकालीन समय में उनकी स्थायी प्रासंगिकता को पुनः स्थापित करना है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह पहल भारत की अपनी पांडुलिपि संपदा को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। श्री शेखावत ने भारत को एक “प्राणमय भारत” - जीवंत ज्ञान से जीवंत राष्ट्र - में बदलने के अपने दृष्टिकोण को भी साझा किया और इस बात पर जोर दिया कि प्रगति की खोज में, गति के लिए गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यवाही की शुरुआत संस्कृति मंत्रालय के सचिव के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पांडुलिपि संरक्षण का मिशन ज्ञान और एकता के माध्यम से राष्ट्र को प्रकाशमान करने की सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इसके बाद संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री समर नंदा ने अपने संबोधन में संस्थागत प्रतिनिधियों को मंच पर आमंत्रित किया, ताकि ज्ञान भारतम परिवार के विस्तार के प्रतीक के रूप में समझौता ज्ञापनों का औपचारिक आदान-प्रदान किया जा सके।
ज्ञान भारतम ढाँचे के अंतर्गत, प्रमुख कार्यान्वयन भागीदारों के रूप में पूरे भारत में 12 क्लस्टर केंद्र और 5 स्वतंत्र केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र इस पहल के पाँच प्रमुख कार्यक्षेत्रों को आगे बढ़ाएँगे—
1. सर्वेक्षण और कैटलॉगिंग
2. संरक्षण और क्षमता निर्माण
3. प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण
4. भाषा विज्ञान और अनुवाद
5. अनुसंधान, प्रकाशन और प्रसार कार्य
भारत की पाण्डुलिपि विरासत को पुनर्जीवित करने के मिशन में क्षेत्रीय समन्वय और संस्थागत स्वायत्तता दोनों सुनिश्चित करना।
केंद्रीय बजट 2025-26 (अनुच्छेद 84) में घोषित, ज्ञान भारतम्, मंत्रालय की प्रमुख पहल है जो भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत की पहचान, दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और संवर्धन के लिए समर्पित है। इस पहल का उद्देश्य इस अमूल्य विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक, दोनों ही मंचों पर सुलभ बनाने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (एनडीआर) का निर्माण करना है।
शाम का समापन दिल्ली घराने के सैयद साहिल आगा और निज़ाम प्रेमी द्वारा प्रस्तुत दास्तानगोई संगीत प्रस्तुति "मेरे कबीर" के साथ हुआ, जिसमें भारत की गहन आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपराओं का जश्न मनाया गया। इस प्रस्तुति के बाद गणमान्य अतिथियों और अतिथियों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में एक मील का पत्थर है, जो संरक्षण को सहभागिता में और अभिलेखों को ज्ञान एवं प्रेरणा के जीवंत स्रोतों में परिवर्तित करता है। ज्ञान भारतम् के माध्यम से, भारत आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी कालातीत बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखने की अपनी स्थायी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।