मंडलायुक्त जम्मू रमेश कुमार ने भारी वर्षा और बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित जम्मू शहर के क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया। मंडलायुक्त के साथ जेपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक, जेएमसी कमिश्नर, उपायुक्त जम्मू, पीडब्ल्यूडी, जल शक्ति, पीडीडी के मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी भी थे।
उन्होंने बाढ़ व बारिश से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों और महत्वपूर्ण अवसंरचना स्थलों का निरीक्षण किया। दौरे की शुरुआत बाहू तहसील के कालका कॉलोनी से हुई, जहाँ उन्होंने तवी तटबंध और डूबे हुए मकानों को हुए नुक़सान का आकलन किया। उन्होंने नगर निगम जम्मू को प्रभावित लोगों को हर संभव मदद देने और क्षेत्र से गाद व मलबा हटाने के निर्देश दिए।
इसके बाद मंडलायुक्त, अधिकारियों की टीम के साथ हर की पौड़ी स्थित जल शोधन संयंत्र पर पहुँचे। उन्हें बताया गया कि संयंत्र को आंशिक रूप से चालू किया गया है। उन्होंने जल शक्ति विभाग के मुख्य अभियंता को जल्द से जल्द संयंत्र को पूर्ण क्षमता से कार्यशील बनाने के निर्देश दिए।
बिक्रम चैक स्थित राजीव कॉलोनी में उन्होंने उस तवी तटबंध की स्थिति देखी जो लगातार वर्षा से आई बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया था। उन्होंने जेपीडीसीएल और जल शक्ति विभाग के इंजीनियरों को राजीव कॉलोनी की जलापूर्ति योजना को तुरंत कार्यशील बनाने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने पीरखो क्षेत्र का भी दौरा किया, जो बाढ़ में सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ। वहाँ स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि जम्मू नगर निगम की ओर से समय पर मदद मिली और गलियों व मकानों से गाद व मलबा हटाया गया।
मीडिया से बातचीत के दौरान मंडलायुक्त ने बताया कि जम्मू शहर के अधिकांश क्षेत्रों में पानी और बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी गई है, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने तत्काल राहत प्रदान की है और निजी संपत्तियों के नुक़सान का आकलन कर उसे एसडीआरएफ मानकों के तहत मुआवज़ा देने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा “प्रशासन और सरकार भारी वर्षा व बाढ़ के पीड़ितों के साथ खड़ी है और उनके पुनर्वास में हर संभव सहायता की जाएगी।” बाद में मंडलायुक्त ने धौंतली जल शोधन संयंत्र का भी दौरा किया, जिसे आंशिक रूप से बहाल किया गया है। उन्होंने पीएचई विभाग के अधिकारियों को आज शाम तक संयंत्र को पूर्ण क्षमता से चालू करने के निर्देश दिए ताकि पुराने शहर में जलापूर्ति पूरी तरह बहाल हो सके।