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डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में देश के सातवें क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारम्भ किया

यह जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लिए जिला स्तरीय पूर्वानुमान प्रदान करने और अचानक बाढ़ तथा पर्वतीय मौसम संबंधी सटीक चेतावनी देने का केंद्र बनेगा

Dr Jitendra Singh, BJP, Bharatiya Janata Party, Regional Meteorological Centre, RMC, Satish Sharma, Jugal Kishore Sharma, Jammu
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जम्मू , 05 Jun 2026

Last updated on: Jun 06, 2026, 12:13 IST

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि भारत के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क के विस्तार के लिए जल्द ही लखनऊ में भी इसी प्रकार का एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। जम्मू स्थित यह केंद्र देश का सातवां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र बन गया है और यह जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश के लिए काम करेगा।

इसके साथ ही यह हिमालयी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार की गई मौसम सेवाएं, आपदा चेतावनी और जलवायु सहायता प्रदान करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह नया केंद्र मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पर्वतों तक फैले विविध भूभाग वाले क्षेत्र में मौसम की निगरानी, ​​पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा। 

यह जिला स्तरीय पूर्वानुमान, पर्वतीय मौसम पूर्वानुमान, पर्यटक सलाह, शहर-विशिष्ट मौसम सेवाएं और अचानक बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी हिमपात, आंधी-तूफान और भूस्खलन की चेतावनी प्रदान करेगा। इन सेवाओं से अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों, किसानों, परिवहन संचालकों, पनबिजली परियोजनाओं, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और दुर्गम भूभाग में कार्यरत सुरक्षा बलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था, लेकिन अब जम्मू, श्रीनगर, लेह और बनिहाल टॉप पर चार डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत हैं। मिशन मौसम के तहत अनंतनाग, राजौरी, बारामूला, किश्तवार और डोडा के लिए पांच अतिरिक्त डॉप्लर मौसम रडार प्रस्तावित किए गए हैं।

अवलोकन नेटवर्क का भी काफी विस्तार हुआ है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 56 वेधशालाएं हैं, जिनमें 15 मैनुअल वेधशालाएं, 25 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और 16 स्वचालित वर्षामापी (एआरजी) शामिल हैं, जबकि 2014 में 13 एडब्ल्यूएस और 14 एआरजी थी। हाल ही में, करगिल, रामबन जिले के उखराल और माता वैष्णो देवी भवन में एडब्ल्यूएस स्थापित किए गए हैं।

चालू वित्त वर्ष में लगभग आठ और एडब्ल्यूएस तथा पांच एआरजी स्थापित किए जाने की उम्मीद है। दैनिक वर्षा निगरानी योजना के अंतर्गत स्टेशनों की संख्या 2014 में 30 से बढ़कर वर्तमान में 85 हो गई है, जिससे वर्षा की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरएमसी जम्मू की स्थापना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय संचालन का एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन है।

अब तक, दिल्ली स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करता था। जम्मू केंद्र की स्थापना के साथ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लिए मौसम सेवाओं का प्रबंधन जम्मू से किया जाएगा, जबकि प्रस्तावित लखनऊ केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सेवाएं प्रदान करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र में शुरू की गई कई वैज्ञानिक और संस्थागत पहलों पर भी प्रकाश डाला। श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने मौसम और जलवायु विज्ञान में अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी)-जम्मू, एसकेयूएएसटी-कश्मीर और इस्लामिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बादलों और एरोसोल के अध्ययन के लिए स्विस वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से पटनीटॉप में स्थापित काफी ऊंचाई वाले बादल भौतिकी प्रयोगशाला का भी उल्लेख किया। भूकंप निगरानी पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय नेटवर्क का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय स्टेशनों को डिजिटल सिस्टम में अपग्रेड किया गया है और उधमपुर में एक अतिरिक्त वेधशाला स्थापित की गई है।

किश्तवार में भी एक नई भूकंपीय वेधशाला प्रस्तावित है। वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में पांच भूकंपीय स्टेशन कार्यरत हैं, जो राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को लगभग वास्तविक समय का डेटा भेजते हैं। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि पिछले वर्ष की आपदा के मद्देनजर किश्तवार में एक स्वचालित मौसम केंद्र और एक भूकंप विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि एक सदी से अधिक समय से कार्यरत श्रीनगर मौसम विज्ञान वेधशाला को विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा शताब्दी वेधशाला के रूप में मान्यता दी गई है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब क्षेत्रीय पूर्वानुमान, जिलावार पूर्वानुमान, पर्यटकों के लिए अलग पूर्वानुमान और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग पूर्वानुमान उपलब्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि अनुकूलित पूर्वानुमान हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा। आपदा प्रबंधन में मौसम सेवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और भूस्खलन - इन सभी का समय पर पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

 

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