उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीर विश्वविद्यालय में भव्य पूर्व छात्र सम्मेलन-2025 को संबोधित किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई, केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजिजू, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत,सर्वोच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मिथल, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे, कश्मीर विश्वविद्यालय की उपकुलपति प्रो. नीलोफर खान और कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।
अपने संबोधन में, उपराज्यपाल ने पूर्व छात्रों को बधाई दी और कश्मीर विश्वविद्यालय की उन प्रतिभाशाली दिमागों को पोषित करने के लिए सराहना की, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और दुनिया भर में सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पूर्व छात्र केवल पूर्व छात्रों का एक नेटवर्क नहीं है, बल्कि मानवीय क्षमता का एक नेटवर्क है जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है। आज, हम उन पूर्व छात्रों को अपने बीच पाकर गौरवान्वित हैं जिन्होंने वास्तव में राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। वे कश्मीर विश्वविद्यालय की 77 वर्षों की विरासत के जीवंत प्रमाण हैं।“
उपराज्यपाल ने प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों से जम्मू-कश्मीर के उच्च शिक्षण संस्थानों को मज़बूत करने के लिए आगे आने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और नेटवर्क का उपयोग करके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की शांति और प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।
उपराज्यपाल ने आगे ज़ोर देकर कहा कि पूर्व छात्रों को युवा छात्रों को उनकी इंटर्नशिप और करियर की संभावनाओं में आवश्यक सहयोग और सहायता प्रदान करनी चाहिए, उन्हें प्रेरित, मार्गदर्शन और सशक्त बनाना चाहिए और नई पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करना चाहिए।
“निःस्वार्थ आदान-प्रदान की परंपरा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। मेरा मानना है कि वैश्वीकरण के युग में, पूर्व छात्रों का जुड़ाव किसी भी संस्थान और क्षेत्र के विकास के लिए सबसे प्रभावी रणनीति है। कश्मीर विश्वविद्यालय को पूर्व छात्रों के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाना चाहिए जो उन्हें विश्वविद्यालय को कुछ वापस देने का अवसर प्रदान करे।”
उपराज्यपाल ने भारत के अतीत के गौरव को पुनस्र्थापित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अक्षरशः लागू करने पर ज़ोर दिया। जम्मू कश्मीर ने इस दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन योर ओन डिग्री जैसे हमारे अभिनव कार्यक्रम देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
उपराज्यपाल ने हाल ही में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद में प्रतिष्ठित ए$$ ग्रेड प्राप्त करने और देश के शीर्ष संस्थानों में अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय को बधाई दी। इस सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. करण सिंह, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद, सांसद मियां अल्ताफ अहमद, न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल, न्यायमूर्ति संजय धर, न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी, न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) और कश्मीर विश्वविद्यालय के अन्य प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के अनुकरणीय योगदान को सम्मानित किया गया।