मुख्य सचिव, अटल डुल्लू ने आज स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण-2 की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें ग्रामीण स्वच्छता में महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया और भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त सचिव के अलावा समीक्षा बैठक में ग्रामीण स्वच्छता विभाग के प्रबंध निदेशक, मुख्य परिचालन अधिकारी, हिमायत और अन्य ने भाग लिया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच मुक्त स्थिति और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने का मूल्यांकन किया गया।
समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर कचरा संग्रहण की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्राम स्तर पर इस पहल के वास्तविक कार्यान्वयन और प्रगति का आकलन करने के लिए प्रत्येक ज़िले में अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी कार्यालयों के माध्यम से एक नमूना सर्वेक्षण किया जाए।
डुल्लू ने विभाग द्वारा सृजित संपत्तियों का व्यापक ऑडिट करने का भी आह्वान किया। उन्होंने डैशबोर्ड के आंकड़ों को ज़मीनी हकीकत से जोड़ने और दोनों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। इन बुनियादी ढाँचे में निवेश के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य स्वच्छता को बढ़ावा देना और गाँवों को अधिक रहने योग्य और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
ग्रामीण स्वच्छता विभाग की प्रबंध निदेशक, अनु मल्होत्रा ने प्रगति और उपलब्धियों पर बात करते हुए बताया कि फरवरी 2020 में अपनी शुरुआत के बाद से, स्वच्छ भारत मिशन-जी के दूसरे चरण ने जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विस्तार से बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 8,450 सामुदायिक कम्पोस्ट पिट और 1,69,158 व्यक्तिगत कम्पोस्ट पिट सहित 18,29,495 व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है।
ग्रे वाटर प्रबंधन के लिए, उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 7,334 सामुदायिक सोख गड्ढे, 3,56,458 व्यक्तिगत सोख गड्ढे और 4,89,250 व्यक्तिगत किचन गार्डन विकसित किए गए हैं। इसके अलावा, वार्षिक कार्यान्वयन योजना 2024-25 के बारे में कहा गया कि नियोजित लक्ष्यों के सापेक्ष उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की गईं, जिनमें 36,000 के लक्ष्य के सापेक्ष 43,280 आईएचएचएल और 1,000 के लक्ष्य के सापेक्ष 740 सीएससी का निर्माण शामिल है।
2025-26 के संबंध में बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में एसबीएम (जी) के लिए 405 करोड़ रुपये की एआईपी स्वीकृत की गई है, जिसमें से 2025-26 के लिए केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 61.25 करोड़ रुपये 27 जून, 2025 को स्वीकृत किए गए थे।
इसी प्रकार, केंद्र शासित प्रदेश का लगभग 700.00 लाख रुपये का हिस्सा जारी किया गया है। परिसंपत्तियों की कार्यक्षमता के संबंध में, एमवाटरडैश बोर्ड नामक एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म विभाग द्वारा बनाई गई प्रत्येक संपत्ति के बारे में जानकारी देता है।
यह पता चला कि इस डैशबोर्ड पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 7,562 सीएससी में से 7,317 सत्यापित हैं और कार्यात्मक (100 प्रतिषत सत्यापित) बताए गए हैं। इसी प्रकार, 2,900 पृथक्करण शेड में से 2,585 सत्यापित बताए गए हैं और कार्यात्मक पाए गए हैं (45 प्रतिषत सत्यापित)। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों के बारे मेंः 131 सत्यापित संपत्तियों में से 96 कार्यशील हैं।
560 निष्क्रिय इकाइयों को वर्तमान में कार्यशील बनाने के लिए पुनर्निर्मित किया जा रहा है। यह बताया गया कि कुल 6,650 गाँवों में से 4,585 गाँव (69 प्रतिषत) घर-घर कचरा संग्रहण के अंतर्गत आते हैं। दिसंबर 2024 तक एकत्रित उपयोगकर्ता शुल्क 141.40 लाख रुपये था, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 32.14 लाख रुपये अतिरिक्त एकत्र किए गए।
केंद्र शासित प्रदेश के पास 874 खरीदे गए और 84 किराए पर लिए गए संग्रहण वाहन हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि स्वच्छ, हरित और सतत श्री अमरनाथ जी यात्रा 2025 सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियाँ की गई हैं, जिसमें 7,404 सफाई कर्मचारियों की तैनाती, 5,613 शौचालय/स्नानघर, 15 अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएँ और 80 सोखने वाले गड्ढों सहित मज़बूत स्वच्छता उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
यात्रा मार्गों पर दृश्यों, संकेतों और सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए एक समर्पित सूचना और संचार अभियान चलाया जा रहा है, जिसके साथ एक वेब-सह-मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से तकनीक-सक्षम अपशिष्ट निगरानी प्रणाली भी स्थापित की जा रही है। जुलाई 2025 तक, कुल 192.61 मीट्रिक टन कचरा एकत्र किया जा चुका है, जिसमें बालटाल मार्ग से 125.75 मीट्रिक टन और पहलगाम अक्ष से 66.86 मीट्रिक टन कचरा शामिल है।
विभाग द्वारा शुरू की गई अभिनव पहलों को दर्शाने वाली एसबीएम-जी की कुछ सर्वोत्तम प्रथाओं में ईको-कारीगर (अपशिष्ट से धन पहल), संदेश-ए-स्वच्छता, पीएमईजीपी के अंतर्गत पीडब्ल्यूएमयू सुविधा, सामुदायिक सोखने वाले गड्ढे पर सार्वजनिक पार्क, डीईडब्ल्यूएटी प्रणाली, एक समुदाय-संचालित ग्रेवाटर प्रबंधन इकाई और केंद्रीय कारागार श्रीनगर में प्रशिक्षित कैदियों द्वारा संचालित जैविक अपशिष्ट खाद बनाने की मशीन शामिल है, जो प्रतिदिन 500 किलोग्राम ठोस अपशिष्ट को जैविक खाद में परिवर्तित करती है।
बाद में मुख्य सचिव ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के कामकाज का भी जायजा लिया। यह योजना 18-35 वर्ष की आयु के ग्रामीण गरीब युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट पर केंद्रित है। यह योजना प्लेसमेंट-आधारित कौशल प्रदान करती है, जिसमें प्लेसमेंट के बाद सहायता, करियर में प्रगति और स्थायी रोजगार पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इस योजना के कार्यान्वयन की गति बढ़ाने पर ज़ोर दिया क्योंकि धनराशि उपलब्ध है और व्यय कम है। उन्होंने इस कार्यक्रम के तहत प्लेसमेंट की गुणवत्ता और मात्रा, दोनों के मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
हिमायत के मुख्य परिचालन अधिकारी रजनीश गुप्ता ने इस योजना के कार्यान्वयन और सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 17,000 प्लेसमेंट हो चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र शासित प्रदेश में इसके संचालन के शुरुआती चरण के बाद, कार्यान्वयन में तेज़ी आने के साथ ही व्यय में वृद्धि होगी।