Wednesday, 22 July 2026

 

 

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अटल डुल्लू ने डीए-जेजीयूए के तहत आदिवासी क्षेत्रों के समतापूर्ण विकास हेतु बैठक आयोजित की

Atal Dulloo, Kashmir, Jammu And Kashmir, Jammu, Chief Secretary Kashmir
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5 Dariya News

श्रीनगर , 18 Jun 2025

Last updated on: Jun 19, 2025, 13:40 IST

आदिवासी समुदायों के समतापूर्ण और समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक मानव विकास के उद्देश्य से भारत सरकार की एक प्रमुख पहल ’धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के कार्यान्वयन की समीक्षा और उसमें तेजी लाने के लिए पहली शीर्ष समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

इस महत्वपूर्ण बैठक में जनजातीय मामलों के सचिव के अलावा प्रमुख प्रशासनिक हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें प्रमुख सचिव विद्युत विकास विभाग, प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, आयुक्त सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, सचिव योजना, सचिव स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा, सचिव सूचना प्रौद्योगिकी, सचिव ग्रामीण विकास विभाग के साथ-साथ अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस योजना का लाभ जम्मू-कश्मीर के सभी आदिवासी क्षेत्रों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाने के लिए सावधानीपूर्वक काम करें। उन्होंने जमीनी स्तर पर मजबूत डेटा सत्यापन के महत्व पर विशेष जोर दिया।

मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की जमीनी सच्चाई का पता लगाने के लिए कहा। उन्होंने इन गांवों का भौतिक रूप से दौरा करने को कहा ताकि क्षेत्र में जाकर, योजना के तहत निर्धारित 25 प्रमुख मापदंडों के आधार पर सभी कमियों की सावधानीपूर्वक पहचान की जा सके। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी हस्तक्षेप के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा ही आधार है। संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया, जो विशेष रूप से पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए तैयार की गई हो। 

पहल की अनूठी प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए, मुख्य सचिव ने दोहराया कि यह योजना इन गांवों को व्यापक रूप से विकसित करने तथा स्थायी परिवर्तन लाने के लिए एक अनूठा, केंद्रित अवसर प्रस्तुत करती है। मुख्य सचिव ने उपायुक्तों से अपने-अपने जिलों में पूरी प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का आह्वान भी किया। 

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निगरानी डेटा के गुणात्मक संग्रह तथा उसके बाद के अंतर विश्लेषण को सुनिश्चित करेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य के हस्तक्षेप जमीनी स्तर पर फलदायी तथा परिणामोन्मुखी हों, जिससे आदिवासी समुदायों के जीवन में ठोस सुधार हो।

इस योजना के कार्यान्वयन में प्रमुख घटकों और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए जनजातीय मामलों के सचिव प्रसन्ना जी. रामास्वामी ने बताया कि डीए-जेजीयूए दो प्राथमिक घटकों के माध्यम से संचालित होता है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष वित्त पोषण के साथ एक, जिसके तहत परियोजना मूल्यांकन समिति ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 877.10 लाख रुपये की राशि के प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें 500.00 लाख रुपये के वित्त पोषण के साथ 5 जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्र की स्थापना शामिल है।

सचिव ने आगे बताया कि इस योजना में 377.10 लाख रुपये के परिव्यय के साथ यूटी स्तर पर एक और जिला स्तर पर बीस वन अधिकार अधिनियम प्रकोष्ठों की स्थापना की परिकल्पना भी की गई है। ये प्रकोष्ठ एफआरए दावों के प्रबंधन और सीएफआर प्रबंधन योजनाओं को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

जैसा कि बताया गया है, एक अन्य घटक को भारत सरकार के कई मंत्रालयों द्वारा अनुसूचित जनजातियों के लिए उनके विकासात्मक कार्य योजना/जनजातीय उपयोजना दायित्वों के तहत वित्त पोषित किया जाता है। पहचाने गए गांवों को विशिष्ट मानदंडों को पूरा करना चाहिए, जिसमें 500 या उससे अधिक की आबादी वाले कम से कम 50 प्रतिषत एसटी आबादी वाले या 50 या उससे अधिक अनुसूचित जनजातियों वाले आकांक्षी जिलों के गांव शामिल हैं।

इसके अलावा जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आवास और सड़क संपर्क से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार पहुंच तक 25 प्रमुख संकेतकों को शामिल करते हुए एक प्रारंभिक अंतर विश्लेषण किया गया है। विकासात्मक आवश्यकताओं का सटीक आकलन सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभाओं के माध्यम से गांव स्तर पर जमीनी स्तर पर इस डेटा का सख्ती से सत्यापन किया जा रहा है।

इसके अलावा सत्रह मंत्रालय इन पहचाने गए अंतरालों को भरने और सभी 25 स्वीकृत हस्तक्षेपों के लाभों से आदिवासी गांवों को संतृप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें पीएमएवाई-जी, पीएमजीएसवाई, जल जीवन मिशन, आरडीएसएस, पीएम उज्ज्वला योजना, पोषण अभियान, समग्र शिक्षा अभियान और कौशल विकास, टिकाऊ कृषि और पर्यटन के लिए विभिन्न योजनाएं शामिल हैं।

जनजातीय गांवों के घटक के लिए, सत्यापित गांव-वार अंतराल, यूटी स्तर की शीर्ष समिति द्वारा अनुमोदित होने के बाद, डीए-जेजीयूए के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जम्मू-कश्मीर में विभिन्न लाइन विभागों द्वारा समन्वित प्रयास का मार्गदर्शन करेंगे। 

इसमें आईईसी अभियान शुरू करना, डीएपीएसटी योजनाओं के तहत अलग-अलग बजट लाइनें स्थापित करना, व्यापक आधारभूत मूल्यांकन करना और वित्त पोषण के लिए संबंधित मंत्रालयों को प्रस्तुत करने के लिए अंतराल विश्लेषण के साथ संरेखित विस्तृत परियोजना प्रस्ताव तैयार करना शामिल है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों को समग्र विकास के लिए आवश्यक सेवाओं और अवसरों से संतृप्त करना है। 2024 में शुरू किया गया यह मिशन देश भर के जनजातीय गांवों में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों को शामिल करते हुए एक बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर केंद्रित है।

 

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