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लोनावला में एनएएम कॉन्क्लेव 2025 की शुरुआत, आयुष स्वास्थ्य सेवा के भविष्य की रूपरेखा तैयार

हमारा लक्ष्य ‘बीमारी से तंदुरुस्ती’ की दिशा में बढ़ते हुए अंतत: प्रसन्‍नता प्राप्‍त करना है : प्रतापराव जाधव

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5 Dariya News

महाराष्ट्र , 01 May 2025

Last updated on: May 02, 2025, 14:56 IST

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आयुष क्षेत्र में उठाए गए कदमों पर जोर देते हुए और अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) सम्मेलन 2025 आज कैवल्यधाम, लोनावाला (महाराष्ट्र) में आरंभ हुआ। यह कार्यक्रम समूचे देश में आयुष सेवाओं की पहुंच को मजबूत बनाने और उनका विस्‍तार करने के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करता है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों  के आयुष/स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें राजस्थान सरकार के उप मुख्यमंत्री और आयुष के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा; आंध्र प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री वाई. सत्य कुमार यादव; उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्रा 'दयालु'; छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल; हिमाचल प्रदेश सरकार के आयुष, युवा सेवा और खेल और कानून मंत्री श्री यादविंदर गोमा; सिक्किम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और संस्कृति मंत्री श्री जीटी धुंगेल; और मिजोरम सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्रीमती पी लालरिनपुई शामिल थीं।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित यह सम्मेलन आयुष विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य व्‍यवसायियों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों को एक साथ लाया है। इसका उद्देश्य चिकित्सा की पारंपरिक भारतीय प्रणालियों के मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में एकीकरण को सशक्‍त बनाना है ताकि आम नागरिक के लिए तंदुरूस्‍ती अधिक सुलभ, किफायती और साक्ष्य-आधारित बन सके।

सम्मेलन की शुरुआत करते हुए केंद्रीय आयुष मंत्री ने कहा, “उल्लेखनीय है कि मंत्रालय ने 2023 में एक एनएएम सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने एनएएम योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्‍वपूर्ण विचार साझा किए गए थे। 

उस विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आयुष मिशन के निष्पादन और परिणामों को बेहतर बनाने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई। 12,500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) की स्थापना की पहल ने स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसके लाभार्थियों की संख्या 2021 में 1.5 करोड़ से बढ़कर 2025 में 11.5 करोड़ से अधिक हो गई है।

इसके परिणामस्वरूप, बेहतर बुनियादी ढांचे, दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित जनशक्ति और मजबूत शैक्षणिक संस्थानों की बदौलत आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।” अतीत की सफलता से उत्साहित केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय आयुष मिशन सम्मेलन  का यह दूसरा संस्करण राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार दोनों के लिए मिशन की प्रगति की संयुक्त समीक्षा करने, शासन प्रणालियों को मजबूत बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने, वित्तीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर त्‍वरित और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के एक मजबूत मंच के रूप में काम करेगा। 

इस अवसर पर, मैं राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और केंद्र दोनों स्तरों पर अथक परिश्रम करने वाली टीमों को सम्मेलन  की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं कैवल्यधाम की समर्पित और प्रतिबद्ध टीम के अथक प्रयासों के लिए अपना आभार भी व्यक्त करता हूं।”

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने अपने स्वागत भाषण में एनएएम के माध्यम से आयुष क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर जोर दिया और कहा, “2014 में 78 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट के साथ अपनी स्थापना के बाद से, राष्ट्रीय आयुष मिशन के आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2025-26 में 1275 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है - जो इस योजना की अपार सफलता तथा आयुष स्वास्थ्य सेवा को देश भर में मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

आयुष प्रणालियाँ अपने समग्र दृष्टिकोण, व्यक्तिगत देखभाल और मजबूत सरकारी समर्थन से बढ़ती वैश्विक रुचि के कारण प्रमुखता प्राप्त कर रही हैं। सचिव ने कहा कि एनएसएसओ (2022-23) के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत ग्रामीण और 96 प्रतिशत शहरी भारतीय आयुष से अवगत हैं, लाखों लोग नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं - जो बढ़ते विश्वास और देशव्यापी स्वीकृति का संकेत है”,

उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा ने राष्ट्रीय आयुष मिशन जैसी प्रगतिशील योजनाओं के माध्यम से राज्य की एकीकृत स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। मंत्री महोदय ने इस बात का भी उल्लेख किया, “दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने आयुष क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। 

वर्तमान में, राज्य में आयुष के 3,959 अस्पताल परिचालन में हैं, जो 4 बिस्‍तरों, 15 बिस्‍तरों, 25 बिस्‍तरों और 30 बिस्‍तरों की क्षमता वाली सुविधाएँ प्रदान करते हैं।" छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “आयुष और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को मिलाकर एकीकृत चिकित्सा सार्थक समाधान प्रस्तुत करती है, जिससे रोगियों को दोहरा लाभ मिलता है।”

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री श्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा, “माननीय केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव, आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से आयुर्वेद को जनसाधारण तक पहुँचाया जा रहा है। उम्मीद है कि यह दो दिवसीय सम्मेलन आयुर्वेद के विकास में महत्‍वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। 

राज्य सरकार सभी आयुष प्रणालियों के एकीकृत विकास के प्रति लक्षित एक व्यापक आयुष नीति तैयार कर रही है। हिमाचल प्रदेश के आयुष मंत्री श्री यादविंदर गोमा ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन की सहायता के जरिए किस तरह स्वास्थ्य सेवा का बुनियादी ढांचा लगातार बढ़ता जा रहा है। 

उन्होंने यह भी कहा, “हिमाचल प्रदेश ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ सम्मिलित करते हुए, ग्रामीण क्षेत्रों तक उसकी पहुँच सुनिश्चित करते हुए, महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए और डिजिटल समाधानों के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाते हुए आयुष क्षेत्र में एक एकीकृत मॉडल विकसित किया है। 

यह प्रगति प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के 'आयुष्मान भारत' के विजन को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। मिजोरम सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्रीमती पी लालरिनपुई ने कहा, “मुझे यह जानकर बेहद खुशी हो रही है कि हमारे आयुष वेलनेस सेंटर की स्थापना के बाद से, विभिन्न आयुष प्रणालियों ने कुछ ही वर्षों में काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है। 

यह प्रगति काफी हद तक मंत्रालय से प्राप्त मजबूत सहायता तथा राज्य और केंद्र स्तर पर हमारी समर्पित टीमों के अथक प्रयासों का परिणाम है।” सिक्किम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जी.टी. धुंगेल ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से केंद्र सरकार की सहायता की सराहना करते हुए कहा, “सिक्किम सरकार राज्य के सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं  की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है और एनएएम योजना ने राज्य में एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद की है, जो इन प्रयासों को काफी हद तक पूर्णता प्रदान करती है।”

इस सम्मेलन के विषयों के बारे में अपने विचार प्रकट करते हुए आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री कविता गर्ग ने प्रमुख उपलब्धियाँ साझा कीं: “आयुष तृतीयक देखभाल संस्थानों में 5.6 करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों ने सेवाएँ प्राप्त की हैं। 1,372 आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के लिए एनएबीएच प्रवेश-स्तर प्रमाणन और 189 एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना गुणवत्ता और पहुँच के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

आरंभिक सत्र का मुख्य आकर्षण माननीय केंद्रीय मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा आयुष चिकित्सा प्रणालियों में चयापचयी विकारों पर मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी)  जारी किया जाना रहा। विभिन्न अनुसंधान परिषदों के सहयोग से आयुष वर्टिकल द्वारा विकसित ये दिशानिर्देश पांच प्रमुख चयापचयी विकारों को कवर करते हैं- डायबिटीज मैलिटस, मोटापा, गठिया, नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी), और डिस्लिपिडेमिया। 

एलोपैथिक विशेषज्ञों द्वारा जांचे गए एसटीजी योग, रोग-विशिष्ट आहार प्रोटोकॉल और मानकीकृत नैदानिक ​​प्रक्रियाओं को एकीकृत करते हैं ताकि देश भर के चिकित्सकों, शिक्षकों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए एक व्यापक संदर्भ के रूप में काम आ सकें।

आरंभिक सत्र के बाद विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आयुष/स्वास्थ्य मंत्रियों के बीच गोलमेज चर्चा हुई, जिसमें अपने-अपने राज्यों में एनएएम गतिविधियों के माध्यम से देश में आयुष सेवाओं को मजबूत करने के तरीके पर ध्यान केंद्रित किया गया। 

इस सत्र की अध्यक्षता माननीय केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने की, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों और संबंधित अधिकारियों ने चुनौतियों का समाधान करने और अवसरों के बारे में चर्चा करने के लिए संबंधित भावी  रणनीतियों की ओर इंगित करते हुए अपने अनुभवजन्य ज्ञान का आदान-प्रदान किया।

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष वाई-ब्रेक सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें माननीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के बारे में:

प्रमुख कार्यक्रम राष्ट्रीय आयुष मिशन को 2014 में आरंभ किया गया था और इसने भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को संरक्षित करने और बढ़ावा देने तथा उन्हें मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका उद्देश्य भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) के माध्यम से पूरे देश में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, पहुँच और गुणवत्ता को बढ़ाना है।

2023 में आयोजित एनएएम सम्मेलन के पिछले संस्करण में आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर-आयुष) का विस्तार, आयुष सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ एकीकृत करना और आयुष चिकित्सकों का क्षमता निर्माण सहित कई प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए थे। 2025 के संस्करण का उद्देश्य नवाचार, मानकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय पहुंच पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाना है।

 

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