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जगत प्रकाश नड्डा ने एनसीआई झज्जर में एम्स ऑन्कोलॉजी कॉन्क्लेव 2025 का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की स्थिति बदल रही है और एनसीआई जैसे संस्थानों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट संभव हुआ है : जगत प्रकाश नड्डा

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झज्जर , 15 Feb 2025

Last updated on: Feb 15, 2025, 00:00 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज  झज्जर के एम्स परिसर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) में दूसरे एम्स ऑन्कोलॉजी कॉन्क्लेव 2025 का उद्घाटन किया। झज्जर के एम्स परिसर का राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) भारत में सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा परियोजनाओं में से एक है, जो अभिनव कैंसर देखभाल और अनुसंधान क्षमताएं प्रदान करने के लिए समर्पित है। 

एम्स ऑन्कोलॉजी कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारत के सभी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (आईएनआई) में ऑन्कोलॉजी के प्रमुखों विशेषज्ञों को एक साथ लाना है, ताकि कैंसर देखभाल, उपचार पद्धतियों और मौजूदा अनुसंधान पहलों में प्रगति पर चर्चा की जा सके। ब्रेस्ट कैंसर और सिर व गर्दन के कैंसर पर ध्यान केंद्रित करते हुए, कॉन्क्लेव ने ऐसे कैंसर की रोकथाम और प्रबंधन में सहयोगी प्रयासों पर जोर दिया।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने 2019 में इसके उद्घाटन के बाद से एनसीआई के विकास और प्रगति पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि “संस्थान 6 वर्ष की छोटी सी अवधि में एक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में विकसित हो गया है और समय के साथ, यह बहु-विषयक देखभाल तथा बेहतर रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने वाले एक रेफरल केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।” 

उन्होंने इस दिशा में प्रगति के लिए संस्थान के डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासन के समर्पण की सराहना की। श्री नड्डा ने एनसीआई में नवनिर्मित न्यूक्लियर मेडिसिन टार्गेटेड ट्रीटमेंट वार्ड और बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट का भी विशेष दौरा किया, जिसका उद्देश्य क्रमशः थायरॉयड कैंसर और हेमेटोलिम्फोइड कैंसर के लिए अत्याधुनिक उपचार विकल्पों के माध्यम से रोगी के परिणामों में सुधार करना है। 

इन विस्तार के महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री नड्डा ने कहा “ये नई सुविधाएं इस क्षेत्र के कई कैंसर रोगियों को अत्याधुनिक देखभाल प्रदान करेंगी।” उन्होंने कहा “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में, भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की स्थिति बदल रही है और एनसीआई जैसे संस्थानों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट संभव हुआ है।” 

उन्होंने न्यूक्लियर मेडिसिन टार्गेटेड ट्रीटमेंट वार्ड की उच्च-गुणवत्ता वाली सटीकता और उच्च-गुणवत्ता वाली सेवाओं की प्रशंसा की तथा रेखांकित किया कि ये सुविधाएं हार्डवेयर हैं जबकि संकाय सदस्य और डॉक्टर मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित करने के सॉफ्टवेयर हैं।

श्री नड्डा ने यह भी कहा "कैंसर एक कठिन निदान है जो भय पैदा करता है- न केवल बीमारी का, बल्कि भविष्य का, आजीविका का, प्रियजनों को खोने का, और अपरिहार्य आर्थिक और भावनात्मक तनाव का।" उन्होंने इंफोसिस फाउंडेशन द्वारा विकसति एनसीआई में विश्राम सदन का भी दौरा किया और सराहना की। 

यह मरीजों के परिचारकों (अटेंडेंट) के लिए किफायती आवास प्रदान करता है, जिससे चुनौतीपूर्ण समय के दौरान परिवारों को सहायता मिलती है। यह जरूरतमंदों को मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक सहायता भी प्रदान करता है, जो अन्य के लिए एक मानक स्थापित करता है।

संस्थान में नवाचार की सराहना करते हुए, श्री नड्डा ने कहा “संस्थान स्टार्टअप के साथ सहयोग कर रहा है, पीएचडी छात्रों को शामिल कर रहा है और एम्स के वैज्ञानिकों को ऐसे अनुसंधान में शामिल कर रहा है, जिसमें न केवल बाजार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग होंगे। 

एक “इनक्यूबेटर” के रूप में, सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप  (सीएमआईई) स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचारों को आगे बढ़ाने और उनका सहयोग करने के लिए जिम्मेदार है। भारतीय स्टार्ट-अप को एम्स के संकाय और वैज्ञानिकों के परामर्श व मार्गदर्शन का लाभ उठाने में सक्षम बनाकर और उन्हें नाममात्र भुगतान पर एम्स में उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों और संसाधनों तक पहुंच प्रदान करके, सीएमआईई नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है।” 

उन्होंने उन बूट कैंपों की भी सराहना की, जिन्होंने उभरते स्टार्ट-अप और उद्यमियों को भारत में, भारत के लिए स्वास्थ्य सेवा समाधानों के बारे में विचार और निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित किया। भारत सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा "कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण, समग्र कैंसर देखभाल परिणामों में सुधार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रत्येक नागरिक को, चाहे वह कहीं भी रहता हो, आवश्यक देखभाल उपलब्ध हो, सरकार रोकथाम और जांच के रूप में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर तथा निदान और उपचार तथा उपशामक देखभाल के रूप में तृतीयक और द्वितीयक स्तर पर कैंसर देखभाल के प्रावधान पर काम कर रही है।"

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एनएचएम के तहत 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की जांच शुरू की है और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 26 करोड़ से अधिक लोगों की ओरल कैंसर, 14 करोड़ लोगों की ब्रेस्ट कैंसर और 9 करोड़ लोगों की सर्वाइकल कैंसर की जांच की गई है। 

उन्होंने यह भी कहा “कैंसर की तृतीयक स्तर की देखभाल के लिए सुविधाओं को बढ़ाने के लिए, पिछले कुछ वर्षों में 19 राज्य कैंसर संस्थानों (एससीआई) और 20 तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्रों (टीसीसीसी) के लिए 2014-15 से 2025-26 की अवधि के लिए 3000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई है। 

इसके अलावा, सभी 22 नए एम्स में डायग्नोस्टिक, मेडिकल और सर्जिकल सुविधाओं के साथ कैंसर उपचार सुविधाओं को मंजूरी दी गई है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एबी पीएम-जेएवाई के तहत गरीबों और कमज़ोर तबके के लोगों को कैंसर का उपचार उपलब्ध कराने के लिए, 219 पैकेजों में मेडिकल, सर्जिकल, रेडिएशन और पैलिएटिव ऑन्कोलॉजी के लिए कैंसर से संबंधित उपचार प्रदान किया जाता है। 

एबी पीएम-जेएवाई की शुरुआत के बाद से, इस योजना के तहत कैंसर से संबंधित पैकेजों के लिए लगभग 68.43 लाख अस्पताल में भर्ती मरीजों को 13160.75 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।" लैंसेट  के हालिया अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने रेखांकित किया "आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के कारण समय पर कैंसर उपचार की शुरुआत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 

एबी-पीएमजेएवाई के तहत नामांकित मरीजों के 30 दिनों के भीतर कैंसर के उपचार तक पहुंच में 90 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।" उन्होंने यह भी बताया कि "देश भर में फैली 217 अमृत फार्मेसियों के माध्यम से, कैंसर सहित विभिन्न रोगों के लिए 5200 दवाएं सस्ती दर पर उपलब्ध कराई गई हैं। 

कुल मिलाकर, 289 ऑन्कोलॉजी दवाएं बाजार दरों से 50 प्रतिशत तक की महत्वपूर्ण छूट पर दी जाती हैं। परिणामस्वरूप, अब तक दी गई छूट के आधार पर 5.8 करोड़ लाभार्थियों को कुल 6567 करोड़ रुपये की बचत हुई है।" श्री नड्डा ने यह भी कहा कि हमारी योजना अगले तीन वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर (डीसीसीसी) स्थापित करने की है और इस वर्ष 200 सेंटर खोले जाएंगे। 

इस पहल का उद्देश्य आवश्यक कैंसर सेवाओं को खासतौर पर वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में घर के करीब पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि यह संस्थान देश भर के अन्य एम्स और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (आईएनआई) के साथ मिलकर अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। 

एम्स ऑन्कोलॉजी कॉन्क्लेव 2025 इस दिशा में एक और कदम है। इस कॉन्क्लेव को कैंसर अनुसंधान, उपचार संबंधी रणनीतियों और रोकथाम में नवीनतम प्रगति पर सहयोग करने के लिए सभी एम्स और आईएनआई के प्रमुख विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं व चिकित्सकों को एक साथ लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

श्री नड्डा ने मरीजों को स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सीखने, साझा करने और प्रगति करने में डॉक्टरों और अन्य हितधारकों द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा "कैंसर देखभाल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आगे बढ़ने की दिशा में एक साथ आना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। 

मुझे उम्मीद है कि यह पहल एक मजबूत सहयोग में विकसित होगी जहां राष्ट्रीय कैंसर संस्थान अन्य संस्थानों को सहयोग और सहायता प्रदान कर सकेगा।" उन्होंने यह भी बताया “भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। अब हम हर साल 1.45 मिलियन नए कैंसर रोगियों को देख रहे हैं। 

चूंकि कैंसर के उपचार की जटिलता बढ़ती जा रही है, इसलिए यह केवल सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के बारे में नहीं है- यह उस उपचार को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के बारे में है। मरीजों को आवश्यक देखभाल के लिए लंबी दूरी की यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

हमें स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर उन्नत उपचार क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता है, और ऐसा करना आपकी ज़िम्मेदारी है। "उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारत सरकार ने एनसीआई झज्जर के लिए 720 अतिरिक्त पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है। 

इन पदों में संकाय पद, एसआर/जेआर, वैज्ञानिक, नर्स, तकनीशियन और प्रशासनिक पद शामिल हैं और उन्होंने कहा "इन अतिरिक्त पदों के सृजन के साथ, एनसीआई नई ऊंचाइयों को छुएगा।" श्री नड्डा ने पिछले 5 वर्षों में एनसीआई में इलाज करा रहे मरीजों को प्रतिस्थापन-दान निःशुल्क रक्ताधान सेवाएं सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों को भी सम्मानित किया। 

इसके अलावा, उन्होंने एनसीआई की निवारक ऑन्कोलॉजी इकाई के तंबाकू निषेध अभियान के एक भाग के रूप में एक शिक्षाप्रद लघु फिल्म भी लॉन्च की। “ब्रेस्ट कैंसर में प्रैक्टिस और अनुसंधान के अवसरों पर चर्चा” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, ज्ञान साझा करना और कैंसर के खिलाफ लड़ाई में प्रगति में तेजी लाने के लिए साझेदारी बनाना है। 

इस प्रकार की पहल, जो कई संस्थानों के ज्ञान और संसाधनों को एक साथ लाती है, भारत में कैंसर अनुसंधान और उपचार को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है। एनसीआई द्वारा विकसित मॉडल अन्य एम्स और आईएनआई के लिए एक टेम्पलेट के रूप में काम कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा नवाचार को बढ़ाने के लिए अधिक समन्वित, राष्ट्रव्यापी प्रयास संभव हो सकेगा।

कॉन्क्लेव में प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञों के मुख्य भाषण तथा विस्तृत चर्चाएं शामिल थीं, जिनका उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर तथा सिर और गर्दन के कैंसर से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना था। इस अवसर पर एम्स, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, झज्जर के प्रमुख डॉ. आलोक ठक्कर, एम्स के डीन (अकादमिक) डॉ. के.के. वर्मा, एम्स के डीन (अनुसंधान) डॉ. निखिल टंडन, एनसीआई के संकाय सदस्य, देशभर के सभी एम्स, पीजीआई, चंडीगढ़ और जेआईपीएमईआर, पुडुचेरी के चिकित्सा पेशेवर, शोधकर्ता और स्वास्थ्य नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्यमी, अन्वेषक भी उपस्थित थे।

 

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