Sunday, 21 July 2024

 

 

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अमित शाह ने देश में बाढ़ प्रबंधन की समीक्षा के लिए आज नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत का आपदा प्रबंधन “Zero casualty approach” के साथ आगे बढ़ रहा है

Amit Shah, Union Home Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, C.R. Paatil, Nityanand Rai
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नई दिल्ली , 23 Jun 2024

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में बाढ़ प्रबंधन की समुचित तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने देश में बाढ़ की समस्या कम करने के लिए व्यापक और दूरगामी नीति तैयार करने के दीर्घकालिक उपायों की भी समीक्षा की।बैठक के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री ने पिछले साल हुई बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की।

इसके साथ ही सभी एजेंसियों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और उनके नेटवर्क के विस्तार पर भी बैठक के दौरान चर्चा हुई। श्री अमित शाह ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की। साथ ही उन्होंने बाढ़ नियंत्रण के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट इमेजिज़ के विभिन्न एजेसियों द्वारा अधिकतम इस्तेमाल पर भी बल दिया गया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत का आपदा प्रबंधन “Zero casualty approach” के साथ आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्री ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बाढ़ प्रबंधन के लिए NDMA द्वारा जारी एडवाइज़री को समय पर लागू करने की अपील की। उन्होंने मौसम विभाग और केन्द्रीय जल आयोग को निर्देश दिया कि उन्हें वर्षा और बाढ़ चेतावनी में उपयोग होने वाले सभी उपकरणों को हर साल ‘calibrate’ करना चाहिए।

श्री शाह ने सिक्किम और मणिपुर में हाल ही में आई बाढ़ का विस्तृत अध्य्यन कर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि देश के सभी प्रमुख बांधों के फ्लडगेट्स सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग के बाढ़ निरीक्षण केन्द्र आवश्यकता के अनुरूप और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के होने चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जो नदियां बारहमासी नहीं हैं, उनमें मिट्टी का कटाव अधिक होता है और गाद जमना बाढ़ का कारण बन जाता है। उन्होंने निर्देश दिया कि नदियों के जलस्तर के पूर्वानुमान को अपग्रेड कर बाढ़ की समस्या को कम करने के प्रयास हों। श्री शाह ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में जलजमाव से निपटने के लिए सड़क निर्माण के डिज़ाइन में ही प्राकृतिक जलनिकासी को शामिल किया जाना चाहिए।

श्री शाह ने कहा कि उत्तरपूर्व में कम से कम 50 बड़े तालाब बनाकर ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को डाइवर्ट करने की व्यवस्था हो, जिससे बाढ़ से निजात मिले और कृषि, सिंचाई व् पर्यटन विकसित हों। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और पर्यावरण मंत्रालय को आग लगने से पहले ही इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए समुचित एहतियाती कदम उठाए जाने के निर्देश दिए।

गृह मंत्री ने इसके लिए नियमित रूप से फायरलाइन बनाने, सूखे पत्तों को हटाने और स्थानीय निवासियों और वनकर्मियों के साथ समय-समय पर मॉक ड्रिल करने की ज़रूरत पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक ही स्थान पर बार-बार आग लगने की घटनाओं का विश्लेषण करने को भी कहा। गृह मंत्री ने एनडीएमए को जंगल में लगने वाली आग की घटनाओं से निपटने के लिए विस्तृत मैनुअल तैयार करने को भी कहा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बिजली गिरने को लेकर मौसम विभाग की चेतावनियों को SMS, TV, FM रेडियो और अन्य माध्यमों से समय पर जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा विकसित मौसम, वर्षा और बाढ़ चेतावनी संबंधित एप्स को एकीकृत किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिससे इनका लाभ लक्षित आबादी तक पहुंच सके।

श्री शाह ने निर्देश दिया कि चूंकि बाढ़ सहित किसी भी आपदा के समय समुदाय ही सबसे पहला Responder होता है यानि आपदा से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाता है, इसलिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों में तालमेल होना चाहिए तथा इन्हें एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि इनका अधिकतम प्रभाव हो सके।

बैठक के दौरान भारतीय मौसम विभाग (IMD), केन्द्रीय जल आयोग (CWC), NDRF और NDMA ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। सभी संबंधित विभागों ने पिछले साल हुई बाढ़ समीक्षा बैठक में केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने मौजूदा मानसून के लिए की गई अपनी तैयारियों और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में भी जानकारी साझा की।

बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय, केन्द्रीय गृह सचिव, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव, रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष, NDMA के सदस्य और विभागाध्यक्ष, NDRF और IMD के महानिदेशक, NHAI के अध्यक्ष, NRSC और CWC सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Amit Shah chairs a high-level meeting to review the preparedness of flood management in New Delhi today

Under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, India’s Disaster Management is moving forward with a ‘Zero Casualty Approach’

New Delhi 

Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah chaired a high-level meeting to review the preparedness of flood management in New Delhi today. The Union Home Minister also reviewed long-term measures to formulate a comprehensive and far-reaching policy to mitigate the menace of floods in the country.

During the meeting, Union Home Minister also reviewed the action taken on the decisions made in the meeting held last year. Along with this, new technologies being adopted by all the agencies and the expansion of their network for flood management, were also discussed during the meeting.

Amit Shah also reviewed the preparations to deal with Glacial Lake Outburst Flood (GLOF). He also emphasized on optimum use of satellite imagery provided by the Indian Space Research Organization (ISRO) by various agencies for flood and water management.

The Union Home Minister and Minister of Cooperation said that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, India’s Disaster management is moving forward with a ‘Zero Casualty Approach’. Home Minister appealed to all the States and Union Territories to timely implement the advisories issued by NDMA for flood management.

He directed the India Meteorological Department (IMD) and the Central Water Commission (CWC) to complete the process of recalibrating all the equipment used in flood forecast, at the earliest. Shri Shah instructed concerned departments to conduct a detailed study of the recent floods in Sikkim and Manipur and submit a report to the Ministry of Home Affairs (MHA).

He also directed to ensure that floodgates of all the major dams are in good condition. Shri Shah said that the flood monitoring centres of the CWC should be in accordance with our requirements and of international standards.

The Union Home Minister said that the non-perennial rivers are prone to more soil erosion and siltation, resulting in floods. He directed that efforts should be made to upgrade forecast system of water level of rivers for better flood management.

Shri Shah said that natural drainage system should be an integral part of the designs of road construction to deal with inundation of roads, in case of floods. Shri Shah said that at least 50 large ponds in the Northeast should be constructed so that the water of the Brahmaputra River could be diverted and stored in those ponds.

He said that this will help in developing agriculture, irrigation and tourism in those areas at a low cost and also help in tackling the floods, and, it will eventually benefit the local economy. Shri Amit Shah instructed the National Disaster Management Authority (NDMA) and the Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) to take appropriate precautionary measures to prevent incidents of forest fire.

For this, Home Minister stressed the need to regularly create fire lines, remove dry leaves and conduct mock drills from time to time with local residents and forest personnel. Along with this, he also asked to analyse the incidents of repeated forest fires at the same place. Home Minister also asked the NDMA to prepare a detailed manual to deal with incidents of forest fires.

The Union Home Minister directed that the IMD’s alerts regarding lightning strikes should be disseminated to the public on time through SMS, TV, FM radio and other mediums. He emphasized on the need to integrate weather, rainfall and flood warning related apps developed by various departments so that their benefits could reach the targeted population.

Shri Shah directed that since the community is the first responder at the time of any disaster including flood, therefore, there should be coordination and integration in the community awareness programs being run by various agencies so that they can have maximum impact.

During the meeting, IMD, CWC, NDRF and NDMA made detailed presentations. The departments concerned also informed about the action taken on the instructions given by the Union Home Minister during the flood review meeting held last year. They also apprised about their preparedness for the current monsoon season and future action plan.

Union Minister for Jal Shakti, Shri CR Paatil, Minister of State for Home Affairs, Shri Nityanand Rai, Union Home Secretary, Secretaries of Ministries and Departments of River Development and Ganga Rejuvenation, Earth Sciences, Environment, Forest and Climate Change, Road Transport and Highways, Chairperson Railway Board, Members and Heads of Departments of NDMA, Directors General of NDRF and IMD, Chairman NHAI, senior officials from NRSC and  other concerned departments including CWC were present in the meeting.

ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਹੜ੍ਹ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੀ ਸਮੀਖਿਆ ਲਈ ਅੱਜ ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ ਵਿੱਚ ਉੱਚ-ਪੱਧਰੀ ਮੀਟਿੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਕੀਤੀ

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ, ਸ਼੍ਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਜੀ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦਾ ਆਪਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧਨ “Zero casualty approach” ਦੇ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ

ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਅਤੇ ਸਹਿਕਾਰਤਾ ਮੰਤਰੀ, ਸ਼੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਅੱਜ ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ ਵਿੱਚ ਹੜ੍ਹ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੀਆਂ ਸਮੁਚਿਤ ਤਿਆਰੀਆਂ ਦੀ ਸਮੀਖਿਆ ਲਈ ਇੱਕ ਉੱਚ ਪੱਧਰੀ ਮੀਟਿੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਕੀਤੀ। ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਹੜ੍ਹ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਘੱਟ ਕਰਨ ਲਈ ਵਿਆਪਕ ਅਤੇ ਦੂਰਗਾਮੀ ਨੀਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦੇ ਦੀਰਘਕਾਲੀ ਉਪਾਵਾਂ ਦੀ ਵੀ ਸਮੀਖਿਆ ਕੀਤੀ।ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਹੋਈ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਲਏ ਗਏ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ‘ਤੇ ਹੋਈ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਵੀ ਸਮੀਖਿਆ ਕੀਤੀ।

ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਾਰੀਆਂ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਪਣਾਈਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਆਧੁਨਿਕ ਤਕਨੀਕਾਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨੈੱਟਵਰਕ ਦੇ ਵਿਸਤਾਰ ‘ਤੇ ਵੀ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਚਰਚਾ ਹੋਈ। ਸ਼੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਗਲੇਸ਼ੀਅਲ ਲੋਕ ਆਉਟਬਰਸਟ ਫਲੱਡ (GLOF) ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਦੀਆਂ ਤਿਆਰੀਆਂ ਦੀ ਵੀ ਸਮੀਖਿਆ ਕੀਤੀ। ਨਾਲ ਹੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਹੜ੍ਹ ਨਿਯੰਤਰਣ ਲਈ ਭਾਰਤੀ ਪੁਲਾੜ ਖੋਜ ਸੰਗਠਨ (ਇਸਰੋ) ਦੁਆਰਾ ਉਪਲਬਧ ਕਰਵਾਈ ਗਈ ਸੈਟੇਲਾਈਟ ਇਮੇਜਿਜ਼ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਵਧੇਰੇ ਇਸਤੇਮਾਲ ‘ਤੇ ਵੀ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ।

ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਅਤੇ ਸਹਿਕਾਰਤਾ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ, ਸ਼੍ਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਜੀ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦਾ ਆਪਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧਨ  “Zero casualty approach” ਦੇ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਸਾਰੇ ਰਾਜਾਂ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰ ਸ਼ਾਸਿਤ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਹੜ੍ਹ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੇ ਲਈ NDMA ਦੁਆਰਾ ਜਾਰੀ ਐਡਵਾਈਜ਼ਰੀ ਨੂੰ ਸਮੇਂ ‘ਤੇ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰੀ ਜਲ ਕਮਿਸ਼ਨ ਨੂੰ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਰਖਾ ਅਤੇ ਹੜ੍ਹ ਚੇਤਾਵਨੀ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਉਪਕਰਣਾਂ ਨੂੰ ਹਰ ਸਾਲ ‘calibrate’ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸ਼੍ਰੀ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਸਿੱਕਮ ਅਤੇ ਮਣੀਪੁਰ ਵਿੱਚ ਹਾਲ ਹੀ ਵਿੱਚ ਆਏ ਹੜ੍ਹ ਦਾ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਅਧਿਐਨ ਕਰ ਕੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰਾਲੇ ਨੂੰ ਰਿਪੋਰਟ ਦੇਣ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇਹ ਸੁਨਿਸ਼ਚਿਤ ਕਰਨ ਦਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਡੈਮਾਂ ਦੇ ਫਲੱਡਗੇਟਸ ਸੁਚਾਰੂ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਸ਼੍ਰੀ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕੇਂਦਰੀ ਜਲ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੇ ਹੜ੍ਹ ਨਿਰੀਖਣ ਕੇਂਦਰ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਅਤੇ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਪੱਧਰ ਦੇ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ।

ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੋ ਨਦੀਆਂ ਬਾਰਹਮਾਸੀ ਨਹੀਂ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਟੌਤੀ ਅਧਿਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਗਾਰਾ ਜਮ੍ਹਣਾ ਹੜ੍ਹ ਦਾ ਕਾਰਨ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਨਦੀਆਂ ਦੇ ਜਲ ਪੱਧਰ ਦੇ ਪੂਰਵ ਅਨੁਮਾਨ ਨੂੰ ਅਪਗ੍ਰੇਡ ਕਰਕੇ ਹੜ੍ਹ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ ਦੇ ਪ੍ਰਯਾਸ ਹੋਣ। ਸ਼੍ਰੀ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹੜ੍ਹ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਭਰਨ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਸੜਕ ਨਿਰਮਾਣ ਦੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨ ਵਿੱਚ ਹੀ ਕੁਦਰਤੀ ਜਲ ਨਿਕਾਸੀ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

ਸ਼੍ਰੀ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 50 ਵੱਡੇ ਤਾਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਬ੍ਰਹਮਪੁੱਤਰ ਨਦੀ ਦੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਡਾਈਵਰਟ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਹੋਵੇ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਹੜ੍ਹ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਮਿਲੇ ਅਤੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ, ਸਿੰਚਾਈ ਅਤੇ ਟੂਰਿਜ਼ਮ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਣ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਸਥਾਨਕ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਨੂੰ ਵੀ ਫਾਇਦਾ ਮਿਲੇਗਾ। ਸ਼੍ਰੀ ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਆਪਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਅਥਾਰਿਟੀ (NDMA) ਅਤੇ ਵਾਤਾਵਰਣ ਮੰਤਰਾਲੇ ਨੂੰ ਅੱਗ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲੇ ਹੀ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਢੁੱਕਵੇਂ ਸਾਵਧਾਨੀ ਵਾਲੇ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ।

ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਇਸ ਦੇ ਲਈ ਨਿਯਮਿਤ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਫਾਇਰ ਲਾਈਨ ਬਣਾਉਣ, ਸੁੱਕੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੰ ਹਟਾਉਣ ਅਤੇ ਸਥਾਨਕ ਨਿਵਾਸੀਆਂ ਅਤੇ ਜੰਗਲਾਤ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ‘ਤੇ ਮੌਕ ਡ੍ਰਿਲ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ‘ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਹੀ ਸਥਾਨ ‘ਤੇ ਵਾਰ-ਵਾਰ ਅੱਗ ਲਗਾਉਣ ਦੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਦਾ ਵਿਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਕਰਨ ਨੂੰ ਵੀ ਕਿਹਾ। ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਐੱਨਜੀਐੱਮਏ ਨੂੰ ਜੰਗਲ ਵਿੱਚ ਲਗਣ ਵਾਲ ਅੱਗ ਦੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਮੈਨੂਅਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਨੂੰ ਵੀ ਕਿਹਾ।

ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਬਿਜਲੀ ਗਿਰਨ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੀਆਂ ਚੇਤਾਵਨੀਆਂ ਨੂੰ SMS, TV, FM ਰੇਡੀਓ ਅਤੇ ਹੋਰ ਮਾਧਿਅਮਾਂ ਤੋਂ ਸਮੇਂ ‘ਤੇ ਜਨਤਾ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੁਆਰਾ ਵਿਕਸਿਤ ਮੌਸਮ, ਵਰਖਾ ਅਤੇ ਹੜ੍ਹ ਚੇਤਾਵਨੀ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਐਪਸ ਨੂੰ ਏਕੀਕ੍ਰਿਤ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ‘ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ, ਜਿਸ ਨਲਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਲਾਭ ਲਕਸ਼ਿਤ ਆਬਾਦੀ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਸਕੇ।

ਸ਼੍ਰੀ ਸ਼ਾਹ ਨੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਕਿਉਂਕਿ ਹੜ੍ਹ ਸਮੇਤ ਕਿਸੇ ਵੀ ਆਪਦਾ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਮਿਊਨਿਟੀ ਹੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ Responder ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਯਾਨੀ ਆਪਦਾ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਕਦਮ ਉਠਾਉਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਚਲਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਭਾਈਚਾਰਕ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮਾਂ ਵਿੱਚ ਤਾਲਮੇਲ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਏਕੀਕ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਤਾਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਭਾਵ ਹੋ ਸਕੇ।

ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਭਾਰਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ (IMD), ਕੇਂਦਰੀ ਜਲ ਕਮਿਸ਼ਨ (CWC), NDRF ਅਤੇ NDMA ਨੇ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਪੇਸ਼ਕਾਰੀਆਂ ਕੀਤੀਆਂ। ਸਾਰੇ ਸਬੰਧਿਤ ਵਿਭਾਗਾਂ ਨੇ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਹੋਈ ਹੜ੍ਹ ਸਮੀਖਿਆ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਦੁਆਰਾ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ‘ਤੇ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਾਰਵਾਈ ਬਾਰੇ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਮੌਜੂਦਾ ਮਾਨਸੂਨ ਲਈ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਆਪਣੀਆਂ ਤਿਆਰੀਆਂ ਅਤੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀਆਂ ਕਾਰਜ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਬਾਰੇ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ।

ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕੇਂਦਰੀ ਜਲ ਸ਼ਕਤੀ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਸੀ ਆਰ ਪਾਟਿਲ, ਗ੍ਰਹਿ ਰਾਜ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ  ਨਿਤਿਆਨੰਦ ਰਾਏ, ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਸਕੱਤਰ, ਨਦੀ ਵਿਕਾਸ ਅਤ ਗੰਗਾ ਪੁਨਰਜੀਵਨ ਵਿਭਾਗ, ਪ੍ਰਿਥਵੀ ਵਿਭਾਗ, ਵਾਤਾਵਰਣ, ਵਣ ਅਤ ਜਲਵਾਯੂ ਪਰਿਵਰਤਨ, ਸੜਕ ਆਵਾਜਾਈ ਅਤੇ ਰਾਜ ਮਾਰਗ ਮੰਤਰਾਲਿਆਂ ਅਤੇ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੇ ਸਕੱਤਰ, ਰੇਲਵੇ ਬੋਰਡ ਦੇ ਚੇਅਰਪਰਸਨ, NDMA ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਅਤੇ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੇ ਮੁੱਖੀ, NDRF ਅਤੇ IMD ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਜਨਰਲ, NHAI ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ, NRSC ਅਤੇ CWC ਸਮੇਤ ਹੋਰ ਸਬੰਧਿਤ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੇ ਸੀਨੀਅਰ ਅਧਿਕਾਰੀ ਮੌਜੂਦ ਸਨ।

 

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