Friday, 24 May 2024

 

 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरबीआई@90 उद्घाटन समारोह को संबोधित किया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्‍य में स्मारक सिक्का जारी किया

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मुंबई , 01 Apr 2024

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मुंबई (महाराष्ट्र) में भारतीय रिजर्व बैंक के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम आरबीआई@90 के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। श्री मोदी ने भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्‍य में एक स्मारक सिक्का भी जारी किया। भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 अप्रैल, 1935 को अपना परिचालन शुरू किया था और आज यह अपने 90वें वर्ष में प्रवेश कर गया है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने आज अपने अस्तित्व के 90 वर्ष पूरे होने पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरबीआई ने आजादी से पहले और बाद के दोनों ही युग देखे हैं और इसने अपने पेशेवर रूख और प्रतिबद्धता के आधार पर पूरे विश्‍व में अपनी पहचान बनाई है।

प्रधानमंत्री ने आरबीआई के 90 वर्ष पूरे होने पर बैंक के सभी कर्मचारियों को बधाई दी। आरबीआई के वर्तमान कर्मचारियों को भाग्यशाली मानते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज तैयार की गई नीतियां आरबीआई के अगले दशक को आकार प्रदान करेंगी। अगले 10 वर्ष आरबीआई को उसके शताब्दी वर्ष में ले जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "अगला दशक विकसित भारत के संकल्पों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।"

तेज गति से विकास तथा विश्वास और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आरबीआई की प्राथमिकता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बैंक के लक्ष्यों और संकल्पों की पूर्ति के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। देश की जीडीपी और अर्थव्यवस्था में मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों के समन्वय के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में आरबीआई के 80 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्‍य में आयोजित समारोह को याद किया और उस समय देश की बैंकिंग प्रणाली के सामने आई एनपीए और स्थिरता जैसी चुनौतियों और समस्याओं का भी स्‍मरण किया।

उन्होंने कहा कि वहां से शुरू करके आज हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां भारतीय बैंकिंग प्रणाली को विश्‍व की एक मजबूत और टिकाऊ बैंकिंग प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि उस समय की लगभग बहुत कमजोर बैंकिंग प्रणाली अब लाभ में है और रिकॉर्ड क्रेडिट दर्शा रही है। प्रधानमंत्री ने इस बदलाव के लिए नीति, आशयों और निर्णयों की स्पष्टता को श्रेय दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "जहां इरादे ठीक होते हैं, वहां परिणाम भी सही होते हैं।" सुधारों के व्यापक स्‍वरूप पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने मान्यता, समाधान और पुनर्पूंजीकरण की रणनीति पर कार्य किया है। कई शासन-संबंधी सुधारों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सहायता के लिए 3.5 लाख करोड़ का पूंजी सम्मिश्रण किया गया है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि केवल दिवाला और दिवालियापन संहिता ने 3.25 लाख करोड़ रुपये के ऋणों का समाधान किया है। उन्होंने देश को यह भी बताया कि 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के डिफाल्‍ट वाले 27,000 से अधिक आवेदनों को आईबीसी के तहत प्रवेश से पहले ही सुलझा लिया गया है। वर्ष 2018 में बैंकों का सकल एनपीए जो 11.25 प्रतिशत था वह सितंबर 2023 में घटकर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गया। उन्होंने कहा कि दोहरी बैलेंस शीट (तुलन पत्र) की समस्या अब अतीत की समस्या है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बदलाव के लिए आरबीआई के योगदान की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यद्पि आरबीआई से संबंधित चर्चाएं अक्सर वित्तीय परिभाषाओं और जटिल शब्दावली तक ही सीमित होती हैं, लेकिन आरबीआई में किए जाने वाले कार्य सीधे आम नागरिकों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले 10 वर्षों में सरकार के केंद्रीय बैंकों, बैंकिंग प्रणालियों और अंतिम पंक्ति में खड़े लाभार्थियों के बीच जुड़ाव पर प्रकाश डाला और गरीबों के वित्तीय समावेशन का उदाहरण दिया।

उन्होंने यह भी उल्‍लेख किया कि देश के 52 करोड़ जनधन खातों में से 55 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। उन्होंने कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र में वित्तीय समावेशन के प्रभाव का भी उल्लेख किया, जहां 7 करोड़ से अधिक किसानों, मछुआरों और पशु मालिकों की पीएम किसान क्रेडिट कार्ड तक पहुंच है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिला है।

पिछले 10 वर्षों में सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने सहकारी बैंकों के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यूपीआई के माध्यम से हुए 1200 करोड़ से अधिक के मासिक लेनदेन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे यह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त मंच बन गया है। प्रधानमंत्री ने सेंट्रल बैंक डिजिटल मुद्रा पर किए जा रहे कार्यों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों ने एक नई बैंकिंग प्रणाली, अर्थव्यवस्था और मुद्रा अनुभव के सृजन को सक्षम बनाया है।

प्रधानमंत्री ने अगले 10 वर्षों के लक्ष्यों के लिए स्पष्टता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देते हुए कैशलेस अर्थव्यवस्था के बारे में आए परिवर्तनों पर ध्‍यान दिये जाने पर जोर दिया। उन्होंने वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

भारत जैसे बड़े देश की विविध बैंकिंग जरूरतों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने 'ईज़ ऑफ डुईंग बैंकिंग' को बेहतर बनाने और जन-जन की आवश्यकता के अनुरूप सेवाएं प्रदान करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की भूमिका पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने देश के तीव्र और सतत विकास में आरबीआई की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्‍होंने बैंकिंग क्षेत्र में नियम-आधारित अनुशासन और राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण नीतियों के समावेश में आरबीआई की उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए बैंकों को सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया और सक्रिय कदम उठाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों का अग्रिम अनुमान लगाने के लिए भी कहा। प्रधानमंत्री ने आरबीआई को मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का अधिकार देने जैसे मुद्रास्फीति-नियंत्रण उपायों का भी उल्लेख किया और इस संबंध में मौद्रिक नीति समिति के प्रदर्शन की प्रशंसा की।

उन्‍होंने कहा कि सक्रिय मूल्य निगरानी और राजकोषीय समेकन जैसे कदमों ने कोरोना के कठिन समय के दौरान भी मुद्रास्फीति को सामान्‍य स्तर पर बनाए रखा।प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अगर किसी देश की प्राथमिकताएं स्पष्ट हों तो उसे कोई भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान सरकार द्वारा वित्तीय विवेक पर ध्यान देने और आम नागरिकों के जीवन को प्राथमिकता देने का उदाहरण दिया, जिसके कारण गरीब और मध्यम वर्ग कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलकर आज देश के विकास को गति प्रदान कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे समय में नए रिकॉर्ड स्‍थापित कर रही है जब विश्‍व के कई देश अभी भी महामारी के आर्थिक झटके से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भारत की सफलताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने में आरबीआई की भूमिका का उल्‍लेख किया। किसी भी विकासशील देश के लिए मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आरबीआई इसके लिए एक मॉडल बन सकता है और विश्‍व के नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।

इससे पूरे वैश्विक दक्षिण क्षेत्र का भी समर्थन किया जा सकता है।यह देखते हुए कि भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है, प्रधानमंत्री ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में आरबीआई द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का उल्‍लेख किया। उन्होंने देश में नए क्षेत्रों को खोलने के लिए सरकार की नीतियों को श्रेय दिया, जिससे आज के युवाओं के लिए अनेक अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने हरित ऊर्जा क्षेत्रों के विस्तार का उदाहरण दिया और सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और इथेनॉल सम्मिश्रण का उल्लेख किया।

उन्होंने स्वदेशी 5जी तकनीक और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते हुए निर्यात का भी उल्‍लेख किया। एमएसएमई के भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ बनने के बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने एमएसएमई को समर्थन देने के लिए कोविड महामारी के दौरान क्रेडिट गारंटी योजना के कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला। उन्होंने नए क्षेत्रों से जुड़े युवाओं के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई को पुरानी नीतियों से हटकर नई नीतियां लाने पर जोर दिया।

21वीं सदी में नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी टीमों के साथ अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और कार्य के लिए कर्मियों की पहचान के संबंध में आने वाले प्रस्तावों के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने बैंकरों और नियामकों से अंतरिक्ष और पर्यटन जैसे नए और पारंपरिक क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। उन्होंने विशेषज्ञों की राय का उल्‍लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में अयोध्या विश्‍व का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों को श्रेय देते हुए कहा कि इनसे छोटे व्यवसायों और रेहड़ी-पटरी वालों की वित्तीय क्षमता में पारदर्शिता आई है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि इस जानकारी का उपयोग उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अगले 10 वर्षों में भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने पर भी जोर दिया ताकि वैश्विक मुद्दों के प्रभाव को कम किया जा सके। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वैश्विक विकास का इंजन बन गया है। उन्होंने पूरे विश्‍व में रुपये को अधिक सुलभ और स्वीकार्य बनाने के प्रयासों पर जोर दिया।

उन्होंने अत्याधिक आर्थिक विस्तार और बढ़ते हुए कर्ज की प्रवृत्तियों पर भी बात की और यह बताया कि अनेक देशों के निजी क्षेत्र के कर्ज ने उनकी जीडीपी को दोगुना कर दिया है। उन्होंने कहा कि कई देशों का कर्ज का स्तर विश्‍वमें नकारात्मक प्रभाव पैदा रहा है। प्रधानमंत्री ने आरबीआई को भारत की विकास क्षमताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बारे में एक अध्ययन करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्‍त पोषण के लिए एक मजबूत बैंकिंग उद्योग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने एआई और ब्लॉकचेन जैसी प्रौद्योगिकियों द्वारा लाए गए परिवर्तनों के साथ-साथ बढ़ती डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में साइबर सुरक्षा के महत्व पर ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने दर्शकों से फिन-टेक नवाचार के आलोक में बैंकिंग प्रणाली की संरचना में आवश्यक परिवर्तनों के बारे में विचार करने के लिए कहा क्योंकि आगे नए वित्तपोषण, संचालन और व्यवसाय मॉडल की आवश्यकता होगी।

प्रधानमंत्री ने यह निष्कर्ष निकाला कि वैश्विक चैंपियंस से लेकर रेहड़ी-पटरी वालों, अत्याधुनिक क्षेत्रों से लेकर पारंपरिक क्षेत्रों तक की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करना विकसित भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि आरबीआई विकसित भारत के बैंकिंग दृष्टिकोण की समग्र सराहना के लिए एक उपयुक्त निकाय है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री रमेश बैंस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फड़नवीस और श्री अजीत पवार एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री श्री भागवत किशनराव कराड और श्री पंकज चौधरी तथा आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

Prime Minister Narendra Modi addresses RBI@90 opening ceremony

Releases commemorative coin to mark 90 years of RBI

Mumbai

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressed the opening ceremony of RBI@90, a program marking 90 years of the Reserve Bank of India, in Mumbai, Maharashtra today. Shri Modi also released a commemorative coin to mark 90 years of RBI. The Reserve Bank of India (RBI) commenced its operations on the 1st of April in 1935 and enters its 90th year today.

Addressing the occasion, the Prime Minister said that the Reserve Bank of India has reached a historic landmark today completing 90 years of existence. He underlined that the RBI has witnessed both the pre and post-independence eras and it has created an identity around the world based on its professionalism and commitment.

The Prime Minister congratulated all staff on the completion of 90 years of the RBI. Deeming the present RBI staff as fortunate, the Prime Minister said that the policies drafted today will shape the next decade of RBI and noted that the next 10 years will take RBI to its centenary year.

The next decade is extremely important for the resolutions of a Viksit Bharat”, PM Modi said, highlighting the RBI’s priority towards fast-paced growth and focus on trust and stability. The Prime Minister also conveyed his best wishes for the fulfilment of its goals and resolutions.

Emphasizing the importance of coordination of monetary and fiscal policies in the GDP and the economy of the country, the Prime Minister recalled the 80-year celebration of RBI in 2014 and remembered the challenges and problems like NPA and stability faced by the banking system of the country at that time.

He said that starting from there, today we have reached a point where the Indian banking system is being seen as a strong and sustainable banking system of the world as the near moribund banking system of that time is now in profit and showing record credit.

The Prime Minister credited clarity of policy, intentions and decisions for this transformation. “Where intentions are right, results too are correct”, said the Prime Minister. Speaking on the comprehensive nature of reforms, the Prime Minister stated that the government worked on the strategy of recognition, resolution and recapitalization.

A capital infusion of 3.5 lakh crore was undertaken for the helping public sector banks along with many governance-related reforms. Just the Insolvency and Bankruptcy Code has resolved loans amounting to 3.25 lakh rupees, the Prime Minister pointed out.

He also informed the country that more than 27,000 applications involving underlying defaults of more than Rs 9 lakh crore were resolved even before admission under IBC. Gross NPAs of banks that stood at 11.25 percent in 2018 came down to below 3 percent by September 2023. He said that the problem of twin balance sheets is a problem of the past. PM Modi complimented RBI for their contribution to this transformation.

Prime Minister Modi pointed out that even though the discussions related to the RBI are often limited to financial definitions and complex terminologies, the work carried out at RBI directly makes an impact on the lives of common citizens.

In the last 10 years, the Prime Minister said that the government has highlighted the connect between the central banks, banking systems and beneficiaries at the last queue and gave the example of financial inclusion of the poor. He mentioned that 55 percent of the 52 crore Jan Dhan accounts in the country belong to women.

He also mentioned the impact of financial inclusion in the agriculture and fisheries sector where more than 7 crore farmers, fishermen and cattle owners have access to PM Kisan Credit Cards providing a significant push to the rural economy.

Referring to the boost for the cooperative sector in the past 10 years, the Prime Minister threw light on the importance of regulations of the Reserve Bank of India regarding cooperative banks. He also mentioned more than 1200 crore monthly transactions via UPI making it a globally recognized platform.

The Prime Minister also touched upon the work being done on Central Bank Digital Currency and said that the transformations of the past 10 years have enabled the creation of a new banking system, economy and currency experience.

The Prime Minister emphasized the importance of clarity for the targets of the next 10 years. He pointed out the importance of keeping an eye on the changes brought about by the cashless economy while promoting digital transactions. He also stressed the need for deepening financial inclusion and empowerment processes.

Stressing the diverse banking needs of a large country like India, the Prime Minister underlined the need to improve ‘ease of doing banking’ and provide tailor-made services as per the needs of the citizens. He underscored the role of artificial intelligence and machine learning.

He highlighted the role of RBI in speedy and sustainable growth of the country. Noting the achievement of RBI in infusing rule-based discipline and fiscally prudent policies in the banking sector, the Prime Minister also asked for advance estimation of the needs of various sectors to take proactive steps while assuring the banks of government’s support.

The Prime Minister also mentioned inflation-controlling measures like giving the right of inflation targeting to the RBI and praised the performance of the Monetary Policy Committee in this regard. Steps like active price monitoring and fiscal consolidation kept inflation at a moderate level even during difficult times of Corona.

“Nobody can stop a country from progressing if its priorities are clear”, the Prime Minister emphasized. He gave the example of the government giving heed to financial prudence and prioritizing the lives of common citizens during the covid pandemic which led to the poor and middle class emerging out of the adversity and giving momentum to the country’s growth today.

The Indian economy is creating new records at a time when many countries in the world are still trying to recover from the economic shock of the pandemic”, the Prime Minister said. He underlined the role of RBI in taking India’s successes to the global level.

Highlighting the importance of creating a balance between inflation control and growth for any developing country, PM Modi expressed confidence that RBI can become a model for this and play a leadership role in the world, thereby supporting the entire global south region.

Noting that India is the most youthful nation in the world today, the Prime Minister touched upon RBI playing a critical role in fulfilling the aspirations of the youth. He credited the policies of the government in the opening up of new sectors in the country thereby creating numerous opportunities for the youth of today.

He gave the example of the expansion of the green energy sectors and mentioned solar energy, green hydrogen and ethanol blending. He also touched upon indigenously made 5G technology and rising exports in the defence sector.

Speaking about MSMEs becoming a backbone of India’s manufacturing sector, the Prime Minister highlighted the implementation of the Credit Guarantee Scheme during the covid pandemic to support MSMEs. He stressed the RBI come up with out-of-the-box policies to ensure credit availability for the youth associated with the new sectors.

Stressing the importance of innovation in the 21st century, the Prime Minister asked to be prepared for the proposals that will come with regard to cutting-edge technologies with teams and identification of personnel for the task.

He asked the bankers and regulators to be ready for the needs of new and traditional sectors like space and tourism.  He mentioned the expert view that in the coming years, Ayodhya is going to become the biggest religious tourism center in the world.

The Prime Minister credited the work done by the government for financial inclusion and digital payments which has created transparency in the financial capacity of small businesses and street vendors. “This information must be used to financially empower them”, PM Modi stressed.

PM Modi also stressed increasing the economic self-reliance of India in the next 10 years so that the impact of global issues is mitigated. “Today, India is becoming the engine of global growth with 15 percent share in global GDP growth”, Shri Modi remarked.

He emphasized the efforts to make Rupee more accessible and acceptable throughout the world. He also touched upon the rising trends of excessive economic expansion and increasing debt and pointed out the private sector debt of many countries has doubled their GDP. Debt levels of many countries are also creating a negative impact on the world, he said.

The Prime Minister suggested RBI conduct a study on this keeping in mind the prospects and potential of India's growth. PM Modi underlined the importance of a strong Banking industry for providing required funding to the projects of the nation.

He noted the changes brought about by technologies like AI and BlockChain and noted the importance of cyber security in the growing digital banking system. He asked the audience to think about the required changes in the structure of the banking system in light of fin-tech innovation as new financing, operating and business models will be needed.

“Meeting the credit needs of global champions to street vendors, of the cutting edge sectors to traditional ones is critical for Viksit Bharat and RBI is the appropriate body for the holistic appreciation of the banking vision of Viksit Bharat”, the Prime Minister concluded.

Governor of Maharashtra, Shri Ramesh Bains, Chief Minister of Maharashtra, Shri Eknath Shinde, Deputy Chief Ministers Shri Devendra Fadanvis and Shri Ajit Pawar, Union Finance Minister Smt Nirmala Sitharaman, Ministers of State for Finance Shri Bhagwat Kishanrao Karad and Shri Pankaj Chaudhary, and RBI Governor Shaktikanta Das were present on the occasion.

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ  ਨੇ ਆਰਬੀਆਈ@90 ਦੇ ਉਦਘਾਟਨੀ ਸਮਾਰੋਹ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕੀਤਾ

ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਦੇ 90 ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਹੋਣ 'ਤੇ ਯਾਦਗਾਰੀ ਸਿੱਕਾ ਜਾਰੀ ਕੀਤਾ

ਮੁੰਬਈ

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਨੇ ਅੱਜ ਮੁੰਬਈ, ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ ਦੇ 90 ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਹੋਣ ਸਬੰਧੀ ਇੱਕ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ, ਆਰਬੀਆਈ@90 (RBI@90) ਦੇ ਉਦਘਾਟਨ ਸਮਾਰੋਹ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕੀਤਾ। ਸ਼੍ਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਦੇ 90 ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਹੋਣ 'ਤੇ ਇੱਕ ਯਾਦਗਾਰੀ ਸਿੱਕਾ ਵੀ ਜਾਰੀ ਕੀਤਾ। ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਨੇ 1 ਅਪ੍ਰੈਲ 1935 ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਸੰਚਾਲਨ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਸੀ ਅਤੇ ਅੱਜ ਆਪਣੇ 90ਵੇਂ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ।

ਇਸ ਮੌਕੇ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ ਅੱਜ ਆਪਣੀ ਹੋਂਦ ਦੇ 90 ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਕਰਕੇ ਇੱਕ ਇਤਿਹਾਸਕ ਮੀਲ ਪੱਥਰ 'ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਗਿਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਰੇਖਾਂਕਿਤ ਕੀਤਾ ਕਿ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਨੇ ਅਜ਼ਾਦੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਦੇ ਦੋਵੇਂ ਯੁੱਗਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੇ ਆਪਣੀ ਪੇਸ਼ੇਵਰਤਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤੀਬੱਧਤਾ ਦੇ ਅਧਾਰ 'ਤੇ ਦੁਨੀਆ ਭਰ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਪਹਿਚਾਣ ਬਣਾਈ ਹੈ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਦੇ 90 ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਹੋਣ 'ਤੇ ਸਾਰੇ ਸਟਾਫ ਨੂੰ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ। ਮੌਜੂਦਾ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਸਟਾਫ਼ ਨੂੰ ਸੁਭਾਗਾ ਮੰਨਦਿਆਂ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੱਜ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਨੀਤੀਆਂ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਦੇ ਅਗਲੇ ਦਹਾਕੇ ਨੂੰ ਰੂਪ ਦੇਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਕਿ ਅਗਲੇ 10 ਸਾਲ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਸ਼ਤਾਬਦੀ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਲੈ ਜਾਣਗੀਆਂ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਤੇਜ਼ ਰਫ਼ਤਾਰ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਅਤੇ ਸਥਿਰਤਾ 'ਤੇ ਧਿਆਨ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਆਰਬੀਆਈ ਦੀ ਤਰਜੀਹ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ, "ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਸੰਕਲਪਾਂ ਲਈ ਅਗਲਾ ਦਹਾਕਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ"। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਇਸ ਦੇ ਲਕਸ਼ਾਂ ਅਤੇ ਸੰਕਲਪਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਆਪਣੀਆਂ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਵੀ ਦਿੱਤੀਆਂ।

ਜੀਡੀਪੀ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਮੁਦਰਾ ਅਤੇ ਵਿੱਤੀ ਨੀਤੀਆਂ ਦੇ ਤਾਲਮੇਲ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ 2014 ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ)  ਦੇ 80 ਸਾਲਾ ਜਸ਼ਨ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਨੂੰ ਦਰਪੇਸ਼ ਐੱਨਪੀਏ ਅਤੇ ਸਥਿਰਤਾ ਜਿਹੀਆਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਅਤੇ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕੀਤਾ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉੱਥੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਕੇ ਅੱਜ ਅਸੀਂ ਉਸ ਮੁਕਾਮ 'ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਗਏ ਹਾਂ ਜਿੱਥੇ ਭਾਰਤੀ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵ ਦੀ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਜੋਂ ਦੇਖਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਸ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਮਜ਼ੋਰ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਹੁਣ ਮੁਨਾਫ਼ੇ ਵਿੱਚ ਹੈ ਅਤੇ ਰਿਕਾਰਡ ਕ੍ਰੈਡਿਟ ਦਿਖਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਇਸ ਤਬਦੀਲੀ ਲਈ ਨੀਤੀ, ਇਰਾਦਿਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ੈਸਲਿਆਂ ਦੀ ਸਪਸ਼ਟਤਾ ਨੂੰ ਸਿਹਰਾ ਦਿੱਤਾ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ, "ਜਿੱਥੇ ਇਰਾਦੇ ਸਹੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਨਤੀਜੇ ਵੀ ਸਹੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।" ਸੁਧਾਰਾਂ ਦੀ ਵਿਆਪਕ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ 'ਤੇ ਬੋਲਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਮਾਨਤਾ, ਸੰਕਲਪ ਅਤੇ ਪੁਨਰ-ਪੂੰਜੀਕਰਨ ਦੀ ਰਣਨੀਤੀ 'ਤੇ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਸਰਕਾਰੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਬੈਂਕਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਕਰਨ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਕਈ ਸੁਧਾਰਾਂ ਲਈ 3.5 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਦੀ ਪੂੰਜੀ ਨਿਵੇਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਚਿੰਨ੍ਹਿਤ ਕੀਤਾ ਕਿ ਸਿਰਫ਼ ਇਨਸੌਲਵੈਂਸੀ ਅਤੇ ਬੈਂਕਰਪਸੀ ਕੋਡ ਨੇ 3.25 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੇ ਕਰਜ਼ਿਆਂ ਦਾ ਨਿਪਟਾਰਾ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੱਸਿਆ ਕਿ 9 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਤੋਂ ਵੱਧ ਦੇ ਅੰਡਰਲਾਇੰਗ ਡਿਫਾਲਟਸ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ 27,000 ਤੋਂ ਵੱਧ ਅਰਜ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਆਈਬੀਸੀ ਅਧੀਨ ਦਾਖਲੇ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਹੱਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ।

ਬੈਂਕਾਂ ਦਾ ਕੁੱਲ ਐੱਨਪੀਏ ਜੋ 2018 ਵਿੱਚ 11.25 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਸੀ, ਸਤੰਬਰ 2023 ਤੱਕ ਘਟ ਕੇ 3 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੋਂ ਹੇਠਾਂ ਆ ਗਿਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੋਹਰੀਆਂ ਬੈਲੰਸ ਸ਼ੀਟਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਪਿਛਲੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਇਸ ਤਬਦੀਲੀ ਵਿੱਚ ਯੋਗਦਾਨ ਲਈ ਆਰਬੀਆਈ ਦੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕੀਤੀ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਰੇਖਾਂਕਿਤ ਕੀਤਾ ਕਿ ਭਾਵੇਂ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰੇ ਅਕਸਰ ਵਿੱਤੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਅਤੇ ਗੁੰਝਲਦਾਰ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਤੱਕ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਆਰਬੀਆਈ ਵਿੱਚ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕੰਮ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਆਮ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ 'ਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿਛਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ 'ਚ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਕੇਂਦਰੀ ਬੈਂਕਾਂ, ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਲਾਭਾਰਥੀਆਂ ਦੇ ਦਰਮਿਆਨ ਆਖਰੀ ਕਤਾਰ ਤੱਕ ਸੰਪਰਕ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕੀਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਗ਼ਰੀਬਾਂ ਦੇ ਵਿੱਤੀ ਸਮਾਵੇਸ਼ ਦੀ ਉਦਾਹਰਣ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਦੇ 52 ਕਰੋੜ ਜਨ-ਧਨ ਖਾਤਿਆਂ 'ਚੋਂ 55 ਫੀਸਦੀ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੇ ਖਾਤੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਤੇ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਵਿੱਤੀ ਸਮਾਵੇਸ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵਾਂ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਜਿੱਥੇ 7 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕਿਸਾਨਾਂ, ਮਛੇਰਿਆਂ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਮਾਲਕਾਂ ਕੋਲ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਕਿਸਾਨ ਕ੍ਰੈਡਿਟ ਕਾਰਡਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਹੈ, ਜੋ ਗ੍ਰਾਮੀਣ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਨੂੰ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੁਲਾਰਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ।

ਪਿਛਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਸਹਿਕਾਰੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਹੁਲਾਰਾ ਦੇਣ ਦਾ ਜ਼ਿਕਰ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਸਹਿਕਾਰੀ ਬੈਂਕਾਂ ਬਾਰੇ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ 'ਤੇ ਰੋਸ਼ਨੀ ਪਾਈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਯੂਪੀਆਈ ਦੇ ਜ਼ਰੀਏ 1200 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਹੀਨਾਵਾਰ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਸ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਮਾਨਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਪਲੈਟਫਾਰਮ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਸੈਂਟਰਲ ਬੈਂਕ ਡਿਜੀਟਲ ਕਰੰਸੀ 'ਤੇ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਕੰਮ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿਛਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ ਦੇ ਬਦਲਾਅ ਨੇ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ, ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਅਤੇ ਮੁਦਰਾ ਅਨੁਭਵ ਦੀ ਸਿਰਜਣਾ ਨੂੰ ਸਮਰੱਥ ਬਣਾਇਆ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅਗਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ ਦੇ ਟੀਚਿਆਂ ਲਈ ਸਪੱਸ਼ਟਤਾ ਦੇ ਮਹੱਤਵ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਡਿਜੀਟਲ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਨਕਦੀ ਰਹਿਤ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਨਾਲ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਬਦਲਾਅ 'ਤੇ ਨਜ਼ਰ ਰੱਖਣ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਵੱਲ ਇਸ਼ਾਰਾ ਕੀਤਾ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਤੀ ਸਮਾਵੇਸ਼ ਅਤੇ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਣ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਡੂੰਘਾ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ 'ਤੇ ਵੀ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ। ਭਾਰਤ ਜਿਹੇ ਵੱਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਵਿਭਿੰਨ ਬੈਂਕਿੰਗ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ 'ਬੈਂਕਿੰਗ ਕਰਨ ਦੀ ਸੌਖ' ਨੂੰ ਬਿਹਤਰ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਅਨੁਕੂਲਿਤ ਸੇਵਾਵਾਂ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਆਰਟੀਫਿਸ਼ਲ ਇੰਟੈਲੀਜੈਂਸ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨ ਲਰਨਿੰਗ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨੂੰ ਰੇਖਾਂਕਿਤ ਕੀਤਾ।ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਤੇਜ਼ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਵਿਕਾਸ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕੀਤਾ।

ਬੈਂਕਿੰਗ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਨਿਯਮ-ਅਧਾਰਿਤ ਅਨੁਸ਼ਾਸਨ ਅਤੇ ਵਿੱਤੀ ਤੌਰ 'ਤੇ ਵਿਵੇਕਸ਼ੀਲ ਨੀਤੀਆਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਆਰਬੀਆਈ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਨੂੰ ਨੋਟ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮਰਥਨ ਦਾ ਭਰੋਸਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਰਿਆਸ਼ੀਲ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਖੇਤਰਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦਾ ਅਗਾਊਂ ਅਨੁਮਾਨ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਵੀ ਕਿਹਾ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਮਹਿੰਗਾਈ ਨੂੰ ਕੰਟਰੋਲ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਉਪਾਵਾਂ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਮਹਿੰਗਾਈ ਦੇ ਲਕਸ਼ ਦਾ ਅਧਿਕਾਰ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਨੂੰ ਦੇਣ ਅਤੇ ਇਸ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ ਮੁਦਰਾ ਨੀਤੀ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਕਾਰਗੁਜ਼ਾਰੀ ਦੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕੀਤੀ।

ਸਰਗਰਮ ਮੁੱਲ ਨਿਗਰਾਨੀ ਅਤੇ ਵਿੱਤੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਜਿਹੇ ਕਦਮਾਂ ਨੇ ਕੋਰੋਨਾ ਦੇ ਔਖੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਵੀ ਮਹਿੰਗਾਈ ਨੂੰ ਮੱਧਮ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਰੱਖਿਆ।ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਕੇ ਕਿਹਾ, “ਜੇਕਰ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕਤਾਵਾਂ ਸਪਸ਼ਟ ਹੋਣ ਤਾਂ ਕਿਸੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਤਰੱਕੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਰੋਕ ਸਕਦਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕੋਵਿਡ ਮਹਾਮਾਰੀ ਦੌਰਾਨ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਵਿੱਤੀ ਸੂਝ-ਬੂਝ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇਣ ਅਤੇ ਆਮ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦੇਣ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿੱਤੀ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਗ਼ਰੀਬ ਅਤੇ ਮੱਧ ਵਰਗ ਮੁਸੀਬਤਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਕੇ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਗਤੀ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਭਾਰਤੀ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਅਜਿਹੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਨਵੇਂ ਰਿਕਾਰਡ ਬਣਾ ਰਹੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਵਿਸ਼ਵ ਦੇ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਅਜੇ ਵੀ ਮਹਾਮਾਰੀ ਦੇ ਆਰਥਿਕ ਝਟਕੇ ਤੋਂ ਉਭਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ”। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਸਫਲਤਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਲਿਜਾਣ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨੂੰ ਰੇਖਾਂਕਿਤ ਕੀਤਾ। ਕਿਸੇ ਵੀ ਵਿਕਾਸਸ਼ੀਲ ਦੇਸ਼ ਲਈ ਮਹਿੰਗਾਈ ਨਿਯੰਤਰਣ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਸੰਤੁਲਨ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਮਹੱਤਵ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਭਰੋਸਾ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ ਕਿ ਆਰਬੀਆਈ ਇਸ ਲਈ ਇੱਕ ਮਾਡਲ ਬਣ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਵ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਅਗਵਾਈ ਵਾਲੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੂਰੇ ਵਿਸ਼ਵ ਦੱਖਣੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਸਮਰਥਨ ਮਿਲੇਗਾ।

ਇਹ ਨੋਟ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿ ਭਾਰਤ ਅੱਜ ਵਿਸ਼ਵ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਯੁਵਾ ਦੇਸ਼ ਹੈ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀਆਂ ਅਕਾਂਖਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣ ਵਾਲੇ ਆਰਬੀਆਈ ਦਾ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਨਵੇਂ ਸੈਕਟਰ ਖੋਲ੍ਹਣ ਦਾ ਸਿਹਰਾ ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਨੀਤੀਆਂ ਨੂੰ ਦਿੱਤਾ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਅੱਜ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਮੌਕੇ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਹਰਿਤ ਊਰਜਾ ਖੇਤਰਾਂ ਦੇ ਵਿਸਤਾਰ ਦੀ ਉਦਾਹਰਣ ਦਿੱਤੀ ਅਤੇ ਸੌਰ ਊਰਜਾ, ਗ੍ਰੀਨ ਹਾਇਡ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਈਥਾਨੌਲ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦਾ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸਵਦੇਸ਼ੀ ਤੌਰ 'ਤੇ ਬਣਾਈ 5ਜੀ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਅਤੇ ਰੱਖਿਆ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਵਧਦੀ ਬਰਾਮਦ 'ਨੂੰ ਵੀ ਛੋਹਿਆ। ਐੱਮਐੱਸਐੱਮਈਜ਼ ਦੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਖੇਤਰ ਦੀ ਰੀੜ੍ਹ ਦੀ ਹੱਡੀ ਬਣਨ ਬਾਰੇ ਬੋਲਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਐੱਮਐੱਸਐੱਮਈਜ਼ ਨੂੰ ਸਮਰਥਨ ਦੇਣ ਲਈ ਕੋਵਿਡ ਮਹਾਮਾਰੀ ਦੌਰਾਨ ਕ੍ਰੈਡਿਟ ਗਰੰਟੀ ਸਕੀਮ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਆਰਬੀਆਈ ਨਵੇਂ ਸੈਕਟਰਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਕਰਜ਼ੇ ਦੀ ਉਪਲਬਧਤਾ ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਿਲੱਖਣ ਨੀਤੀਆਂ ਲੈ ਕੇ ਆਵੇ।

21ਵੀਂ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਨਵੀਨਤਾ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤਜਵੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਤਿਆਰ ਰਹਿਣ ਲਈ ਕਿਹਾ, ਜੋ ਟੀਮਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਅਤਿ-ਆਧੁਨਿਕ ਤਕਨੀਕਾਂ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਲਈ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਦੀ ਪਹਿਚਾਣ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ ਆਉਣਗੀਆਂ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਬੈਂਕਰਾਂ ਅਤੇ ਰੈਗੂਲੇਟਰਾਂ ਨੂੰ ਪੁਲਾੜ ਅਤੇ ਟੂਰਿਜ਼ਮ ਜਿਹੇ ਨਵੇਂ ਅਤੇ ਰਵਾਇਤੀ ਖੇਤਰਾਂ ਦੀਆਂ ਲੋੜਾਂ ਲਈ ਤਿਆਰ ਰਹਿਣ ਲਈ ਕਿਹਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਮਾਹਿਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਾਰ ਦਾ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਕਿ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅਯੁੱਧਿਆ ਦੁਨੀਆ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਧਾਰਮਿਕ ਟੂਰਿਜ਼ਮ ਕੇਂਦਰ ਬਣਨ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਵਿੱਤੀ ਸਮਾਵੇਸ਼ਨ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਭੁਗਤਾਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਸਿਹਰਾ ਦਿੱਤਾ ਜਿਸ ਨਾਲ ਛੋਟੇ ਕਾਰੋਬਾਰਾਂ ਅਤੇ ਰੇਹੜੀ ਪਟੜੀ ਵਾਲਿਆਂ ਦੀ ਵਿੱਤੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵਿੱਚ ਪਾਰਦਰਸ਼ਤਾ ਆਈ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਕੇ ਕਿਹਾ, "ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਤੌਰ 'ਤੇ ਸਮਰੱਥ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਅਗਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੀ ਆਰਥਿਕ ਆਤਮਨਿਰਭਰਤਾ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ 'ਤੇ ਵੀ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ ਤਾਂ ਜੋ ਵਿਸ਼ਵ ਮੁੱਦਿਆਂ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ। ਸ਼੍ਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਟਿੱਪਣੀ ਕੀਤੀ, “ਅੱਜ, ਭਾਰਤ ਗਲੋਬਲ ਜੀਡੀਪੀ ਵਿਕਾਸ ਵਿੱਚ 15 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹਿੱਸੇਦਾਰੀ ਨਾਲ ਆਲਮੀ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਇੰਜਣ ਬਣ ਰਿਹਾ ਹੈ”। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਰੁਪਏ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵ ਭਰ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰੇ ਪਹੁੰਚਯੋਗ ਅਤੇ ਸਵੀਕਾਰਯੋਗ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਯਤਨਾਂ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਆਰਥਿਕ ਪਸਾਰ ਅਤੇ ਵੱਧ ਰਹੇ ਕਰਜ਼ੇ ਦੇ ਵਧਦੇ ਰੁਝਾਨਾਂ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਨਿੱਜੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਕਰਜ਼ੇ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਜੀਡੀਪੀ ਨੂੰ ਦੁੱਗਣਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਈ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਕਰਜ਼ੇ ਦਾ ਪੱਧਰ ਵੀ ਦੁਨੀਆ 'ਤੇ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੀਆਂ ਸੰਭਾਵਨਾਵਾਂ ਅਤੇ ਸਮਰੱਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਇੱਕ ਅਧਿਐਨ ਕਰਨ ਦਾ ਸੁਝਾਅ ਦਿੱਤਾ।

ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਨੇ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟਾਂ ਨੂੰ ਲੋੜੀਂਦੇ ਫੰਡ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਬੈਂਕਿੰਗ ਉਦਯੋਗ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਨੂੰ ਰੇਖਾਂਕਿਤ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਏਆਈ ਅਤੇ ਬਲਾਕ ਚੇਨ (BlockChain) ਜਿਹੀਆਂ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀਆਂ ਨਾਲ ਲਿਆਂਦੀਆਂ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਨੂੰ ਨੋਟ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਵਧ ਰਹੀ ਡਿਜੀਟਲ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿੱਚ ਸਾਇਬਰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਨੂੰ ਨੋਟ ਕੀਤਾ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਹਾਜ਼ਰੀਨ ਨੂੰ ਫਿਨਟੈੱਕ ਇਨੋਵੇਸ਼ਨ ਦੀ ਰੋਸ਼ਨੀ ਵਿੱਚ ਬੈਂਕਿੰਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੇ ਢਾਂਚੇ ਵਿੱਚ ਲੋੜੀਂਦੀਆਂ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਬਾਰੇ ਸੋਚਣ ਲਈ ਕਿਹਾ ਕਿਉਂਕਿ ਨਵੇਂ ਵਿੱਤ, ਸੰਚਾਲਨ ਅਤੇ ਵਪਾਰਕ ਮਾਡਲਾਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇਗੀ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ, “ਗਲੋਬਲ ਚੈਂਪੀਅਨਜ਼ ਤੋਂ ਸਟ੍ਰੀਟ ਵਿਕਰੇਤਾਵਾਂ, ਆਧੁਨਿਕ ਖੇਤਰਾਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਰਵਾਇਤੀ ਖੇਤਰਾਂ ਲਈ ਕ੍ਰੈਡਿਟ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨਾ ਵਿਕਸ਼ਿਤ ਭਾਰਤ ਲਈ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ ਅਤੇ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਬੈਂਕਿੰਗ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਦੀ ਸਰਬਪੱਖੀ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾ ਲਈ ਢੁਕਵੀਂ ਸੰਸਥਾ ਹੈ।”

ਇਸ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਰਾਜਪਾਲ ਸ਼੍ਰੀ ਰਮੇਸ਼ ਬੈਂਸ, ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਏਕਨਾਥ ਸ਼ਿੰਦੇ, ਉਪ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਦੇਵੇਂਦਰ ਫੜਨਵੀਸ ਅਤੇ ਸ਼੍ਰੀ ਅਜੀਤ ਪਵਾਰ, ਕੇਂਦਰੀ ਵਿੱਤ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਨਿਰਮਲਾ ਸੀਤਾਰਮਣ, ਵਿੱਤ ਰਾਜ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਭਗਵਤ ਕਿਸ਼ਨ ਰਾਓ ਕਰਾਡ ਅਤੇ ਸ਼੍ਰੀ ਪੰਕਜ ਚੌਧਰੀ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਰਿਜ਼ਰਵ ਬੈਂਕ (ਆਰਬੀਆਈ) ਦੇ ਗਵਰਨਰ ਸ਼ਕਤੀਕਾਂਤ ਦਾਸ ਮੌਜੂਦ ਸਨ।

 

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