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सरदार सरदार वल्लभभाई पटेल के विचार व चिंतन आज अधिक प्रासंगिक : राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर

सरदार वल्लभभाई पटेल की भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण में भूमिका विषय पर मंडी में राष्ट्र संगोष्ठी आयोजित

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5 Dariya News

मंडी , 31 Oct 2022

Last updated on: Oct 31, 2022, 00:00 IST

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों, विचारों और चिंतन को देशहित में पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।राज्यपाल आज मंडी स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल की भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण में भूमिका’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

श्री आर्लेकर ने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सरदार पटेल के जीवन व्यक्तित्व,  विचारों एवं कार्यों को स्मरण करने की आवश्यकता है। देश को आजादी दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वे जीवन भर देशहित में संघर्ष करते रहे। उनका जीवन राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा।

राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया जिसके लिए उन्होंने अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना भी किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता की इस भावना को आगे ले जाने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि भारत जमीन का एक टुकड़ा मात्र नहीं है। राष्ट्रीयता की भावना हमारी संस्कृति व परंपरा से जुड़ी है, जिसे हमने कभी नहीं खोया। सरदार पटेल ने इस एकता को बनाए रखने का कार्य किया। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है तथा उनके विचारों को आगे ले जाने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को सरदार पटेल विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। इसलिए विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह सरदार पटेल के विचारों, चिंतन और संदेश को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान इन विचारों को अंगीकार कर विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के दौरान पढ़े जाने वाले 25 शोध पत्र निश्चित रूप से इस भाव को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। 

उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय का यह ठोस प्रयास इसे आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करेगा।उन्होंने इस अवसर पर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।राज्यपाल ने इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘सरदार वल्लभभाई पटेल जीवन दर्शन व राष्ट्र निर्माण में भूमिका’, आचार्य ओम प्रकाश शर्मा की पुस्तक ‘हिमाचली पहाड़ी भाषा लिपि व लोक साहित्य’ तथा राजेश शर्मा द्वारा संपादित ‘मंडी शहर के मंदिर’ पुस्तकों का विमोचन किया। 

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का न्यूज़लैटर ‘मांडव क्रॉनिकल’ भी जारी किया।इससे पूर्व, राज्यपाल ने ‘अमृत महोत्सव सभागार’ का उद्घाटन भी किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस राष्ट्र को जोड़ा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। 

उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्र को मां का स्थान दिया हैे। भारत एक जीवंत आत्मा है, जिसे हमने भूगोल से जोड़ा है। उसी प्रकार संस्कृति व ज्ञान को भी जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने उसी भाव को मन में रखकर कार्य किया और देशवासियों का मनोबल बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने सरदार पटेल के त्याग के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उनके जीवन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है। 

उन्होंने आंतरिक ताकतों से लड़ने तथा अपनी भाषा एवं संस्कृति को स्थापित करने पर बल दिया।सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा हम सबको प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने समाज को जो दर्शन दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि ‘संस्थागत आत्मीयता’ के कारण यह संस्थान तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर, विशिष्ट अतिथि एवं ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी, हमीरपुर के निदेशक चेत राम गर्ग ने कहा कि देश के महान लोगों के विचार और चिंतन से समाज को दिशा मिलती है। उन्होंने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन नायकों के बलिदान को नेपथ्य में डाल दिया गया था, उनके कार्यों को सामने लाने का प्रयास आजादी के अमृत महोत्सव में आयोजित संगोष्ठी के माध्यम से किया जा रहा है। 

उन्होंने सरदार पटेल की स्पष्टवादिता और चिंतन पर विस्तृत जानकारी दी।बीज वक्ता एवं राजकीय लोहिया महाविद्यालय चुरू, बीकानेर विश्वविद्यालय के सह आचार्य डॉ. सुरेंद्र सोनी ने कहा कि सरदार पटेल ने असंभव को संभव कर दिखाया और राष्ट्र को संगठित करने का जो कार्य किया, वह उन्हें महान बनाता है। यही वजह है कि वे लोगों के दिलों में बस गए। उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।सरदार पटेल विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।जिला प्रशासन के अधिकारीगण, प्राचार्यगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

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