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Golden Temple: 500 किलो सोने से सजा, अमृतसर का ये मंदिर,लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक

अमृतसर में स्थित सोने से सजा ये स्वर्ण मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारों में से एक है जो आस्था की अनोखी कहानी बयां करता है।

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अमृतसर , 01 Jul 2022

Last updated on: Jul 01, 2022, 00:00 IST

जब भी अमृतसर का जिक्र होता है तो स्वर्ण मंदिर का वो अद्भुत दृश्य जरूर नजरों के सामने आता है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माने जाना मंदिर सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारों में से एक है। आज हम इस गुरुद्वारे के बारे में बताने वाले हैं जिसके बारे में शायद ही आपको पहले कभी पता होगा 

जैसा कि स्वर्ण मंदिर के नाम से ही पता चलता है कि यह मंदिर कई किलो सोने से सजाया गया है। इसे श्री हरिमन्दिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। कुछ लोग इसे अत सत तीरथ के नाम से भी जानते हैं। हरमिंदर साहिब (golden temple) सिखों के पांच तीर्थ स्थलों में से सबसे महत्पूर्ण है। बता दें की यही वो स्थान है जहाँ सिखों के पवित्र धरम ग्रंथ आदि ग्रन्थ को भी स्थापित किया गया था।

आपको बता दें की इसे स्वर्ण मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस गुरुद्वारे का ऊपरी हिस्सा सोने ने बनाया गया है। जो आज गोल्डन टेंपल (golden temple) के नाम से पुरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि विदेश से भी भारी मात्रा में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। जिन्हें यहाँ संगत कहकर पुकारा जाता है।

स्वर्ण मंदिर का इतिहास

अमृतसर (Amritsar) स्थित स्वर्ण मंदिर न केवल सिखों का एक केंद्रीय धार्मिक स्थान है, बल्कि सभी धर्मों की समानता का प्रतीक भी है। स्वर्ण मंदिर के इतिहास (golden temple history) की बात करें तो इसका निर्माण 1588 में शुरू हुआ था। सन 1588 में दरबार साहिब की नींव सिखों के चौथे गुरू रामदास जी ने रखवाई थी। गुरु रामदास जी का मानना था की दरबार साहिब में गैर सांप्रदायिक लोग भी एकजुट हो कर ईश्वर की आराधना कर सकें इसलिए उन्होंने इसकी नीव लाहौर के सूफी संत मियां मीर से रखवाई। दरबार साहिब का निर्माण करते समय यहाँ सिखों के पवित्र धरम ग्रंथ आदि ग्रन्थ को भी स्थापित किया गया। 

लेकिन निर्माण होने के बाद दरबार साहिब को नष्ट करने की कोशिश कई बार की गई लेकिन हज़ारों कोशिशों के बाद भी कोई हमेशा के लिए अपने मंसूबे में कामियाब नहीं हो पाया। इसे जितनी बार तोड़ने की कोशिश की जाती थी उतनी ही बार इसे फिर से बनवा दिया जाता था। 19वी शताब्दी में अफगा़न हमलावरों ने दरबार साहिब का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया था था फिर इसे महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया। उन्होंने ना सिर्फ गुरूद्वारे का निर्माण कार्य पूरा करवाया बल्कि इसके ऊपरी हिस्से को सोने की परत से भी सजवाया तभी से इसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाने लगा।

स्वर्ण मंदिर का इतिहास यहाँ गुरूद्वारे के दीवार पर भी देखा जा सकता है। यह इतिहास दीवारों पर गुरमुखि (सिखों की भाषा) में इतहास लिखा हुआ है। इसके अलावा गुरुद्वारे में जाते ही चारों दिशाओं में गेट बने हुए हैं। जिससे ये पता चलता हैं की यहाँ कोई भी जाति या धर्म के लोग गुरूद्वारे में आ सकते हैं। पहले के समय में कुछ विवाद और समस्यायों के कारण कई और मंदिरों में दूसरे धर्म या जाती के लोगों को जाने की अनुमति नहीं होती थी। लेकिन इस गुरूद्वारे में शुरू से ही सभी धर्म के लोग आना जाना है। यहाँ ना पहले किसी प्रकार की रोक लगाई जाती थी और ना ही अब लगाई जाती है। 

दुनिया का सबसे बड़ा फ्री लंगर

अमृतसर के इस प्रसिद्ध गुरुद्वारे (amritsar famous gurudwara) में आने वाला व्यक्ति कभी भूखे पेट वापिस नहीं जाता इसलिए दुनिया में इस स्वर्ण मंदिर की गिनती सबसे बड़े फ्री लंगरों में की जाती हैं जहाँ रोजाना करीब 1 लाख से भी अधिक लोग लंगर चखते हैं। लंगर में खाने में रोटियां,दाल, सब्जी और मीठा होता है। श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए इस लंगर में लगभग 2 लाख रोटियां आधुनिक मशीनों से तैयार की जाती हैं। जहां एक घंटे में लगभग 25 हजार रोटियां तैयार की जाती हैं। यह लंगर 24 घंटे श्रद्धालुओं को लंगर सेवा प्रदान करता है। लगाए गए लंगर की खास बात ये है कि यहां परोसे जाने वाला सभी खाना भक्तों द्वारा दिए गए दान से बनाया जाता हैं।

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500 किलो से भी अधिक सोने से सजा है स्वर्ण मंदिर 

जैसे की हमने ऊपर बताया की इस मंदिर का नाम स्वर्ण मंदिर इसलिए पड़ा क्योंकि ये सोने से बना है आपको बता दें कि इसमें 500 किलोग्राम से भी अधिक सोने का इस्तेमाल किया गया है। इसके सोने के सभी कोट देश के विभिन्न हिस्सों के कुशल कलाकारों से बनवाया गया था। यह सब 24-कैरेट सोने से बना है, जो 22-कैरेट सोने से कहीं अधिक शुद्ध है। 

अमृत सरोवर से घिरा हुआ है स्वर्ण मंदिर

स्वर्ण मंदिर के आस-पास के पानी के कुंड बने हुए हैं जिन्हें अमृत सरोवर कहा जाता है जिसे बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि पवित्र कुंड के पवित्र जल में डुबकी लगाने से आध्यात्मिक संपत्ति प्राप्त की जा सकती है। पहले कुछ धर्म गुरुओं का मानना था कि अमृत सरोवर में डुबकी लगाने से सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं। 

सौंदर्य का सुंदर नजारा है 

गुरुद्वारे का नक्शा 400 साल पहले खुद गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार किया था। इस गुरुद्वारे की सुंदरता के चर्चे भूरे विश्वभर में हैं गुरुद्वारे के सौंदर्य का सुंदर नजाराआपको बार- बार यहां आने पर मजबूर करता है। मंदिर को संगमरमर की मूर्तियों और चित्रों से सजाया गया है। शीर्ष पर गुंबद शुद्ध सोने से बना हुआ है और गुरुद्वारा भी सोने के पैनलों से घिरा हुआ है। यही नहीं सबसे खास बात तो ये है की यहाँ चारों दिशा में चार द्वार है जो सभी जातियों के लोगों के लिए खुला है।

भारत के अमृतसर के केंद्र में स्थित सोन से सजा ये मंदिर अपने आप में कई विशेताओं को बताता है जो आज दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

 

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