नेशनल हेरल्ड केस: इंदिरा और फिरोज गांधी के नाम आज भी एसोसिएटेड जर्नल्स के शेयरधारकों में शामिल

Thursday, 04 June 2026

 

 

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नेशनल हेरल्ड केस: इंदिरा और फिरोज गांधी के नाम आज भी एसोसिएटेड जर्नल्स के शेयरधारकों में शामिल

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नई दिल्ली , 15 Jun 2022

Last updated on: Jun 15, 2022, 00:00 IST

नेशनल हेरल्ड मामले में ED तीन दिनों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछताछ कर रही है। इस विरोध में कांग्रेस नेताओं ने बवाला काटा हुआ है। वो सरकार के खिलाफ जगह जगह धरने दे रहे हैं। नेशनल हेरल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस को समझने से पहले हमें नेशनल हेरल्ड के इतिहास में जाना होगा। दरअसल नेशनल हेरल्ड समाचार पत्र देश को आजादी मिलने से भी पहले का अखबार है। इस अखबार की शुरूआत इंदिरा गांधी के पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में की थी। उस वक्त जवाहर लाल नेहरू की नेतृत्व में सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों ने मिलकर एसोसिएटेड जनर्ल्स लिमिटेड कंपनी बनाई थी।

इसका मकसद नेशनल हेरल्ड अखबार के जरिए अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई को तेज करना था। लेकिन अब ये बात सामने आई है कि इंदिरा नेहरू गांधी, फिरोज गांधी, विजयलक्ष्मी पंडित सहित नेहरू परिवार के नाम एसोसिएटेड जर्नल्स के शेयरधारकों के रूप में सूचीबद्ध हैं, जो जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। सूचीबद्ध अन्य शेयरधारकों में कांग्रेस के दिग्गज नेता रफी अहमद किदवई, पुरुषोत्तम दास टंडन, रजनी पटेल, जितेंद्र प्रसाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन कुमार बंसल शामिल हैं। अन्य में प्रकाश नारायण सप्रू, एस वेंकटरमणन, केसोराम कॉटन मिल्स, आबिद हुसैन शामिल हैं।कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, "कानूनों का कोई उल्लंघन नहीं है और जो कुछ भी किया गया है वह कानून के तहत किया गया है।

वेणुगोपाल ने राजनीतिक प्रतिशोध की ओर इशारा करते हुए कहा कि यंग इंडिया एक गैर-लाभकारी कंपनी है और कोई मनी लॉन्ड्रिंग नहीं है। उन्होंने कहा, "हम इसका मुकाबला करेंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा, "यंग इंडिया एक गैर-लाभकारी संस्था है। सोनिया जी एक निदेशक हैं। इस मामले में कोई लाभ नहीं लिया जा सकता है और न ही उन्होंने लिया है। यदि कोई लाभ होता है तो कंपनी में निवेश किया जाता है। ज्योत्सना सूरी और दिवंगत ललित सूरी के पास प्रत्येक एसोसिएटेड जर्नल के 50,000 शेयर हैं, जो कांग्रेस पार्टी के नेशनल हेराल्ड को प्रकाशित करते हैं।

जानें क्या है द यंग इंडियन

दरअसल यंग इंडिया कंपनी 2010 में एसोसिएटिड जर्नल्स को खरीदने के तीन महीने पहले ही आस्तित्व में आई थी, और मात्र 5 लाख रुपये से इसकी शुरूआत हुई थी। उस समय के कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी इसके डायरेक्टर थे। राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी दोनों के पास यंग इंडिया कंपनी के 38-38 फीसदी शेयर थे और बाकी के 24 फीसदी शेयर कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज पत्रकार सुमन दुबे और कुछ दूसरे लोगों के पास थे। असोसिएटिड जर्नल्स के 99 फीसदी शेयर यंग इंडिया को स्थानांतरित हो गए, लेकिन असोसिएटेड जर्नल्स के शेयरधारकों को इस बात का पता भी नहीं था। यह बात तब सामने आई जब  शेयर धारकों ने इस सौदे पर सवाल उठाए। शेयर धारकों में पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और इलाहाबाद व मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मार्केंडेय काट्जू जैसे लोग भी थे।

द यंग इंडियन एसोसिएटेड जर्नल्स का सबसे बड़ा शेयरधारक है। हरबंस लाल मल्होत्रा एंड संस के पास 16,000 शेयर हैं, जबकि रामेश्वर ठाकुर के पास 26,510 शेयर हैं। सिंधिया इन्वेस्टमेंट और मोहन मीकिन के पास 5000-5000 शेयर हैं। अन्य में अतीत और वर्तमान के कांग्रेसी नेताओं या गांधी परिवार के करीबी रहे हैं। कुछ शेयरधारकों में डॉ के.एन. काटजू, विजय दर्डा, सुष्मिता देव, मनिकम टैगोर, सैयद सिब्ते रजी, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, ऑस्कर फर्नांडीस, मोतीलाल वोरा, जेबी दादाचंदजी, एचवाई शारदा प्रसाद, गुलाम नबी आजाद, सुचेता कृपलानी, शीला दीक्षित आदि हैं। पवन कुमार बंसल एसोसिएटेड जर्नल्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। प्रवर्तन निदेशालय राष्ट्रीय राजधानी में अपने कार्यालय में राहुल गांधी से पूछताछ कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में कथित रूप से धन की हेराफेरी करने के मामले में राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को तलब किया। सोनिया गांधी 23 जून को वित्तीय जांच एजेंसी के सामने पेश होंगी।

इस पूरे विवाद का जन्म 26 जनवरी, 2011 को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के शेयरों के अधिग्रहण के साथ शुरू हुई। AJL को 20 नवंबर, 1937 को भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 के तहत एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में शामिल किया गया था, जो विभिन्न भाषाओं में समाचार पत्रों का प्रकाशन करती है। AJL ने अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज जैसे समाचार पत्रों का प्रकाशन शुरू किया। वित्तीय कठिनाइयों और कुछ श्रमिक समस्याओं के कारण विभिन्न अवसरों पर समाचार पत्र का प्रकाशन निलंबित कर दिया गया था। 2 अप्रैल, 2008 को अखबार बंद कर दिया गया था।

सुब्रह्मण्यम स्वामी कोर्ट ले गए मामला

साल 2012-13 में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड ने गलत तरीके से असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। स्वामी के मुताबिक यंग इंडिया लिमिटेड का मकसद असोसिएटेड जर्नल्स की तथाकथित 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा करना था। इस मामले में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है।

एआईसीसी ने यंग इंडियन को AJL की पुस्तकों में बकाया 50,00,000 रुपये का ऋण सौंपा। इसके अलावा, AJL के लगभग 99.99 प्रतिशत शेयर यंग इंडियन को हस्तांतरित किए गए। 13 दिसंबर 2010 को यंग इंडियन की पहली प्रबंध समिति की बैठक में राहुल गांधी को निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। आसान शब्दों में कहें तो नेशनल हेराल्ड मामला कांग्रेस पार्टी द्वारा यंग इंडियन को 50 लाख रुपये के विचार के लिए दिए गए 90 करोड़ रुपये के ऋण के असाइनमेंट से संबंधित है। यह आरोप लगाया गया है कि इसमें 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की हेराफेरी की गई थी।

 

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