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द कश्मीर फाइल्स ने कश्मीरी हिंदू नरसंहार की सच्चाई दिखाने का किया साहस, जिसे कश्मीर पर बनी हर पिछली फिल्म ने नजरअंदाज कर दिया था : विवेक अग्निहोत्री

राजनीतिक लाभ और वोट बैंक के लिए राजनेताओं द्वारा अपनाई गई चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता, देश के लिए हानिकारकः अग्निहोत्री

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घड़ूआं , 22 Apr 2022

Last updated on: Apr 22, 2022, 00:00 IST

'द कश्मीर फाइल्स' ने कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की सच्चाई को दिखाने की हिम्मत की, जिसे अतीत में कश्मीर पर बनी सभी फिल्मों ने आसानी से नजरअंदाज कर दिया था।' ये शब्द इंडियन फिल्म डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने कहे। उन्होंने 'प्रचलित चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता' पर प्रहार किया, जो देश एक महत्वपूर्ण तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है। इस दौरान वह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, घड़ूआं में भारतीय पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक कावेरी बमजई के साथ इंटरैक्टिव टॉक शो में बातचीत कर रहे थे, जो कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, घड़ूआं में चल रहे म्यूजिक एंड फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन आयोजित करवाया गया। इस दौरान उनके साथ अभिनेत्री पल्लवी जोशी विशेष तौर पर मौजूद रहीं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, घड़ूआं में चंडीगढ़ म्यूजिक एंड फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन बोलते हुए 'द कश्मीर फाइल्स' के निर्देशक, अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि पंजाब ने किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक रक्तपात देखा है। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप की हिंसा को जीरो टॉलरेंस की नीति ही आतंकवाद के खतरे का एकमात्र समाधान है। अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं और यह दुनिया को दिखाना उनका कर्तव्य है कि वे आतंकवाद का समर्थन नहीं करते हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता भारत के डीएनए में थी और है, लेकिन देश में प्रचलित 'चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता' देश के लिए अच्छी नहीं है। धर्मनिरपेक्षता एक महान चीज है, जहां सभी धर्मों को समान व्यवहार और सम्मान दिया जाना चाहिए, लेकिन भारत में चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता की एक खतरनाक प्रवृत्ति प्रचलित है, जहां राजनेता अपनी सुविधा के अनुसार इस शब्द का उपयोग करते हैं। मैं वोट बैंक के लिए राजनीति में धर्मनिरपेक्षता के स्वार्थी प्रयोग के खिलाफ हूं। 

उन्होंने कहा कि यह अवधारणा की भावना के लिए खतरा है और इस महान राष्ट्र को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाएगा और लोग केवल इस श्चयनात्मक धर्मनिरपेक्षताश् के नाम पर उनकी फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को इस्लामिक फोबिया कह रहे हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि श्लोग कहते हैं कि द कश्मीर फाइल्स में कहानी का एक पहलू यानी कश्मीरी मुसलमानों की कहानी को नहीं दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर पर अतीत में बनी लगभग आधा दर्जन फिल्में भी आसानी से और पूरी तरह से कहानी के एक पक्ष यानी कश्मीरी हिंदू नरसंहार को नजरअंदाज कर देती हैं। कश्मीर फाइल्स ने कहानी के उस पक्ष को दिखाने का साहस किया है। अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि देश के लगभग हर हिस्से ने अलग-अलग समय पर रक्तपात देखा है और दुर्भाग्य से संपूर्ण देश एकसाथ किसी भी समय पीडि़तों के लिए खड़ा नहीं हुआ है। 'आतंकवाद से भड़का खूनखराबा कश्मीर में, झारखंड में, बंगाल में हुआ है, यहां तक ??कि पंजाब की भूमि में भी सबसे लंबे समय तक रक्तपात देखा गया है, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं ज्यादा था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खतरे का समाधान किसी भी रूप की हिंसा को जीरो टॉलरेंस की सख्त नीति है। अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी फिल्म में किसी समुदाय को गिराने का प्रयास नहीं किया गया है, अग्निहोत्री ने कहा, मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं। 

मेरा दिल उनके लिए प्यार से भरा है। मुसलमान अच्छे लोग हैं। वे आतंकवाद का समर्थन नहीं करते और दुनिया को यह दिखाना उनका कर्तव्य है। अग्निहोत्री ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स, द ताशकंद फाइल्स के साथ शुरू हुई श्रृंखला की तीसरी फिल्म द डेल्ही फाइल्स होगी। बॉलीवुड में रुचि की कमी और शोध पर खर्च की कमी के लिए, अग्निहोत्री ने कहा कि उनकी प्रत्येक फिल्म एक पूर्ण शोध थीसिस के समान व बिल्कुल पीएचडी की तरह है, जिसे पूरा करने में 3-4 साल लगते हैं। इससे पहले, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और अभिनेता सौरभ शुक्ला ने अभिनय की बारीकियों, पात्रों की संरचना और कहानी कहने की कला के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उसकी कल्पना है और एक अभिनेता को भी लिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कल्पना करके लिखना और एक चरित्र की एक्टिंग के माध्यम से दर्शकों के सामने लाना एक समान है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि एक कहानीकार को खुद समझना चाहिए कि वह क्या कह रहा है। यदि वह करता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि लोग उसे या उसके अभिनय को न समझ पाएं। इस अवसर पर अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने छात्रों के साथ एक अभिनेता के रूप में आवाज और स्मृति पर मूल्यवान टिप्स और ट्रिक्स साझा किएए जबकि इस बात पर जोर दिया कि भाषा और उच्चारण अभिनेताओं के लिए सबसे बड़ी संपत्ति है। 

मशहूर निर्देशक अभिषेक दुहैया ने छात्रों को इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत और लग्न को अहम कुंजी बताया। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि जितनी अधिक मेहनत आप पर्दे के पीछे करेंगे, उतना ही आप पर्दे पर सफलता के करीब पहुंचेंगे। गौरतलब है कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित 2 दिवसीय फेस्टिवल में फिल्म प्रेमियों, छात्रों और उभरते फिल्म निर्माताओं की शानदार भागीदारी और उत्साह देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि म्यूजिक एंड फिल्म फेस्टिवल के लिए 150 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए थे, जिसके तहत विभिन्न फीचर फिल्मों, लघु फिल्मों, एनिमेटेड फिल्मों ने दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित फिल्म फेस्टिवल के दौरान पंजाब विधानसभा स्पीकर श्री कुलतार संधवान ने बतौर मुख्यातिथि कैंपस में शिरकत की, जबकि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर स. सतनाम सिंह संधू उद्घाटन समारोह के दौरान विशिष्ट अतिथि थे। इसके अलावा डायरेक्टर, प्रोडयूसर श्री इम्तियाज अली, अभिनेता श्री सौरभ शुक्ला, श्री दिलीप सेन, श्री अखिलेंद्र मिश्रा, श्री शाहिद माल्या, सपना चौधरी, श्री केसी बोकाडिया, श्रीमति प्रीति शप्रू, श्री अभिषेक दुधिया, श्री गेवी चहल के साथ श्री सतिंदर सत्ती, अर्जुमन मुगल, राणा जुगना और कई अन्य बॉलीवुड हस्तियां बतौर विशिष्ट अतिथि कैंपस में पहुंचकर छात्रों से रू-ब-रू हुईं।

 

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