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लॉक डाउन ने कारीगरों से छीना उनका निवाला, उत्थान ने दी एक नयी रौशनी की किरण

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14 May 2020

कोरोना ने जहाँ एक तरफ देश की आर्थिक स्थिति की कमर तोड़ रखी है वहीँ दूसरी तरफ लोगों की मानसिक व् शारीरिक उलझनों को भी बढ़ा दिया है. कोरोना से बचने के लिए एक तरफ लॉक डाउन को एक सराहनीय काम माना जा रहा है वहीं दूसरी तरफ इसने आम जन जीवन को तहस नहस कर दिया है. इसकी एक मात्र वजह सही तरफ से नीतिगत प्लानिंग का न होना है. इस लॉक डाउन का सबसे ज्यादा बुरा असर कारीगरों व् मजदूरों पर हुआ है जिनका रोजाना काम उनकी आय का श्रोत होता है.भारत में खेती के बाद तीसरा सबसे बड़ा तबका इन्ही कारीगरों व मजदूरों का होता है जिनकीं मेहनत से देश के कई बाज़ारों में रौनक रहती है. देश में इन कारीगरों की संख्या लगभग 47 लाख से भी ज्यादा है. ग्रामीण खंड में इन कारीगरों की संख्या लगभग 76.5% हैं। 58% से अधिक कारीगर अपनी आजीविका पूरी तरह या आंशिक रूप से वस्त्रों के माध्यम से कमाते हैं, जिसमें सूती, जूट, ऊन और मैस्टा के यार्न शामिल हैं। लगभग हर ग्रामीण घर की महिलाएँ हाथ से कढ़ाई का काम करती हैं, लेकिन शिल्प की व्यावसायिक भागीदारी सीमित है, हाथ से ऊनी और रेशम कालीन बनाने में लगे कारीगर 18.52% हैं। यह तो मात्र कुछ उदाहरण है लेकिन इसके अलावा कई ऐसे काम है जिनकी वजह से हमारे घरो की रौनक तो सजती है लेकिन इनके घरो की रौनक आजकल लॉक डाउन की वजह से बुझी हुई है. लोक डाउन के चलते कई कारीगर बेरोजगार हो गये हैं जिसकी वजह से उनके परिवार वाले भुखमरी से परेशान है. 

कुछ लोग यह सोच कर परेशान हो रहे है कि उन्हें पिज़्ज़ा , बर्गर नहीं मिल रहा वहीँ कुछ लोग ऐसे भी है जो एक रोटी के लिए परेशान हैं. इस आकस्मिक आपदा ने उनसे उनका सबकुछ छीन लिया है. सरकार ने इनकी बेहतरी के लिए कई सारी सुविधाएं तैयार की है लेकिन क्या सच में यह सुविधाए इन तक पहुंचती हैं? अगर सरकारी आंकड़ो की माने तो बहुत लोगो के लिए यह लाभान्वित साबित हुई है लेकिन अगर यह इतनी लाभदायक है तो क्यों आज इन अद्भुत कारीगरों को खुद की परंपरा से नफरत है?उत्थान ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से कारीगरों का सामान लोगों तक पहुंचाता  है. इसमें लोगों और कारीगरों के बीच सीधा संपर्क होने की वजह से उन्हें उनकी मेहनत का पूरा पैसा मिलता है. उत्थान के ज़रिये कोई भी कारीगर अपने आप को इसमें बहुत ही आसान तरीको से पंजीकृत करवा सकता है और उसके बाद अपने द्वारा बनाए गये उत्पाद या शिल्पकारी को उत्थान के जरिये लोगो तक पहुंचा सकता है.  उत्थान करीब 10000 से ज्यादा कारीगरों के परिवारों के रोजगार का साधन बना हुआ है. सरकार के इस लॉक डाउन में सभी तरह के रोजगार बंद हो चुके है ऐसे में इनके परिवारवालो के लिए सबसे बड़ी दिक्कत रोजी रोटी की हो रही है. इस लॉक डाउन के समय पर यह कारीगर अपने घरों से अपने द्वारा बनाए उत्पादों को उत्थान के जरिये बेच रहें हैं. लॉक डाउन के समय में उत्थान के जरिये करीब 1000 परिवार की आमदनी हो रही है जिससे उनके रोज़मर्रा के खर्चे चल रहें हैं. देश के कई राज्य जैसे ओड़िसा, कर्नाटका, केरेला बिहार और झारखण्ड के कारीगरों को लॉक डाउन के समय उत्थान के जरिये मदद मिल रही है. इसमें कोई और बिचौलिया न होने की वजह से मुनाफा सीधे कारीगर के पास जाता है.उत्थान के जरिये कस्टमर तक ये प्रोडक्ट पहुंचता है. देश में सरहद पर हमारे जवान देश की सुरक्षा के लिए मौजूद रहते हैं वैसे ही हम भी देश के अन्दर रहने वाले लोगों की मदद कर सकते हैं. आपकी जरा सी मदद न जाने कितने लोगो के निवालो का जरिया बन सकती है.

 

Tags: Coronavirus

 

 

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