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मिलिट्री लिटरेचर फैस्ट -2019 : पंजाब के राज्यपाल वी.पी.सिंह बदनौर ने मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का किया आगाज़

चन्नी ने भारतीय फ़ौज के सुनेहरी विरासत से नौजवानों को अवगत करवाने के लिए मिलिट्री फैस्ट को बताया रचनात्मक कदम

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चंडीगढ़ , 13 Dec 2019

Last updated on: Dec 13, 2019, 00:00 IST

पंजाब के राज्यपाल वी.पी.सिंह बदनौर ने हर साल होने वाले मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे भाग का उद्घाटन करते हुये कहा कि भारत आधुनिक तकनीकों के ज़रिये स्वयं हथियारों का निर्माण करने के पक्ष से आत्म-निर्भर मुल्क बनेगा।विदेशों और भारत के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे फ़ौजी इतिहासकारों, सेवा-मुक्त और सेवा निभा रहे मिलिट्री अफसरों, अनुसंधानकत्र्ताओं, अकादमिक विद्वानों, लेखकों, स्कूली विद्यार्थियों की हाजिऱी में 13 दिसंबर से 15 दिसंबर तक चलने वाले तीन दिवसीय मिलिट्री फैस्ट का आग़ाज़ करने के मौके पर श्री बदनौर ने 2001 में संसद पर हुए हमले के शहीदों को श्रद्धाँजलि भेंट करते हुये कहा कि यह लोकतंत्र के मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए आज के दिन किया गया महान बलिदान था।उन्होंने कहा कि भारतीय लोगों ने 1947 में आज़ादी हासिल करने से लेकर भारत बहुत आगे गुजऱ आया है जिस कारण देश खाना पदार्थों के पक्ष से निर्भर नहीं और न ही विदेशी सहायता पर किसी भी तरह निर्भर है बल्कि मौजूदा समय भारत आर्थिक पक्ष से कमज़ोर कौमों की सहायता करने के योग्य है। श्री बदनौर ने कहा कि कोई समय था कि हमारे देश को जंगी साजो-समान के लिए अन्य देशों पर निर्भर करना पड़ता था परन्तु अब भारत का लक्ष्य आधुनिक तकनीक के ज़रिये ख़ुद हथियार निर्माण के पक्ष से आत्म निर्भर बनने के लिए व्यवस्था को मुकम्मल रूप में विकसित करना है और भारत की तरफ से पहले ही 3000 करोड़ की कीमत के सुरक्षा साजो-समान का निर्माण ख़ुद किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हथियारों के निर्माण के लिए ‘मैक इन इंडिया’ अब नारा न रह कर वास्तविकता बन उठा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही हम ख़ुद डिज़ाइन और निर्माण किये हथियारों और अन्य साजो-समान से अपनी सुरक्षा करने वाली कौम के रूप में जाने जायेंगे।श्री बदनौर ने इस बात की सराहना की कि इस फेस्टिवल के दौरान हुए विचार-विमर्श में से एक दौरान उक्त नुक्ते पर केंद्रित होते सुरक्षा साजो-समान के निर्माण करने वालों से अपील की गई कि भारत की इस प्राप्ति से लोगों को जागरूक करवाने के लिए इस फेस्टिवल द्वारा मुहैया करवाए जा रहे स्वास्थ्य आधार को सुयोग्य रूप में इस्तेमाल किया जाये और अगले साल होने वाले इस फेस्टिवल के दौरान घरेलू और अंतर-राष्ट्रीय सुरक्षा साजो-समान को प्रदर्शित करके इस फैस्ट का हिस्सा बनाया जाये।विद्यार्थियों और नौजवानों को भारत की हथियारबंद सेनाओं के सुनेहरे और समृद्ध इतिहास से अवगत करवाने के लिए इस मिलिट्री फेस्टिवल को अलग प्लेटफार्म करार देते हुये पंजाब के राज्यपाल ने याद किया कि उनकी तरफ से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ जयपुर और देश के अन्य भागों में हो रहे साहित्यक मेलों की तजऱ् पर चंडीगढ़ में सुरक्षा और जंग पर केंद्रित साहित्यक फेस्टिवल करवाने का विचार सांझा किया था और इसको मुख्यमंत्री की तरफ से स्वीकृत कर लिया गया। उन्होंने कहा कि मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल नौजवानों और नागरिकों को देश की सेनाओं, उनके अनुशासन, सभ्याचार, बलिदान और देश की अनेकता में एकता से अवगत करवाने के लिए उत्तम रास्ता है।

इस फेस्टिवल के 2017 और 2018 के दोनों भागों को कामयाब बनाने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों संबंधी मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, मुख्यमंत्री के सीनियर सलाहकार लैफ. जनरल टी.एस. शेरगिल्ल और पश्चिमी कमांड हैडक्वार्टर का धन्यवाद करते हुये श्री बदनौर ने कहा कि यकीनी तौर पर बच्चों को फ़ौज के सेवा-मुक्त और सेवा निभा रहे अफसरों को मिलने और जंग से जुड़ी उत्साही कहानियों से अवगत होने के लिए यह फैस्ट स्वस्थ आधार मुहैया करवाएगा।रावी या परुशनी दरिया किनारे पुरातन समय में वास करने वाले ‘भारतस’ कबीले, जिसकी तरफ से हमारे देश को भारत का नाम दिया गया, का हवाला देते हुये पंजाब के राज्यपाल ने कहा कि यह कहा जा सकता है कि ‘पंजाब भारत है और भारत पंजाब’ क्योंकि कोई और क्षेत्र नहीं जो विदेशी हमलों का मुकाबला करके अंदरूनी सुरक्षा का इतने लंबे समय के लिए प्रत्यक्षदर्शी रहा हो। उन्होंने कहा कि विपरीत हालत के बावजूद यहाँ के लोगों की सिदकदिली के साथ पंजाब जहाँ भारत के लिए खाना पदार्थों का जरिया बना, वहीं देश की सुरक्षा के लिए खडग़भुजा बना।उन्होंने कहा कि यह बहुत ही उपयुक्त है कि मिलिट्री फैस्ट की स्थापना पंजाब में चण्डीगढ़ में हुई जहाँ मिलिट्री उद्योग, अंदरूनी सुरक्षा, हथियारों के उद्योग से सम्बन्धित प्रदर्शनियाँ और रचनात्मक विचार- विमर्श हो रहा है। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व और महात्मा गांधी के 150वें जन्म वर्ष का जि़क्र करते हुये श्री बदनौर ने कहा कि यह मौका हमें याद करवाता है कि कौमों का मार्ग अहिंसा और विश्व भाईचारा होना चाहिए जहाँ जंग कोई विकल्प न हो। राज्यपाल ने कहा कि उनके नज़रिए से भारत मज़बूत देश के तौर पर देश की एकता, अखंडता और शान्ति को ख़तरा पहुँचाने वाली हर अंदरूनी और बाहरी विद्रोह और खतरे के साथ निपटने के लिए मुकम्मल रूप में योग्य है। उन्होंने कहा कि हमारी हथियारबंद फौजों ने पाकिस्तान के ख़ैबर-पखतूनवा क्षेत्र की गहराई तक अंदर जाकर और सरहद पार पहाड़ी क्षेत्रों में सर्जीकल हमला करके ऐसा दिखा दिया है।उन्होंने कहा कि हमारे देश ने यह भी दिखा दिया है कि यह अंतरिक्ष के लक्ष्यों तक पहुँचने के योग्य है और सैटेलाइट प्रणाली के ज़रिये अपने फ्ऱंटियर क्षेत्रों और इनसे पार तक नजऱ रखने के काबिल है। उन्होंने कहा कि हम अपने समुद्री जंगी वाहनों, अपने टापूओं और अपने देश को समुद्री सैना के पक्ष से सुरक्षित करने की प्रक्रिया में हैं।उन्होंने याद करवाया यह कारगिल जंग की 20वीं वर्षगांठ का वर्ष है और प्रशासनिक कमेटी की तरफ से इसको इस जंग से सीखने वाले पहलूओं को अमली रूप में लागू करने के लिए समीक्षा करके मनाया गया है। 

चण्डीगढ़, मोहाली और पंचकुला तीनों शहरों संबंधी बात करते हुये श्री बदनौर ने कहा कि यह तीनों शहरों में फ़ौजी भाईचारे का घर हैं जहाँ उन्होंने सुरक्षा सेनाओं के पूर्व प्रमुखों के अलावा हथियारबंद सेनाओंं के सीनियर अफ़सर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि 7 दिसंबर को सुरक्षा सेनाओं के फ्लैग दिवस के मौके पर आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के पूर्व प्रमुखों द्वारा शिरकत करके चण्डीगढ़ जंगी यादगार पर फूल मालाऐं भेंट की। उन्होंने कहा कि 2018 के मिलिट्री लिटरेचर फैस्ट के दौरान करीब 65 हज़ार लोगों द्वारा सम्मिलन किया गया था और उम्मीद है कि इस वर्ष यह संख्या बढ़ेगी।इससे पहले अपने स्वागती भाषण में पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों संबंधी मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी द्वारा पंजाब के राज्यपाल वी.पी.सिंह बदनौर और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का यह फेस्टिवल करवाने के लिए धन्यवाद किया गया जिस कारण नौजवान पीढ़ी को भारतीय फ़ौज की बहादुरी और सुनेहरी इतिहास को जानने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि यह फैस्ट उपयुक्त प्लेटफार्म है जहाँ नौजवान बच्चों के लिए बनाऐ संवाद प्रोग्राम के ज़रिये वह भारतीय फ़ौज के अफसरों से उत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे प्रेरित होने के साथ-साथ हथियारबंद सेनाओं के इतिहास और सभ्याचार से भी अवगत हो रहे हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पहले ही इस समागम को करवाने के लिए 1.5 करोड़ रुपए जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि यह फैस्ट तीन स्थानों पर हो रहा है जहाँ 24 पैनल विचार-विमर्श करेंगे जिनमें नामी मिलिट्री लेखक, विद्वान, आर्मी अफ़सर, खेल शख्सियतें, कवि, कलाकार, पत्रकार, तकनीकी माहिर, फि़ल्म और दस्तावेज़ी फि़ल्म निर्माता, मिलिट्री उद्योग क्षेत्र की शख्सियतें अपने तजुर्बे सांझे करेंगी।वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल आर.पी.सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे प्रत्येक के लिए यह गर्व वाली बात है कि हम 2017 से शुरू हुए इस फेस्टिवल के साथ शुरू से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल सुरक्षा, नीति और कूटनीति के लिए नये विचारों और नुक्तों से अवगत होने के लिए मौका प्रदान करेगा।मुख्यमंत्री पंजाब के सीनियर सलाहकार लैफ. जनरल तेजिन्दर सिंह शेरगिल्ल ने कहा कि यह फेस्टिवल नौजवानों को फ़ौज को पेशे के तौर पर अपनाने के लिए उत्साहित करने के साथ-साथ उनमें देशभक्ति की भावना पैदा करेगा। इस मौके पर सूबेदार मेजर योगेश्वर यादव द्वारा राज्यपाल वी.पी.सिंह बदनौर को सम्मानित किया गया।इस मौके पर फ़ौज के पूर्व प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक, पूर्व एयर चीफ़ मार्शल बी.एस. धनोआ, जल सेना के पूर्व प्रमुख सुनील लांबा, चण्डीगढ़ में ब्रिटिश के डिप्टी हाई कमिशनर एंड्रयू आइर, कैनेडियन कौंसूलेट जनरल मिआ येन के अलावा ब्रिटेन और कैनेडा से एक प्रतिनिधिमंडल समेत मशहूर शख्सियतें उपस्थित थी।

 

Tags: VP Singh Badnore , Miltary

 

 

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