पंजाब कांग्रेस ने अकाली-भाजपा सरकार के अपने कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने के फैसले का विरोध किया है। जिससे राज्य में बेरोजगारी की गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी। गठबंधन सरकार के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए पंजाब कांग्रेस के महासचिव व धूरी से विधायक अरङ्क्षवद खन्ना ने हैरानी जताई है कि राज्य सरकार बेरोजगारी की गंभीर समस्या को सुलझाने की बजाए इसको और बढ़ा रही है। सरकार के इस फैसले से पढ़े लिखे युवा और दो वर्षों तक सरकारी क्षेत्र में नहीं आ सकेंगे। खन्ना ने कहा कि रिटायरमेंट आयु को और दो साल के लिए बढ़ाने का अर्थ है कि अगले दो सालों तक कोई नौकरी नहीं। इससे युवाओं का उत्साह कम होगा, खासकर उनका जिनकी सरकारी नौकरी हासिल करने की अधिकतम आयु सीमा पार हो जाएगी। जबकि राज्य में पहले ही 45 लाख लोग बेरोजगार हैं।
इस कदम इस संख्या व उन बेरोजगारों की परेशानी को और बढ़ाएगा। कांग्रेस महासचिव ने गठबंधन सरकार से इस विषय पर विचार करने और राज्य में बेरोजगार पढ़े लिखे युवाओं के बारे में सोचने को कहा है। क्योंकि जहां एक ओर राज्य में किसी भी तरह का निजी निवेश न होने कारण पहले से ही निजी नौकरियों का अकाल पड़ा हुआ है। वहीं पर, सिर्फ आखिरी उम्मीद की किरण बचे सरकारी क्षेत्र को भी अकाली-भाजपा सरकार अगले दो सालों के लिए बंद करने जा रही है। जो फैसला पूरी तरह से बेइंसाफी है। धूरी से विधायक ने सरकार के उस दावे पर भी सवा खड़ा किया है कि वह 1000 करोड़ रुपए सलाना का खजाना बचाएगी। लेकिन ऐसे फैसले लेकर यदि वह कुछ पैसे बचाती भी है, तो यह राज्य के लोगों को धोखा देने की बजाय और कुछ नहीं होगा। जो खजाना बचाने के नाम पर पंजाब के शिक्षित युवाओं के लिए अगले दो वर्षों तक सरकारी नौकरी का रास्ता बंद कर रही है।