श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले विश्व सांस्कृतिक महोत्सव पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा लगाए गए जुर्माने को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने एक और जजिया कर की संज्ञा दी है। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, "पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हिन्दू समाज पर (विशेषकर श्री श्री रविशंकर जैसी हस्तियों या उनकी किसी संस्था पर) बिना किसी अपराध के जुर्माना लगाना मुगलकालीन जजिया कर की याद ताजा करता है। जिस आयोजन के माध्यम से भारत के धर्म, आध्यात्म, योग, कला और संस्कृति का परचम विश्व भर में फैलाने के अलावा यमुना की सुरक्षा के प्रति जागरण की तैयारी हो रही हो, वह भला 'सेक्युलरवादी' लोगों को रास कैसे आ सकता है?"
उन्होंने एनजीटी से इस मामले में पुनर्विचार करने को भी कहा।विहिप नेता ने यह भी कहा कि 'यमुना पुश्ता और खादर पर बनी बांग्लादेशी घुसपैठियों की अवैध झुग्गियों, मुस्लिम वोट बैंक की खान बनी ओखला बैराज और यमुना से सटी अवैध कालोनियों, बूचड़खानों से निकलने वाले मांस, रक्त और अपशिष्ट अंग, चमड़ा फैक्ट्रियों व अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले घातक रसायन, कबाड़ व प्लास्टिक को निरंतर जलाने से उठे धुएं, बदबू तथा यमुना से निरंतर हो रही रेत की चोरी पर एनजीटी का मौन चिंतनीय है।'
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल द्वारा जारी बयान में कहा गया कि पर्यावरण के नाम पर हिंदुओं की परंपराओं-आस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अल्पसंख्यक समुदायों की 'पर्यावरण विरोधी' परंपराओं की अनदेखी की जा रही है। बयान में पूछा गया है कि यह 'सेलेक्टिव' पर्यावरण प्रेम आखिर कब तक चलेगा?विहिप ने बयान में कहा है कि 'कार्यक्रम के विरोधी सिर्फ हिंदू समाज की आलोचना छोड़कर विश्व कल्याण व मानवता के सेवार्थ कार्यक्रम में सहभागी बनें। एनजीटी ने यमुना खादर में होने वाले पारिस्थितिकीय नुकसान पर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने पर्यावरण और जल संसाधन मंत्रालय के साथ ही डीडीए को जिम्मेदारी में चूक के लिए फटकार लगाई। इसके लिए डीडीए पर पांच लाख और डीपीसीसी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।