विज्ञान एवं प्रौद्यागिकी, भू-विज्ञान मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक जन शिकायत एवं पेंशन, अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज यहां कहा कि जम्मू कश्मीर में बाढ़ प्रभावितों को हर तरह की आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और उनके परिजनों तथा रिश्तेदारों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि अभी तक सशस्त्र सेनाओं और राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई बल (एनडीआरएफ) ने 76,500 से अधिक लोगों को बचाया है और जो लोग अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हैं, उन्हें भी सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी है।
डॉ. सिंह ने थल सेना, वायुसेना, बीएसएफ और अन्य अर्द्धसैनिक बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना और थल सेना ने अभी तक अकेले ही 80 विमानों और हैलिकॉप्टरों को इस अभियान में उतारा है। इसके अलावा सेना की 329 टुकडि़यों को राज्य में पहले ही तैनात किया जा चुका है, जो दुर्गम क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावितों को बचाने का असाधारण कार्य कर रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि भारतीय सशस्त्र सेनाएं और अर्द्धसैनिक बल न केवल सीमा पर शत्रुओं से लड़ने बल्कि वे हर तरह की प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों की रक्षा करने में भी सक्षम हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को और राहत सामग्री उपलब्ध कराए जाने के मुद्दे को उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्रालय तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावितों के लिए सेना ने अपनी ओर से 1,50,000 लीटर पानी का वितरण किया है और पानी की अतिरिक्त बोतलें चंडीगढ़ तथा दिल्ली से विमान से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि वह राज्य प्रशासन के संपर्क में हैं और प्रभावित जिलों के उपायुक्तों के साथ भी लगातार नियमित व्यक्तिगत संपर्क बनाए हुए हैं, लेकिन सबसे बड़ी अड़चन संचार प्रणाली और टेलीफोन नेटवर्क का ध्वस्त होना है, जिसे अगले एक-दो दिन में दुरूस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य में जुड़े दल संचार के लिए सैटलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।