फीफा विश्व कप के मौजूदा और पिछले संस्करण ने फुटबाल में सफलता का जो अचूक मंत्र दिया है, वह है-टीम के रूप में एकजुट एवं सामंजस्य भरा प्रदर्शन। दक्षिण अफ्रीका में हुए पिछले फीफा विश्व कप-2010 की विजेता स्पेन में दो प्रमुख क्लबों, एफसी बार्सिलोना और रियल मेड्रिड के खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। मतलब साफ है कि टीम के खिलाड़ी पहले से एकदूसरे के साथ खेलते रहे थे, जिससे एक टीम के रूप में कहीं अधिक तारतम्यता और सामंजस्य उनके बीच रहा। बार्सिलोना के जावी, आंद्रेस इनिएस्ता, सर्जियो बस्क्वेट्स, प्रेडो, जॉर्डी अल्बा और सेस्क फाब्रेगास मौजूदा विश्व कप में भी स्पेन की टीम में शामिल थे, और उनके बीच सामंजस्य भी रहा, लेकिन उम्रदराज खिलाड़ियों और अतिविश्वास के कारण ग्रुप चरण में ही उनका बोरिया बिस्तर बंध गया।
स्पेन के अधिकतर खिलाड़ी उम्र के उस पड़ाव पर थे, जहां न सिर्फ यह विश्व कप उनका आखिरी विश्व कप था बल्कि अपने-अपने क्लबों के लिए भी वे आखिरी सत्र खेलने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जावी, इकेर कैसिलास, फर्नाडो टोरेस और एंद्रीया इनिएस्ता के लिए निस्संदेह तौर पर ब्राजील विश्व कप आखिरी विश्व कप था, और ब्राजील के गर्म मौसम में उनकी उम्र ने उनके स्वास्थ्य का साथ नहीं दिया। रविवार को अर्जेटीना को 1-0 से हराकर दक्षिण अमेरिका में विश्व चैम्पियन का ताज पहनने वाली पहली यूरोपीय टीम जर्मनी भी लगभग वैसी ही टीम के साथ उतरी थी। मरकाना स्टेडियम में हुए फाइनल मुकाबले में मैच की शुरुआत करने वाले जर्मनी के छह खिलाड़ी बायर्न म्यूनिख क्लब से थे। यहां तक कि फाइनल मैच में एकमात्र विजयी गोल दागने वाले स्थानापन्न खिलाड़ी मारियो गोट्जे भी बायर्न म्यूनिख के ही सदस्य थे।
जब किसी टीम में खेलने वाले सात-सात खिलाड़ी किसी एक ही क्लब से हों तो निश्चित तौर पर यह लाभदायक साबित होता है। फुटबाल ऐसा खेल है, जो खेल के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों के बीच सामंजस्य पर तो निर्भर करता ही है, मैदान से बाहर भी उनके बीच तारतम्यता उनके सम्मिलित प्रदर्शन को काफी प्रभावित करती है। विश्व कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता की तैयारियों के लिए खिलाड़ियों को काफी पहले बुला लिया जाता है, ताकि वे आपस में बेहतर तालमेल स्थापित कर सकें। जर्मनी की मध्यपंक्ति में अधिकांशत: टोनी क्रूस, बास्टियन श्वीनस्टीगर और गोट्जे शामिल रहे। ये तीनों ही खिलाड़ी बायर्न के लिए एकसाथ खेलते हैं, जिसके कारण इनके बीच गजब का तालमेल देखने को मिला।
इसके बाद पिछली पंक्ति में बायर्न के दो सदस्य कप्तान फिलिप लाम और जेरोम बोआटेंग ने बेहतर तारतम्यता के साथ रक्षापंक्ति को बांधे रखा, जबकि आखिरी काम गोल्डन ग्लव्स विजेता गोलकीपर मैनुएल नूएर ने किया। नूएर भी बायर्न के लिए खेलते हैं। मेजबाल ब्राजील के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में जर्मन खिलाड़ियों के बीच गजब का सामंजस्य देखने के मिला, जिसमें उन्होंने ब्राजील को 7-1 से करारी मात दी थी। फाइनल मुकाबले में लियोनेल मेसी की टीम के खिलाफ वे अपनी वैसी गति भले कायम न रख सके, लेकिन खिलाड़ियों में तालमेल वैसा ही रहा और अंतत: गोट्जे विजयी गोल हासिल करने में सफल रहे।