केंद्रीय फूड प्रॉसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने देश में राज्यों की मुख्य फसलों एवं जरूरतों अनुसार 'फूड मैप बनाने के आदेश दिये हैं ताकि उन राज्यों द्वारा उत्पादन की जाती मुख्य फसलों की प्रॉसेसिंग कर किसानों को बाज़ार में अतिरिक्त मूल्य मिल सके। आज यहां सिफ्ट (सैंटर इंस्टीच्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टैकनॉलौजी) में फूड प्रॉसेसिंग के केंद्रीय सचिव श्री यू वैंकवेश्वर, पंजाब के कृषि विभाग के वित्तायुक्त विकास एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान श्रीमती बादल ने फूड मैप द्वारा किसानों को पहले राज्य, जिलों एवं गांव स्तर पर उनके द्वारा उत्पादित की फसलों की प्रॉसेसिंग सुविधा प्रदान की जायेगी। सिफ्ट के निदेशक द्वारा देश भर में 116 जिलों में कियेे सर्वे के आधार पर बताया गया कि वार्षिक 44000 करोड़ रुपये का कृषि उत्पादन नष्ट होता है, जिसका मुख्य कारण कटाई, ट्रांसपोटेशन एवं स्टोरेज़ के दौरान उसका सही संरक्षण ना होना है। यह सर्वे 45 फसलों पर किया गया था जिसमें पंजाब की धान, गेंहू एवं मक्की मुख्य तौर पर शामिल थे। श्रीमती बादल ने कहा कि फूड प्रॉसेसिंग मंत्रालय द्वारा अगामी दो वर्षो के दौरान इसको 50 प्रतिशत तक घटाकर मंहगाई काबू करने में बड़ा योगदान डालना हैं।
पंजाब में फूड प्रॉसेसिंग संबंधी बात करते हुए श्रीमती बादल ने कहा कि 'पंजाब के किसान फसल उत्पादन के लिए विश्व भर में जाने जाते हैं एवं वह संपूर्ण देश का पेट भर रहें हं, परंतु फूड प्रॉसेसिंग के क्षेत्र में हम बहुत पीछे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में फूड प्रॉसेसिंग क्षेत्र की बढ़ौतरी की अपार संभावनांए मौजूद हैं क्योंकि यहां कच्चे माल की कोई कमी नही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में टमाटर, मक्की, आलू की प्रॉसेसिंग की तरफ अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने सिफ्ट को कहा कि वह पंजाब सरकार की मदद से तैयार छोटी 40 के लगभग विभिन्न प्रकार की प्रॉसेसिंग मशीनों का व्यापारीकरण करें ताकि पंजाब सरकार उन मशीनों को कृषि औजारों के अधीन नोटीफाई कर उनपर किसानों को सब्सिडी दे सके। उन्होंने कहा कि यह मशीनें किसानों को मुहैया करवाने का कार्य भी किया जाये ताकि किसान अपने स्तर पर फसलों की प्रॉसेसिंग कर सकें। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति श्री बी एस ढिल्लों को कहा कि वह कृषि विभाग के साथ मिलकर किसानों को गुणवत्ता नियंत्रण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण दें एवं इसके लिए बठिंडा, गुरदासपुर एवं जालंधर में निपुण विकास केंद्र खोले जायें। श्रीमती बादल द्वारा तमिलनाडू की तर्ज पर पंजाब में भी मोबाईल प्रॉसेसिंग वैन चलाने को भी मंजूरी दे दी है। दूध की प्रॉसेसिंग एवं इसमें विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए श्रीमती बादल ने गड़वासू के उपकुलपति श्री वी के तनेजा एवं मिल्कफैड के अधिकारियों को कहा कि वह 15 से 20 गांवों का कलस्टर स्थापित करें जहां प्रत्येक गांव में से दूध एकत्र करके उसकी प्रॉसेसिंग की जाये।
राज्य में विभिन्न प्रोजेक्टों संबंधी केंद्र एवं राज्य सरकार दौरान बेहतर तालमेल के लिए श्रीमती बादल द्वारा केंद्रीय फूड प्रॉसेसिंग सचिव, पी ए यू के उप-कुलपति, गड़वासू के उपकुलपति, पंजाब के फूड प्रॉसेसिंग विभाग के सचिव, वित्तायुक्त कृषि विकास को शामिल कर कमेटी बनाने संबंधी भी कहा। कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति द्वारा प्रस्तुत किये प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी देते हुए श्रीमती बादल द्वारा गुरदासपुर एवं लुधियाना में एग्रो प्रॉसेसिंग फेयर लगाने को भी मंजूरी दी गई। श्रीमति बादल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा फूड प्रॉसेसिंग संबंधी लगाई गई प्रदर्शनी का भी दौरा किया। इस अवसर पर मुख्य तौर पर वित्तायुक्त कृषि विकास सुरेश कुमार, फूड प्रॉसेसिंग के सचिव एस आर लद्दड़, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव गगन दीप सिंह बराड़, पंजाब एग्रों के एम डी के एस पन्नू, सिफ्ट के निदेशक आर के गुप्ता उपस्थित थे।