हिमाचल प्रदेश ने 12वीं पंचवर्षीय योजना 22,800 करोड़ रूपए निर्धारित
Web Admin
5 दरिया न्यूज (विजयेन्दर शर्मा)
शिमला , 27 Dec 2012
Last updated on: Dec 27, 2012, 00:00 IST
हिमाचल प्रदेश की १२वीं पंचवर्षीय योजना २२,८०० करोड़ रूपए निर्धारित की गई है । इस योजना की स्वीकृति आज राष्ट्रीय विकास परिषद की ५७वीं बैठक में प्रदान की गई ।राज्य के मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज यहॉं राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि १२वीं योजना के आकार में राज्य की ११वीं पंचवर्षीय योजना के मुकाबले रिकार्ड ६५ प्रतिशत वृद्घि प्रदान की गई है जोकि देशभर में सर्वाधिक है।मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि १२वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय ८.२ प्रतिशत विकास दर के मुकाबले प्रदेश में ९ प्रतिशत विकास दर प्राप्त की जाएगी । उन्होंने बताया कि योजना के दौरान कृषि क्षेत्र को वर्तमान ४.२ प्रतिशत विकास दर की उत्पादकता बढ़ाकर ४.५ प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है । उन्होंने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत जैविक खेती, गैर मौसमी सब्जियों, पाली हाऊस को बढ़ावा देकर लघु एवं ड्रिप सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करके कृषि आय में वृद्घि की जाएगी तथा फलों एवं सब्जियों के भण्डारण के समुचित प्रबन्ध किए जायेंगे । वीरभद्र सिंह ने कृषि में पर्याप्त पूंजी निवेश करने वाले राज्यों को केन्द्रीय विकास योजनाओं में पर्याप्त वित्तिय सहायता प्रदान करने का अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य में कृषि एवं सम्बद्घ क्षेत्र में योजना की ९ प्रतिशत राशि आबंटित की जा रही है जिसके मद्देनजर राज्य को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में पर्याप्त सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए । मुख्यमंत्री ने त्वरित सिंचाई लाभार्थी कार्यक्रम के अन्तर्गत मानकों को पहाड़ी राज्यों के लिए लागत में वृद्घि तथा कार्य अवधि को बढ़ाने का अनुरोध किया तथा कहा कि योजना के अन्तर्गत प्रति हैक्टेयर मानक लागत ४ लाख रूपए एवं कार्य अवधि की सीमा बढ़ाकर ३ वर्ष की जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत राज्य में २७,००० हैक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जायेंगी ।
उन्होंने विदेशों से आयात किये जा रहे सेब पर आयात शुल्क में तीन गुणा वृद्घि की मांग करते हुए भारतीय फल उत्पादकों को पर्याप्त संरक्षण प्रदान करने का अनुरोध किया तथा योजना के अन्तर्गत सभी फलों की उत्तम प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर निवेश राशि बढ़ाने का अनुरोध किया । उन्होंने प्रदेश में चाय उद्योग को पुर्नजीवित करने के लिए विस्तृत कार्य योजना के माध्यम से केन्द्र से वित्तिय, तकनीकी एवं विपणन सुविधाएं प्रदान करने का अनुरोध किया । मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने तीव्र औद्योगिक विकास के लिए केन्द्रीय औद्योगिक पैकेज को दोबारा स्वीकृत करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसी सुविधाएं अन्य पहाड़ी राज्यों को प्रदान की जा रही है तथा नए पैकेज में पड़ौसी राज्यों के दुर्गम पहाड़ी पिछड़े क्षेत्रों को भी सम्मिलित किये जाने का सुझाव दिया । उन्होंने योजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च मार्ग-२२ के अन्तर्गत शिमला-कालका सड़क के सामरिक एवं आर्थिक महत्व के मद्देनजर इसे चार लेन चौड़ा करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का अनुरोध करते हुए योजना आयोग से प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना व केन्द्रीय सड़क निधि के अन्तर्गत पर्याप्त सहायता राशि प्रदान करने का अनुरोध किया । उन्होंने बताया कि १२वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत राज्य में १०० से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए ७,५०० किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण किया जाएगा तथा २,००० किलोमीटर के राष्ट्रीय उच्च मार्ग के अतिरिक्त वर्तमान सड़कों के पर्याप्त रख-रखाव एवं पुलों तथा सुरंगों का निर्माण किया जाएगा तथा इसके लिए केन्द्र से पर्याप्त सहायता राशि का अनुरोध किया ।उन्होंने बताया कि योजना के अन्तर्गत राज्य की १०,७२५ शेष बची सभी बस्तियों की पेयजल सुविधा प्रदान की जाएगी तथा बताया कि राष्ट्रीय ५५ लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश में ७० लीटर प्रति व्यक्ति पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी । मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य की कुल २३,००० मैगावाट जल विद्युत क्षमता में से ८,३६८ मैगावाट क्षमता का दोहन कर लिया गया है तथा १२वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत अतिरिक्त ४,६३० मैगावाट जल विद्युत क्षमता के दोहन का लक्ष्य रखा गया है । उन्होंने राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं को तत्काल पर्यावरण अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया । मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने बद्दी से कालका तथा बिलासपुर से लेह वाया मनाली रेलवे लाईन को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने की मांग करते हुए नंगल-तलवाड़ा तथा भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाईन के निर्माण कार्य को तेजी से कार्यान्वित करने का अनुरोध किया । उन्होंने राज्य में उत्तरी-पूर्वी राज्यों की तर्ज पर हैली-टैक्सी पर उपदान प्रदान करने की मांग करते हुए राज्य में वायु सेवाएं बहाल करने का अनुरोध किया तथा शिमला हवाई पट्टी को सुदृढ़ करने की मांग की । वीरभद्र सिंह ने हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में एल०पी०जी० सिलेण्डरों पर सबसिडी को जारी रखने की मांग करते हुए कहा कि उपदान समाप्त किये जाने से लकड़ी के ईंधन की मांग बढ़ेगी जिससे वानिकी संसाधनों का दोहन बढ़ जाएगा ।उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत शिशु मृत्यु दर को ४० से २२ तथा शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव को सुनिश्चित किया जाएगा । उन्होंने टाण्डा मैडिकल कालेज को अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) की तर्ज पर विकसित करने का अनुरोध किया तथा कहा कि योजना के अन्तर्गत प्रदेश में ३ मैडिकल कालेज खोले जायेंगे ।मुख्यमंत्री ने विशेष श्रेणी के सभी राज्यों को केन्द्रीय संसाधनों के आबंटन में ९०:१० के अनुपात में समरूपता लाने का अनुरोध करते हुए सभी केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं के युक्तिकरण की मांग की तथा इसके मापदण्डों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लचीला बनाने का अनुरोध किया ।उन्होंने राज्य के चार जिलों को सीधी सबसिडी प्रदान करने की योजना में कवर करने के लिए केन्द्र सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि राज्य की ६८.५६ लाख जनसंख्या में से ५१.३४ लाख व्यक्तियों को आधार कार्ड में सम्मिलित किया गया है तथा शीघ्र ही पूरी जनसंख्या को इस योजना में लाभान्वित किया जाएगा ।]