Monday, 20 July 2026

 

 

खास खबरें डॉ. जितेंद्र सिंह ने अदालती मामलों में कमी लाने और पेंशनभोगियों के बेहतर कल्याण के लिए पेंशन नियमों में सुधार का आह्वान किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में मृतक के परिवार ने न्याय की मांग की एलपीयू प्लेसमेंट 2025-26: 2,000 से ज़्यादा छात्रों को ₹10 लाख से ज़्यादा के ऑफ़र मिले जीवनजोत कौर ने न्यू अमृतसर के 7 एकड़ पार्क में आधुनिक खेल अवसंरचना निर्माण कार्यों का किया शुभारंभ मान सरकार का संपत्ति पंजीकरण की भाषा को आम लोगों के लिए सरल बनाने का ऐतिहासिक निर्णय : जीवनजोत कौर जेपी नड्डा ने सीजेपी से बातचीत के बाद विरोध खत्म करने की अपील की यादों में सज्जाद हुसैन : हिंदुस्तानी सुरों में 'अरबी रंग' घोलने वाले उस्ताद, लता मंगेशकर भी थीं मुरीद डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री तीर्थ स्थान यात्रा योजना के तहत श्री हरिमंदिर साहिब एवं अन्य धार्मिक स्थलों के लिए रवाना फारूक अब्दुल्ला ने की जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल करने के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई जय कृष्ण सिंह रौड़ी ने गांव पदराना में किया डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉल का शिलान्यास पंजाब को लगी नजर, 2027 में कांग्रेस ही उतारेगी: दिनेश बस्सी सीजेपी सदस्यों ने जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर नीट मामले पर रखी मांगें द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा के दौरे पर भारत के साथ मोल्दोवा के संबंध आजादी और सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित : माइया सैंडू ओ.एस.डी. सुखवीर सिंह ने धूरी में लोगों की समस्याएं सुनीं भारत और मोल्दोवा व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन में सहयोग को मजबूत बनाने पर सहमत ओ.एस.डी. सुखवीर सिंह की उपस्थिति में गांव ढढोगल के बड़ी संख्या में परिवार आम आदमी पार्टी में हुए शामिल भारतीय सेना ने असम बाढ़ राहत के लिए 'ऑपरेशन जल राहत' शुरू किया द्रौपदी मुर्मु ने माइया सैंडू से की मुलाकात बरिंदर गोयल ने नीट-2026 के जिला टॉपर अर्नव जिंदल को किया विशेष सम्मानित मान सरकार द्वारा महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा पर 298 करोड़ रुपये खर्च : डॉ. बलजीत कौर

 

गोपालदास 'नीरज': दर्द को गीतों में पिरोकर अमर हो गए शब्दों के जादूगर

Music
Listen to this article

Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

नई दिल्ली , 18 Jul 2026

Last updated on: Jul 18, 2026, 15:17 IST

4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में जन्मे गोपालदास सक्सेना उर्फ 'नीरज' का शुरुआती जीवन तंगहाली में गुजरा। मात्र 6 वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। घर का चूल्हा जलाने के लिए उन्होंने पेट की खातिर गंगा नदी में गोता लगाकर श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए सिक्के बटोरे, गलियों में घूम-घूमकर बीड़ी-सिगरेट बेची और यहां तक कि दीवारों पर फिल्मों के पोस्टर भी चिपकाए।

उन्होंने शायद ही कभी सोचा होगा कि एक दिन उन्हीं फिल्मी पोस्टरों पर उनका नाम बतौर देश के सबसे बड़े गीतकार सुनहरे अक्षरों में चमकेगा।  तमाम आर्थिक झंझावातों के बावजूद उनकी पढ़ाई का शौक जिंदा रहा। 1942 में प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल पास करने के बाद उन्होंने कचहरी में टाइपिस्ट और क्लर्क का काम करते हुए अपनी शिक्षा जारी रखी तथा 1953 में हिंदी साहित्य से एमए की डिग्री हासिल की।

इसी दौरान, उनका पहला काव्य-संग्रह 'संघर्ष' प्रकाशित हुआ, जिसने साहित्य जगत में उनकी उपस्थिति दर्ज कराई। 23 वर्ष की आयु में उन्हें एक संपन्न घराने की लड़की से मोहब्बत हो गई, लेकिन कठोर सामाजिक बंधनों के कारण वे एक न हो सके। यह व्यक्तिगत त्रासदी उनके साहित्यिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई।

सुबह जब अपने एक दोस्त की छत से उन्होंने अपनी प्रेमिका की विदा होती डोली देखी, तो उन्होंने एक ऐसा गीत लिखा जो हिंदी साहित्य और संगीत का मील का पत्थर बन गया। वह गीत था, "स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे, कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे।"

व्यक्तिगत दुख को सार्वभौमिक दर्शन में बदलने वाला यह गीत जब रेडियो पर प्रसारित हुआ, तो इसने गोपालदास नीरज को रातोंरात पूरे देश का चहेता बना दिया। अध्यापन के क्षेत्र में कदम रखते हुए उन्होंने मेरठ कॉलेज में पढ़ाया, लेकिन प्रशासन द्वारा लगाए गए 'रोमांस' और कक्षाएं न लेने के झूठे आरोपों से आहत होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

इसके पश्चात 1956 में वे अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में प्रोफेसर बन गए और अलीगढ़ ही उनका स्थायी ठिकाना बन गया। कवि सम्मेलनों में उनकी बढ़ती लोकप्रियता ने मायानगरी का ध्यान खींचा और निर्देशक आर चंद्रा उन्हें बम्बई ले आए। फिल्मों में उनके आगमन ने फिल्मी गीतों को एक नई साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

यह एक ऐसा दौर था जब उनके रचित गीत सीधे श्रोताओं की आत्मा में उतर जाते थे। प्रसिद्ध फिल्मी गीतों में नई उमर की नई फसल (1965) का 'कारवां गुजर गया' रोशन के संगीत और मोहम्मद रफी की आवाज में है। कन्यादान (1968) का 'लिखे जो खत तुझे' शंकर-जयकिशन और रफी का गीत है। मेरा नाम जोकर (1970) का 'ए भाई जरा देख के चलो' शंकर-जयकिशन एवं मन्ना डे ने प्रस्तुत किया।

प्रेम पुजारी (1970) का 'फूलों के रंग से' एसडी बर्मन के संगीत में किशोर कुमार ने गाया। देव आनंद गोपालदास 'नीरज' के इतने बड़े प्रशंसक बन गए कि उन्होंने उनको महान संगीतकार एसडी बर्मन से मिलवाया। फिल्म 'कन्यादान' का सदाबहार गीत 'लिखे जो खत तुझे' गोपालदास 'नीरज' ने महज 6 मिनट में रचा था। 'मेरा नाम जोकर' के दर्शन से भरे गीत ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया।

1971 में जयकिशन की मृत्यु, रोशन लाल नागरथ का जाना, और 1975 में एसडी बर्मन के निधन ने गोपालदास 'नीरज' को तोड़ दिया। बम्बई की बदलती व्यावसायिक और सतही हवा उन्हें रास नहीं आई। वे अपनी मशहूर पंक्तियां 'इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में...' गुनगुनाते हुए हमेशा के लिए वापस अलीगढ़ लौट आए।

उनके इस अद्वितीय भाषाई और काव्यात्मक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 1994 में यश भारती पुरस्कार से नवाजा। 19 जुलाई, 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में इस महान गीत-ऋषि ने अपनी अंतिम सांस ली। उन्होंने अपना पार्थिव शरीर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को चिकित्सा शोध के लिए दान कर दिया था।

 

Tags: Music

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD