Friday, 17 July 2026

 

 

खास खबरें विभाजन कांग्रेस की नीतियों का परिणाम, विस्थापित परिवारों और सिखों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान : सीएम योगी आदित्यनाथ लोकायुक्त ने कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट सौंपी नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में ₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कजाकिस्तान एक्सपोजर विजिट पर गए आईटीआई विद्यार्थियों से बातचीत की भारत सरकार लुधियाना में सीनियर सिटिज़न्स और दिव्यांगजनों को मुफ़्त असिस्टिव डिवाइस बांटने के लिए स्पेशल सोशल एम्पावरमेंट कैंप लगाएगी: सुखविंदर सिंह बिंद्रा शहंशाह-ए-गजल : बंटवारे का दर्द, मैकेनिक की नौकरी और रियाज का जुनून, ऐसी थी मेहदी हसन की संघर्ष भरी कहानी स्लीमनाबाद टनल से 1450 गांवों की ढाई लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई : सीएम मोहन यादव इस हफ्ते ने ऐसा इक्का चलाया कि धमाल ही मच गया : संजीदा शेख 'आदर्श बाल विद्यालय' में सख्त शिक्षक बनेंगे अभिमन्यु सिंह, बोले- 'डर नहीं, जिंदगी के लिए तैयार करना ही असली अनुशासन' ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा ऐलान, 2592 युवाओं को मिलेगी नौकरी बागवानों को सेब खरीद बकाया भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये जारी: सुखविन्द्र सिंह सुक्खू कोमल मित्तल ने एसआईआर-2026 के तहत एन्यूमरेशन फॉर्मों का 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन करने वाले बीएलओ का किया सम्मान बादल का 'धर्म युद्ध मोर्चा' का ऐलान पंजाबियों को गुमराह करने के लिए सिर्फ़ एक राजनीतिक ड्रामा है: बलतेज पन्नू ₹257.32 करोड़ की लागत से जालंधर–होशियारपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास का रास्ता साफ भारतीय शेयर बाजार शानदार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद, सेंसेक्स में 965 अंकों की तेजी, निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत कुलवंत सिंह की अगुवाई में 3 बसें रवाना लीवर रोगियों के लिए बड़ी राहत, पारस हेल्थ पंचकूला में शुरू हुआ एकीकृत लीवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम एनसीडब्‍ल्‍यू ने वर्कप्लेस सेफ्टी को मज़बूत करने के लिए नेशनल पॉश एक्ट अवेयरनेस प्रोग्राम शुरू किया गणना प्रपत्र भरने और जमा कराने के लिए 19 जुलाई को सभी मतदान केंद्रों पर एक दिवसीय एसआईआर विशेष शिविर लगाया जाएगा : अनिंदिता मित्रा "इस बरस सावन में अजब बात हुई... नोटों की बरसात हुई!" पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा को 14 हजार करोड़ की सौगातें दी यूएसएमएस और ऑफशोर मार्केटर्स के बीच इंडस्ट्री एक्सपोजर के लिए एमओयू

 

शहंशाह-ए-गजल : बंटवारे का दर्द, मैकेनिक की नौकरी और रियाज का जुनून, ऐसी थी मेहदी हसन की संघर्ष भरी कहानी

Music, Mehdi Hassan
Listen to this article

Armaan

Armaan

5 Dariya News

मुंबई , 17 Jul 2026

Last updated on: Jul 17, 2026, 17:42 IST

गजल की दुनिया में शहंशाह-ए-गजल कहलाने वाले मेहदी हसन ने अपनी आवाज से करोड़ों लोगों को दीवाना बनाया। उन्होंने हौसले और मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की। एक वक्त ऐसा था, जब वह परिवार का पेट पालने के लिए साइकिल की दुकान पर काम किया करते थे। इन मुश्किल हालातों में भी उन्होंने संगीत से अपना रिश्ता कभी खत्म नहीं होने दिया और आखिरकार गजल की दुनिया के सबसे बड़े नामों में शामिल हो गए।

मेहदी हसन का जन्म 18 जुलाई 1927 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहां संगीत पीढ़ियों से मौजूद था। उनके पिता उस्ताद अजीम खान और चाचा उस्ताद इस्माइल खान बड़े कलाकार थे। उन्हें बचपन से ही संगीत का माहौल मिला और महज 8 साल की उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया था।

कम उम्र में ही उन्होंने शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीख ली थीं। 18 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते मेहदी हसन ध्रुपद, ठुमरी और खयाल गायकी में काफी निपुण हो चुके थे। जब उनका करियर आगे बढ़ने वाला था, तभी देश के बंटवारे ने उनकी जिंदगी बदल दी। साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद मेहदी हसन परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए।

नई जगह पर शुरुआत करना आसान नहीं था। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे समय में मेहदी हसन ने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए साइकिल की दुकान पर मैकेनिक का काम शुरू किया, लेकिन संगीत के प्रति अपना जुनून कभी कम नहीं होने दिया।

दिन में वह काम किया करते थे और रात को रियाज करते थे। यही रियाज आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। करीब दस साल तक संघर्ष करने के बाद साल 1957 में उन्हें रेडियो पाकिस्तान पर गाने का मौका मिला। शुरुआत में उन्होंने ठुमरी गाकर पहचान बनाई, लेकिन जल्द ही उन्होंने गजल गायकी की ओर रुख किया।

उनकी शास्त्रीय संगीत की समझ और शब्दों को महसूस करके गाने की शैली ने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दी। देखते ही देखते मेहदी हसन गजल की दुनिया का बड़ा नाम बन गए। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तानी फिल्मों के लिए भी कई यादगार गीत गाए। उनकी लोकप्रियता सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया में उनके फैंस बन गए। 

उनकी गाई हुई गजलें 'रंजिश ही सही', 'गुलों में रंग भरे', 'अब के हम बिछड़े तो शायद', 'दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है' और 'मोहब्बत करने वाले कम न होंगे' आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। मेहदी हसन की आवाज के मुरीद भारत के भी कई बड़े कलाकार थे। महान गायिका लता मंगेशकर ने उनकी गायकी की तारीफ करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है जैसे मेहदी हसन साहब के गले में भगवान बोलते हैं।

जगजीत सिंह समेत कई बड़े गायकों ने उन्हें अपना प्रेरणास्रोत माना। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। पाकिस्तान सरकार ने उन्हें प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस, तमगा-ए-इम्तियाज, हिलाल-ए-इम्तियाज और निशान-ए-इम्तियाज जैसे सम्मानों से नवाजा। भारत में उन्हें साल 1979 में केएल सहगल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

नेपाल सरकार ने भी उन्हें गोरखा दक्षिणा बाहु सम्मान दिया। मेहदी हसन का निधन 13 जून 2012 को कराची में हुआ। बीमारी के कारण उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है।

 

Tags: Music , Mehdi Hassan

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD