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शिवराज सिंह चौहान ने की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कॉन्क्लेव में सहभागिता

देश हमें सब कुछ देता है, हम भी कुछ देना सीखें– श्री शिवराज सिंह चौहान

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नई दिल्ली , 15 Jul 2026

Last updated on: Jul 16, 2026, 12:20 IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित “कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव 2026” में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएसआर को भारतीय परंपरा की ट्रस्टीशिप भावना से जोड़ते हुए कहा कि देश हमें सब कुछ देता है, इसलिए कॉर्पोरेट जगत अपनी कमाई का हिस्सा किसानों, कृषि अनुसंधान और ग्रामीण समाज के हित में समर्पित कर देश के विकास में साझेदार बने।

उन्होंने जोर देकर कहा कि रिसर्च लैब में कैद न रहे, बल्कि “विज्ञान से किसान तक” का पुल बने, ताकि जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य, पोषण-सुरक्षित भोजन, कृषि कौशल विकास और महिला किसानों की उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सीएसआर निवेश से वास्तविक जमीन स्तर पर बदलाव दिखे।

सीएसआर को ‘ट्रस्टीशिप’ की भावना से जोड़ा

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कॉन्क्लेव एक ऐसा समागम है जिसमें कॉर्पोरेट जगत, मंत्री, वैज्ञानिक, अधिकारी और किसान सभी एक ही मंच पर जुड़े हैं, जैसे कृषि के लिए एक कम्पलीट वैल्यू चेन बन गई हो। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा कि जिनके पास अधिक धन है, वे उसके मालिक नहीं, बल्कि ट्रस्टी हैं और वह धन मूलतः समाज का धन है।

सीएसआर की भावना यही है कि जो कुछ भी उद्योग, व्यापार और कंपनियां अर्जित करती हैं, उसका एक हिस्सा देश और जनता के हित में स्वेच्छा से समर्पित किया जाए। उन्होंने साफ किया कि सरकार की सोच संसाधन छीनने की नहीं, बल्कि क्षमता और टैलेंट को अवसर देने की है, ताकि उद्यमी धन कमाएँ और फिर उसी धन का हिस्सा समाज, किसान और कृषि–संबंधित नवाचारों पर निवेश करें। श्री चौहान ने कहा कि कई उद्योगपति बिना किसी कानून के भी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा लोककल्याण में लगाते हैं, और अब सीएसआर कानून के माध्यम से इस भावना को संस्थागत रूप दिया गया है।

“विज्ञान से किसान तक” – रिसर्च को लैब से खेत तक ले जाने की बात

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि नए–नए रिसर्च लैब में ही न रह जाएँ, बल्कि सीधे किसान के खेत तक पहुंचें। उन्होंने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों को किसान के बीच जाकर नई कृषि पद्धतियों, नई किस्मों और अनुसंधान की जानकारी देने का लक्ष्य रखा गया। उनका स्पष्ट कहना रहा कि “विज्ञान से किसान तक” की यात्रा तेज करनी होगी और इसमें कॉर्पोरेट जगत का सहयोग निर्णायक हो सकता है।

जूट क्षेत्र के उदाहरण देते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले रेशा निकालने के लिए 25 दिन तक पानी में भिगोकर रखना पड़ता था, जिससे कई जगह पानी की कमी और खराब क्वालिटी की समस्या आती है, जबकि टेक्नोलॉजी के उपयोग से अब ऐसी मशीनें विकसित हुई हैं जो कम समय में बेहतर रेशा निकालने में मदद कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी मशीनों का जल्दी से जल्दी कमर्शियलाइजेशन हो, ताकि किसान तक यह तकनीक पहुंचे, यह काम अकेला सरकारी सेक्टर नहीं कर सकता, इसमें प्राइवेट सेक्टर की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

क्लाइमेट–रेजिलिएंट, हेल्दी और टिकाऊ कृषि की दिशा में साझेदारी

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कॉन्क्लेव के दौरान रखे गए पाँच थीम्स की चर्चा करते हुए कहा कि कृषि को जलवायु अनुकूल बनाना, मृदा स्वास्थ्य बचाना, किसानों की आय और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित करना और पोषण–समृद्ध, ऋतु–अनुकूल भोजन की संस्कृति को बढ़ाना, आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन घटने, बिना परीक्षण के उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से हो रही क्षति पर चिंता जताई और कहा कि मिट्टी बचेगी तो भूस भी बचेगा, इसलिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसे प्रयासों को सीएसआर के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है।

"फूड एस मेडिसिन" की भारतीय अवधारणा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि खाने के लिए मत जियो, बल्कि जीवन के लिए जो जरूरी है वही खाओ– मौसमी, संतुलित और स्वास्थ्यकारी भोजन। कैंसर जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने साफ कहा कि उत्पादन–सुधार के साथ–साथ हमें यह भी देखना होगा कि हमारी खेती से निकलने वाला भोजन लोगों के स्वास्थ्य को मजबूत करे, न कि कमजोर।

स्टार्टअप, ड्रोन पायलट, एग्री–टेक और महिला किसान पर फोकस

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने सीएसआर के माध्यम से कृषि को स्ट्रेंथन करने के कई रास्ते गिनाए– एग्री–टेक स्टार्टअप्स को समर्थन, खेती से जुड़े ट्रेनिंग संस्थानों को सहयोग, ड्रोन पायलटों की क्षमता निर्माण, एग्री–बिजनेस लीडर्स और फूड प्रोसेसर तैयार करने जैसे क्षेत्रों में निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कई बार युवा अगर अच्छा अवसर मिले तो खेती छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि आधुनिक कृषि और एग्री–उद्यमिता को अपनाना चाहते हैं; सीएसआर इन युवाओं को नए मौके दे सकता है।

महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की चर्चा करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ड्रोन दीदी से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के एसएचजी आज कृषि–आधारित उत्पादों में नई क्रांति करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से आग्रह किया कि महिला किसानों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को सीएसआर योजनाओं में खास स्थान दिया जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और मजबूत हो।

उद्योग जगत से व्यापक कमिटमेंट की अपेक्षा

कॉन्क्लेव के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने देश के विकास के लिए अपने–अपने आश्वासन और प्रतिबद्धताएँ रखीं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने सराहा लेकिन साथ ही कहा कि कमिटमेंट तो सबके आने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि कानून के तहत 2% सीएसआर का प्रावधान है, पर इसे सिर्फ कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक धर्म समझना चाहिए।

श्री चौहान ने कहा कि जीना उसका जीना है, जो औरों को जीवन देता है और हम सब अपनी मेहनत की कमाई से दूसरों को जीवन देने वाले बनें, यही इस कार्यक्रम की आत्मा है। भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, NASC कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में आयोजित ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026 में कॉर्पोरेट, वैज्ञानिक, नीति–निर्माता और किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच मुख्य सत्र में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ही केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

 

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