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क्या लो ब्लड प्रेशर से बढ़ता है अल्जाइमर का खतरा? 8 लाख लोगों पर हुई रिसर्च में बड़ा खुलासा

Health, Study, Research, New Delhi
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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

नई दिल्ली , 27 Jun 2026

Last updated on: Jun 27, 2026, 15:21 IST

अल्जाइमर रोग को आमतौर पर दिमाग से जुड़ी बीमारी माना जाता है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह दुनिया भर में डिमेंशिया का सबसे बड़ा कारण है और करोड़ों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। हालांकि अब तक इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक लगातार इसके कारणों और रोकथाम के तरीकों पर शोध कर रहे हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सिर्फ हाई ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) भी अल्जाइमर रोग से जुड़ा हो सकता है। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल दोनों स्थितियों के बीच संबंध दर्शाता है, यह साबित नहीं करता कि लो ब्लड प्रेशर सीधे तौर पर अल्जाइमर का कारण बनता है।

अध्ययन में मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लगभग 8 लाख लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसके लिए ब्रिटेन के यूके बायोबैंक और अमेरिका के 'ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम' के डेटा का उपयोग किया गया। दोनों डेटाबेस में शामिल करीब 8 लाख प्रतिभागियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के आधार पर शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर और हृदय संबंधी 11 अलग-अलग बीमारियों के बीच संबंधों की जांच की।

शोध में पाया गया कि अधिकांश हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का संबंध अल्जाइमर से था। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लो ब्लड प्रेशर का संबंध सबसे मजबूत और लगातार दोनों समूहों में देखने को मिला। यह निष्कर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक अल्जाइमर के संदर्भ में लो ब्लड प्रेशर पर अपेक्षाकृत कम शोध हुए हैं।

आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को ही हृदय रोग और स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है। अध्ययन में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और सेरेब्रल इन्फार्क्शन यानी स्ट्रोक के एक प्रकार का भी अल्जाइमर से मजबूत संबंध पाया गया। वहीं, शोधकर्ताओं को हार्ट अटैक (एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) और अल्जाइमर के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।

वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक (जेनेटिक) स्तर पर भी विश्लेषण किया और पाया कि कुछ जीन, विशेष रूप से एपीओई और एमएपीटी, अल्जाइमर और हृदय संबंधी समस्याओं दोनों से जुड़े हो सकते हैं। ये जीन पहले से ही मस्तिष्क के कार्य और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बहुत कम रहता है तो मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते।

इससे समय के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। एक अन्य संभावना यह भी है कि लो ब्लड प्रेशर और अल्जाइमर दोनों के पीछे कुछ समान जैविक प्रक्रियाएं काम करती हों, जिन्हें अभी पूरी तरह समझा नहीं जा सका है। कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि लो ब्लड प्रेशर शुरुआती न्यूरोडीजेनेरेटिव बदलावों का संकेत हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उनके निष्कर्षों को कारण और परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि लो ब्लड प्रेशर अल्जाइमर पैदा करता है। इस संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए आगे और क्लीनिकल तथा जैविक अध्ययन आवश्यक हैं।

 

Tags: Health , Study , Research , New Delhi

 

 

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