भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय हितधारक संवाद कार्यक्रम आयोजित कर पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, उद्योग संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों और सरकारी अधिकारियों को देश के तेजी से विस्तारित हो रहे मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क से मिलने वाले निर्यात अवसरों की जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र की निर्यात क्षमता को नए वैश्विक बाजारों तक पहुंचाकर व्यापारिक उपलब्धियों में बदलना था।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अतिरिक्त सचिव नितिन यादव, एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव, वाणिज्य मंत्रालय की निदेशक मोनिका गौर तथा एपीडा के क्षेत्रीय प्रमुख हरप्रीत सिंह उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा) वर्ष 2014-15 के 468 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
इसी अवधि में सेवा निर्यात 158 अरब डॉलर से बढ़कर 421 अरब डॉलर हो गया, जबकि गैर-पेट्रोलियम निर्यात 387.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। बैठक में बताया गया कि भारत द्वारा हाल के वर्षों में किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों—भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-यूरोपीय संघ एफटीए, भारत-मॉरीशस सीईसीपीए और भारत-यूएई सीईपीए—ने भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों के द्वार खोल दिए हैं।
भारत के नौ एफटीए अब 38 देशों को कवर करते हैं, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच प्रदान करते हैं। मंत्रालय ने जानकारी दी कि नए एफटीए के तहत वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच उपलब्ध होगी।
पंजाब के लिए वस्त्र, इंजीनियरिंग, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं, जबकि हरियाणा के लिए बासमती चावल, भैंस का मांस, गैर-बासमती चावल, प्राकृतिक शहद, डेयरी उत्पाद तथा खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद प्रमुख निर्यात अवसरों के रूप में उभर रहे हैं। बैठक में पंजाब और हरियाणा में विकसित निर्यात अवसंरचना की भी जानकारी दी गई।
पंजाब में अमृतसर हवाई अड्डे पर पैकहाउस एवं गुणवत्ता अनुपालन सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जबकि हरियाणा में बासमती.नेट और हॉर्टीनेट प्रणालियों को एकीकृत कर अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित की गई है। अधिकारियों ने क्षेत्र की उल्लेखनीय निर्यात उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। इनमें अबोहर से सिंगापुर और रूस को किन्नू निर्यात, डेराबस्सी से दक्षिण कोरिया को रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न का पहला निर्यात, पठानकोट से कतर और यूएई को लीची, संगरूर से कनाडा को मूल्यवर्धित बाजरा उत्पाद, हरियाणा से मेडागास्कर को फोरेज्ड राइस कर्नेल तथा सोनीपत के अटेरना गांव से कनाडा को सोया चाप का पहला एफपीओ निर्यात शामिल है।
हितधारकों को केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) योजना की भी जानकारी दी गई, जिसे 25,060 करोड़ रुपये के बजट के साथ छह वर्षों के लिए मंजूरी दी गई है। इस मिशन के तहत एमएसएमई इकाइयों को व्यापार वित्त, निर्यात ऋण, गुणवत्ता अनुपालन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार पहुंच और लॉजिस्टिक्स सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम में मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, किसानों, एफपीओ और एमएसएमई इकाइयों से उत्पाद-विशिष्ट निर्यात तैयारी योजनाएं बनाने, एपीडा की वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठाने तथा नए एफटीए ढांचे का अधिकतम उपयोग कर वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का आह्वान किया। मंत्रालय ने कहा कि यह पहल ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।