चप्पड़चिड़ी के ऐतिहासिक मैदान में बने हाल में मुख्य रूप से पहुंचे कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, जबकि बाबा बंदा सिंह बहादुर अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन चंडीगढ़ के प्रधान हरिंदर सिंह हंस और बूटा सिंह बैरागी एडवोकेट जनरल सचिव फाउंडेशन की अगुवाई में विशाल फतेह मार्च का भव्य स्वागत हार पहनाकर, फूलों की वर्षा कर, लड्डू बांटकर तथा फतेह के जयकारों की गूंज के बीच किया गया।
इस समय रकबा भवन से चप्परचिड़ी तक भव्य फतेह मार्च का नेतृत्व करने वाले फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कुमार बावा, फतेह मार्च इंचार्ज इकबाल सिंह गिल (रिटायर्ड आईपीएस), फतेह मार्च कन्वीनर जसवंत सिंह छापा, सरपरस्त मलकीत सिंह दाखा, सोनिया अरोड़ा सचिव फाउंडेशन, सह-कन्वीनर तरनजीत सिंह निमाणा तथा निहंग मुखी बलविंदर सिंह तरना दल, जो पवित्र पालकी की सेवा और घोड़ों सहित गुरदास नंगल गढ़ी से हर वर्ष की तरह निहंग सिंह फौजों के साथ रकबा भवन से अगुवाई करते हुए पहुंचे, सभी का आयोजकों ने हार पहनाकर भरपूर स्वागत किया।
निहंग सिंहों ने गतका खेलकर, ढाढी बलदेव सिंह ने बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की वारें गाकर तथा घोड़ों पर करतब दिखाकर खुशियां साझा कीं। यह मार्च रकबा भवन से प्रसिद्ध समाजसेवी एस.पी. सिंह उबराय द्वारा रवाना किया गया तथा और इसमें संत महापुरुषों ने भाग लिया। इस समय कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि कृष्ण कुमार बावा की सरपरस्ती में बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल फाउंडेशन की यह सराहनीय पहल है।
उन्होंने कहा कि बावा ने जसवंत सिंह चप्पा जैसे निस्वार्थ सेवकों को फाउंडेशन के साथ जोड़कर फाउंडेशन के काफिले को और खूबसूरत बनाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के जीवन से जुड़े चार दिन 16 अक्टूबर (जन्म दिवस), 3 दिसंबर (मिलाप दिवस), 12 मई (सरहिंद फतेह दिवस), 9 जून (शहीदी दिवस) मनाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की याद को सरहिंद फतेह दिवस के रूप में मनाते हुए हमें हर घर में बाबा जी की तस्वीर सजानी चाहिए और 14 मई को दीया जलाकर इसे मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने हमें जमीनों का मालिक बनाया और पहले सिख लोक राज की नींव रखी। बाज सिंह को सरहिंद का सूबेदार बनाया गया।
इस समय 11 शख्सियतों को बाबा बंदा सिंह बहादुर मेमोरियल अवार्ड से विशेष तौर पर सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से विश्व प्रसिद्ध आर्टिस्ट आर.एम सिंह, बाबा भुपिन्दर सिंह पटियाला, गुरमीत सिंह बिल, जोरा सिंह चप्पड़चिड़ी, हरिन्दर सिंह हंस, इकबाल सिंह गिल रिटायर्ड. आई.पी.ऐस्स, बिल्ला (मुलतानी ढाबा) लंगर सेवा, रजिन्दर सिंह कुराली (कालम नवीस), कुलविन्दर सिंह चप्पड़चिड़ी, बूटा सिंह बैरागी एडवोकेट, हरप्रीत सिंह बंटी शामिल थे।
इस समय कमलदीप कौर, बीबी राजवीर कौर पूर्व सरपंच, सुरिन्दर सिंह पंच आदि उपस्थित थे। आखिर में बावा ने सभी का शुक्रिया अदा किया और पंजाब सरकार से 9 जून को बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के शहीदी दिवस पर छुट्टी की मांग की।