पढ़ने और सुनने में यह बात थोड़ी अटपटी जरूर लगती है कि ऐसा कैसे हो सकता है। यह असंभव लगता है, लेकिन राजनीति की डिक्शनरी में “असंभव” नाम का कोई शब्द नहीं होता। यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है।
राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने की चर्चा पहले भी होती रही है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा था कि राघव चड्ढा अपने साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी जैसे नेताओं को भी बीजेपी में ले जा सकते हैं? लेकिन आज के राजनीतिक घटनाक्रम ने कई लोगों को चौंका दिया है और आने वाले समय में और भी हैरान करने वाली खबरें सामने आ सकती हैं।
10 महीने का समय और 'ऑपरेशन लोटस' की आहट
पंजाब में वर्तमान में आम आदमी पार्टी के पास प्रचंड बहुमत है। हालांकि, विधानसभा चुनाव में अभी लगभग 10 महीने का समय बाकी है। सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी इतने समय तक इंतजार करेगी? या फिर राघव चड्ढा के नेतृत्व में विधायकों का एक बड़ा धड़ा तोड़कर पंजाब में 'महाराष्ट्र' जैसा खेल दोहराया जाएगा?
अगर ऐसा होता भी है, तो एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या पंजाब के मतदाता किसी हिंदू चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करेंगे?
सबसे बड़ा सवाल: क्या पंजाब को मिलेगा हिंदू मुख्यमंत्री?
इतिहास पर नजर डालें तो 1966 से पहले पंजाब ने कई हिंदू मुख्यमंत्री देखे, लेकिन उसके बाद से आज तक राज्य की कमान हमेशा एक सिख चेहरे के पास ही रही है।
चुनौती: क्या पंजाब के मतदाता 2026-27 में एक हिंदू चेहरे (राघव चड्ढा या सुनील जाखड़) को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करेंगे?
बीजेपी की दुविधा: बीजेपी के पास सुनील जाखड़ के रूप में एक जमीन से जुड़ा कद्दावर हिंदू नेता पहले से मौजूद है। लेकिन पंजाब की डेमोग्राफी और धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए क्या बीजेपी किसी हिंदू चेहरे पर दांव लगाएगी या अंततः उसे किसी सिख चेहरे की ही तलाश करनी पड़ेगी?
बिक्रम मजीठिया और भविष्य की संभावनाएं
बीजेपी के पास एक मजबूत नेता सुनील जाखड़ भी हैं, जो पंजाब से ही आते हैं, लेकिन वे भी हिंदू चेहरा हैं। ऐसे में यह सवाल बना रहता है कि क्या आने वाले समय में कोई हिंदू चेहरा मुख्यमंत्री बनेगा या बीजेपी को एक सिख चेहरा सामने लाना पड़ेगा।राजनीति संभावनाओं का खेल है। यूं तो कहने को कैप्टन अमरिंदर सिंह, जो पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, बीजेपी के पास एक मजबूत सिख चेहरा हैं, लेकिन काफी समय से वह राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। अगर यह कहा जाए कि भविष्य में बिक्रम सिंह मजीठिया भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं (यह केवल कयास है), तो यह भी असंभव नहीं कहा जा सकता।
भगवंत मान की लोकप्रियता: बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती
इन तमाम अटकलों के बीच एक सच्चाई यह भी है कि यह भी सच है कि पिछले चुनाव में पंजाब के मतदाताओं ने एक सिख चेहरे भगवंत मान को मुख्यमंत्री बनाया और आज भी वे एक लोकप्रिय और जमीनी नेता के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए पंजाब की राह आसान नहीं होने वाली है।
यह विश्लेषण महज कयासों पर आधारित है और भविष्य में गलत भी साबित हो सकता है।”