पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने “75 इयर्स ऑफ चंडीगढ़: ऑनरिंग इंडियन मॉडर्निस्ट्स ऑफ चंडीगढ़” शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह कार्यक्रम गवर्नमेंट म्यूज़ियम एंड आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ में आयोजित किया गया।
शहर की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन द्वारा किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए प्रशासक ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि चंडीगढ़ आधुनिक भारत की दृष्टि और नियोजित विकास का प्रतीक है।
उन्होंने शहर के विशिष्ट चरित्र को बनाए रखने में प्रशासन की भूमिका की सराहना की और कहा कि योजनाबद्ध विकास, स्वच्छता, हरित क्षेत्र और बेहतर नागरिक अवसंरचना ने चंडीगढ़ को विशिष्ट पहचान दी है। वर्ष 1951 में विकास प्रारंभ होने से अब तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ संतुलित शहरी जीवन का वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है और सतत तथा भविष्य उन्मुख विकास के साथ इसकी विरासत को संरक्षित रखना आवश्यक है।
प्रशासक ने कहा कि भारतीय वास्तुकारों, इंजीनियरों और प्रशासकों ने शहर की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य उनके अमूल्य योगदान को सम्मान देना और उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
जनभागीदारी पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के नागरिकों ने भी शहर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 2026 से 2028 तक प्रस्तावित कार्यक्रमों में संस्थानों, युवाओं और नागरिकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
इस अवसर पर शहर की योजना और विकास में योगदान देने वाले भारतीय आधुनिकतावादियों के प्रथम समूह के 12 व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। अधिकांश व्यक्तित्वों के दिवंगत होने के कारण उनके परिजनों ने सम्मान ग्रहण किया, जबकि वरिष्ठ वास्तुकार एस.डी. शर्मा ने व्यक्तिगत रूप से सम्मान प्राप्त किया।
समारोह में चंडीगढ़ की वास्तुकला, हरित आवरण और नियोजित अवसंरचना को संरक्षित रखते हुए स्मार्ट पहल, सतत विकास और नागरिक सहभागिता को मजबूत करने पर बल दिया गया। प्रशासक ने वर्ष 2025 में स्थापित चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन की भूमिका का भी उल्लेख किया, जो विभिन्न पहलों के माध्यम से विरासत संरक्षण, समावेशिता और सतत जीवनशैली को बढ़ावा दे रहा है।
कार्यक्रम का समापन चंडीगढ़ की विरासत को संरक्षित करने तथा इसे एक आदर्श नियोजित शहर के रूप में सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों और जन-जागरूकता बढ़ाने के आह्वान के साथ हुआ।