सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने सदन में बताया राज्य में पक्की नहरों के रि-मॉडलिंग व पुनर्निर्माण के लिए नहर का कम से कम 20 वर्ष पुराना होना अनिवार्य है और 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त होना चाहिए। ऐसे मामलों में जल उपयोगकर्ता संघों को पुनर्निर्माण कार्य की कुल लागत का 1 प्रतिशत योगदान देना अनिवार्य है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष परिस्थितियों में 15 वर्ष से अधिक पुराने खालों जो 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त हो उन पर भी पुनर्निर्माण के लिए विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में जल उपयोगकर्ता संघों को पुनर्निर्माण कार्य की कुल लागत का 25 प्रतिशत योगदान देना अनिवार्य है।
मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने यह जानकारी विधायक जस्सी पेटवाड़ व विधायक रणधीर पनिहार के सवाल का जवाब देते हुए दी।