रयात बाहरा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (यू.एस.ए.एस.) द्वारा विश्वविद्यालय के एन.एस.एस. विभाग के सहयोग से “स्टार्टअप्स, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में जेंडर डिविडेंड को अनलॉक करना” विषय पर एक जानकारीपूर्ण और प्रेरणादायक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम, विशेष रूप से कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में उभरते अवसरों के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
इस आयोजन ने फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों को एक मंच पर एकत्रित किया, ताकि वे यह समझ सकें कि नवाचार और जेंडर समावेशन किस प्रकार सतत विकास और आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ की डीन डॉ. (प्रो.) अमिता महाजन द्वारा मुख्य वक्ता नेहा अरोड़ा, मुख्य परिचालन अधिकारी, नॉर्थ ज़ोन एस एंड टी क्लस्टर का हार्दिक स्वागत करने के साथ हुई।
अपने स्वागत संबोधन में डॉ. अमिता महाजन ने युवा विद्यार्थियों में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला तथा उन्हें रचनात्मक और व्यावहारिक विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्य व्याख्यान देते हुए नेहा अरोड़ा ने स्टार्टअप्स, नवाचार और आधुनिक उद्यमिता में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों के साथ महत्वपूर्ण विचार साझा किए कि किस प्रकार वे शोध, रचनात्मकता और प्रभावी योजना के माध्यम से नवाचारी विचारों को सफल उद्यमों में बदल सकते हैं। साथ ही, उन्होंने युवा उद्यमियों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी पहलों और सहायता प्रणालियों के बारे में भी जानकारी दी।
इस अवसर पर एन.सी.सी./एन.एस.एस. विभाग के निदेशक ए.एस. चहल तथा अन्य फैकल्टी सदस्य भी उपस्थित थे।