पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से 9 से 18 मार्च 2026 तक सामाजिक विज्ञान में दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पीएच.डी. तथा पोस्ट डॉक्टोरल शोधार्थियों की शोध क्षमता को सुदृढ़ करना है।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने सामाजिक विज्ञान में शोध पद्धति के महत्व पर प्रकाश डाला। सह-पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. शंकर लाल बीका ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इस पाठ्यक्रम के लिए देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से लगभग 360 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 60 प्रतिभागियों का चयन किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. रोनकी राम, पूर्व प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए शोध अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोधार्थियों को नवाचारी और समाजोपयोगी शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इस दस दिवसीय पाठ्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान शोध रूपरेखा, गुणात्मक और मात्रात्मक शोध पद्धतियाँ, ग्रंथसूची विश्लेषण, शोध नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शोध में उपयोग तथा वैज्ञानिक लेखन जैसे विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित करेंगे। पहले दिन प्रो. रोनकी राम तथा प्रो. सीमा विनायक, मनोविज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ने सामाजिक विज्ञान में अवधारणा निर्माण, सिद्धांत और संदर्भ तथा परीक्षण उपकरणों के निर्माण के महत्व जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए।
इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रो. संजीव कुमार शर्मा, प्रो. एस. के. सेनापति, प्रो. सतविंदरपाल कौर, प्रो. आर. पी. वढेरा, प्रो. सुनयना खुराना, प्रो. विशाल सूद, प्रो. कुलविंदर सिंह, प्रो. परमजीत सिंह जज सहित अनेक प्रख्यात शिक्षाविद प्रतिभागियों के साथ संवाद करेंगे और अपने अनुभव साझा करेंगे। उद्घाटन सत्र में प्रो. बावा सिंह, प्रो. कन्हैया त्रिपाठी, डॉ. शमशीर सिंह ढिल्लों (अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय), डॉ. सेसदेबा पन्यी तथा शिक्षा विभाग के अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्य–4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की भावना के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवा शोधार्थियों को उन्नत शोध कौशल प्रदान करना और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना है।