Thursday, 04 June 2026

 

 

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डीएसटी–पर्स कार्यक्रम के अंतर्गत पेक में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग एवं एआई-आधारित बायोमेडिकल सेंसर पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए आयोजित

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5 Dariya News

चंडीगढ़ , 27 Feb 2026

Last updated on: Mar 01, 2026, 12:41 IST

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ ने डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भारत सरकार द्वारा समर्थित डीएसटी–पर्स कार्यक्रम के अंतर्गत “एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ऑफ़ इम्प्लांट्स एंड प्रोस्थेटिक्स” तथा “एनालिटिक्स ऑफ़ एआई-इंटीग्रेटेड बायोमेडिकल सेंसर डिवाइसस” विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यानों का सफल आयोजन किया।

इन सत्रों में थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से डॉ. विशाल गुप्ता तथा क्लाउडेमी लैब्स, टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ के संस्थापक श्री अरशदीप बहगा ने अपने विशेषज्ञ विचार साझा किए। कार्यक्रम की गरिमा डीएसटी–पर्स की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (पीआई) प्रो. वसुंधरा सिंह, को-पीआई प्रो. आर. एस. वालिया एवं प्रो. संदीप कुमार की उपस्थिति से और बढ़ी। इस कार्यक्रम का कोर्डिनेशन डॉ. पूनम सैनी एवं डॉ. शिल्पी चौधरी द्वारा किया गया।

अपने व्याख्यान में डॉ. विशाल गुप्ता ने इम्प्लांट्स एवं प्रोस्थेटिक्स के एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इम्प्लांट डिज़ाइन, हड्डियों के फ्रैक्चर के प्रकार, फ्रैक्चर की अवधि, बोन ड्रिल व स्क्रू, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी (एएम्टी), सीएडी से एसटीएल रूपांतरण, 3D प्रिंटिंग के यांत्रिक एवं द्रव यांत्रिकी पहलुओं, सामग्री के अपघटन तथा त्रुटि न्यूनन हेतु इन्फिल पैटर्न पर प्रकाश डाला। साथ ही, हृदय, गर्भाशय, ब्रेसेज़, घुटने की टोपी आदि में 3D प्रिंटिंग के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी प्रस्तुत किया।

दूसरे सत्र में श्री अरशदीप बहगा ने एआई-इंटीग्रेटेड बायोमेडिकल सेंसर उपकरणों के विश्लेषण पर अपने विचार रखे। उन्होंने हृदय की संरचना एवं क्रियाविधि से शुरुआत करते हुए हृदय को एक बायोलॉजिकल पंप के रूप में समझाया। इसके साथ ही कार्डियक एक्शन पोटेंशियल, साइनोएट्रियल नोड्स (प्राकृतिक पेसमेकर), ईसीजी तरंगें—विशेष रूप से आर-वेव्स—हृदय गति परिवर्तनशीलता (HRV) तथा स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में सिम्पैथेटिक एवं पैरासिम्पैथेटिक तंत्र के संतुलन पर विस्तार से चर्चा की।

गौरतलब है, कि पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को ₹7.5 करोड़ का प्रतिष्ठित डीएसटी–पर्स अनुदान प्राप्त हुआ है, जिससे संस्थान के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को उल्लेखनीय मजबूती मिली है। वर्कशॉप का समापन जीवंत चर्चाओं एवं सक्रिय सहभागिता के साथ हुआ, जिसने उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करने तथा सतत एवं अगली पीढ़ी की तकनीकों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

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