Thursday, 04 June 2026

 

 

खास खबरें सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने पर दी बधाई समाज को शिक्षित करने और सकारात्मक परिवर्तन लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिकाः कविन्द्र गुप्ता डॉ. वीरेंद्र कुमार ने वेंचर कैपिटल फंड और एएसआईआईएम के माध्यम से सशक्त उद्यमियों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने वाली पुस्तिका का अनावरण किया सरकार ने प्रदेश को विकास के बजाय बदनामी दी : अखिलेश यादव शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित सीमा पार से हथियारों एवं नशों की तस्करी वाले मॉड्यूल से संबंधित दो मुलजिम 2.2 किलो हेरोइन और 6 पिस्तौलों समेत गिरफ्तार केवल सिंह ढिल्लों ने संभाली कमान, ‘महाराजा रणजीत सिंह वाले पंजाब’ को बनाया भाजपा का आदर्श कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री बने डीके शिवकुमार, भव्य समारोह में ली शपथ प्रधानमंत्री ने महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में स्थापित करने का किया कार्य : नायब सिंह सैनी 1000 रुपये की सहायता बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम : अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एनईसी की बैठक में क्षेत्रीय सहयोग और विकास पर होगा फोकस : कॉनराड संगमा सरबजीत सिंह झिंझर की ‘बोलेगा घनौर, बदलेगा दौर’ पदयात्रा का पांचवां दिन : नशे के संकट और AAP सरकार के टूटे वादों की खुली पोल भारत की ब्लू इकोनॉमी विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभर रही है : पीयूष गोयल एलपीयू की छात्रा पूजा सिंह ने नेशनल रिकॉर्ड और एशियन यू-20 गोल्ड जीतकर भारतीय एथलेटिक्स का इतिहास फिर से लिखा द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय जनजातीय विकास सम्मेलन का उद्घाटन किया दलविंदरजीत सिंह ने एस.आई.आर. के संशोधित कार्यक्रम संबंधी राजनीतिक दलों के साथ की बैठक ‘मेरी रसोई’ योजना से जरूरतमंद परिवारों को मिला बल : ब्रम शंकर जिम्पा ई-वेस्ट संग्रहण अभियान के अंतर्गत 1500 किलोग्राम इलेक्ट्रॉनिक कचरा वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग हेतु भेजा गया : आशिका जैन भारत के युवाओं को नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार सृजक बनना चाहिए : गुलाब चंद कटारिया पंजाब में इस बार बनेगी डबल इंजन की भाजपा सरकार : नायब सिंह सैनी नायब सिंह सैनी ने स्वर्गीय चौधरी भजनलाल की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

 

'इक्कीस': 21 साल के भारतीय जवान की कहानी, दिल में जगाती है देशभक्ति

Bollywood, Review, Entertainment, Mumbai, Actress, Cinema, Hindi Films, Movie, Mumbai News, Heroine, Ikkis
Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

मुंबई , 01 Jan 2026

Last updated on: Jan 01, 2026, 15:57 IST

डायरेक्टर - श्रीराम राघवन

कलाकार - अगस्त्य नंदा, धर्मेंद्र, जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया

समय - 143 मिनट

रेटिंग - 4.5 स्टार

लेखक - श्रीराम राघवन, अरिजीत बिस्वास, पूजा लाधा सुरती 

भारतीय सिनेमा में जब भी युद्ध पर आधारित फिल्में बनती हैं, तो अक्सर वे जोश, नारेबाजी और ऊंची आवाज वाली देशभक्ति तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन निर्देशक श्रीराम राघवन की नई फिल्म 'इक्कीस' इस भीड़ से अलग है। यह फिल्म युद्ध को जीत-हार या दुश्मन के नजरिये से नहीं, बल्कि इंसान, उसकी भावनाओं और उसके पीछे छूट गए जीवन के संदर्भ में देखती है। 

सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित यह फिल्म शोर नहीं मचाती, बल्कि दर्शक को सोचने पर मजबूर करती है। 'इक्कीस' की कहानी दो अलग-अलग समय काल में चलती है, जो इसे एक सामान्य बायोपिक से कहीं ज्यादा गहराई देती है। 

पहला समय दिसंबर 1971 का है, जब भारत-पाक युद्ध के दौरान बसंतर की लड़ाई लड़ी जा रही थी। इस हिस्से में 21 वर्षीय अरुण खेत्रपाल को दिखाया जाता हैं, जो बेहद कम उम्र में एक टैंक रेजिमेंट की जिम्मेदारी संभालते हैं। फिल्म इन युद्ध दृश्यों को बड़े-बड़े नाटकीय सीन की तरह नहीं दिखाती, बल्कि एक युवा अफसर के डर, दबाव और फैसलों पर फोकस करती है। 

बारूदी सुरंगों से भरे इलाके, लगातार खतरा और पल-पल बदलती परिस्थितियां युद्ध को बेहद असली बनाती हैं। अरुण खेत्रपाल के किरदार में अगस्त्य नंदा नजर आ रहे हैं। वह 'अरुण' को किसी सुपरहीरो की तरह नहीं, बल्कि एक सामान्य लेकिन कर्तव्यनिष्ठ युवा अधिकारी के रूप में पेश करते हैं। 

उनके चेहरे पर जो आत्मविश्वास, मासूमियत और जोश दिखाई देता है, वह किरदार के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाता है। कहीं भी उनका अभिनय बनावटी नहीं लगता। उनका साहस भाषणों से नहीं, बल्कि उनके फैसलों और एक्शन से सामने आता है। 

जलते हुए टैंक में बैठकर भी पीछे हटने से इनकार करना कोई फिल्मी नाटकीय पल नहीं लगता, बल्कि उस व्यक्ति की सोच का नतीजा लगता है, जिसने अपने कर्तव्य को अपने जीवन से ऊपर रखा। फिल्म की दूसरी टाइमलाइन साल 2001 में सेट है, और यहीं से फिल्म एक अलग ही भावनात्मक स्तर पर पहुंच जाती है। 

इस हिस्से में अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर एम. एल. खेत्रपाल के रूप में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र दिखाई देते हैं। वर्षों बीत जाने के बावजूद बेटे की शहादत और युद्ध की यादें उनके भीतर अब भी जीवित हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर से होती है, इस किरदार में जयदीप अहलावत है। 

यह हिस्सा किसी राजनीतिक बहस या इतिहास की तुलना की तरह नहीं दिखता, बल्कि यह दो सैनिकों के बीच सरल संवाद है। जयदीप अहलावत का अभिनय इस फिल्म के सबसे मजबूत पक्षों में से एक है। उनका किरदार शांत, समझदार और युद्ध की कीमत को गहराई से समझने वाला व्यक्ति है। 

जब वह और धर्मेंद्र साथ में पुरानी जगहों पर चलते हैं, बीते वक्त को याद करते हैं, और आखिर में बसंतर के युद्ध स्थल पर खड़े होते हैं, तो फिल्म देशभक्ति का एक नारा लगाए बिना भी बहुत कुछ कह जाती है। यह दृश्य यह एहसास कराते हैं कि युद्ध के बाद दोनों ओर सिर्फ यादें, नुकसान और सवाल ही बचते हैं।

धर्मेंद्र की मौजूदगी फिल्म को एक अलग ही वजन देती है। वह अपने चेहरे की खामोशी और आंखों की नमी से अपने दर्द, गर्व और अधूरेपन को व्यक्त करते हैं। 'इक्कीस' उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई है और ये बात इन दृश्यों को और भी भावुक बना देती है। 

जयदीप अहलावत के साथ उनके दृश्य भारतीय सिनेमा में युद्ध के बाद की सुलह और समझ के सबसे संवेदनशील चित्रणों में गिने जा सकते हैं। तकनीकी रूप से भी 'इक्कीस' शानदार फिल्म है। वीएफएक्स का इस्तेमाल सीमित लेकिन प्रभावी है। 

टैंक युद्ध के दृश्य वास्तविक लगते हैं, जहां शोर से ज्यादा भारीपन और डर महसूस होता है। कैमरा बार-बार टैंक के अंदर जाता है, जिससे दर्शक को सैनिकों की घुटन और असुरक्षा का एहसास होता है। हर धमाका दर्शक को रोमांचित करने के लिए नहीं, बल्कि कहानी की जरूरत के अनुसार है।

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और डायलॉग भी इसी सादगी को आगे बढ़ाते हैं। संगीत कभी भी दृश्य पर हावी नहीं होता। युद्ध के समय गोलियों, टैंकों और कमांड की आवाजें ज्यादा असर छोड़ती हैं। वहीं 2001 की टाइमलाइन में संगीत बेहद शांत और भावुक है। डायलॉग्स कम हैं, लेकिन जो हैं, वे सीधे दिल तक पहुंचते हैं।

निर्देशक श्रीराम राघवन ने खामोशी, रुकावटें और खाली जगहों को कहानी का हिस्सा बनाया है। लेखन मजबूत है और दोनों टाइमलाइन आपस में सहज रूप से जुड़ती हैं। अरुण खेत्रपाल की प्रेमिका किरण के रूप में डेब्यू कर रहीं सिमर भाटिया का किरदार छोटा है, लेकिन अहम है। वह अरुण की जिंदगी की झलक दिखाती हैं। 

उनका अभिनय सरल है और कहानी के भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाता है। मैडॉक फिल्म्स के प्रोडक्शन के तहत बनी 'इक्कीस' एक ऐसी फिल्म है जो युद्ध को जीत की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत की कहानी के रूप में देखती है। यह फिल्म सैनिकों की शहादत को सम्मान देती है।

 

Tags: Bollywood , Review , Entertainment , Mumbai , Actress , Cinema , Hindi Films , Movie , Mumbai News , Heroine , Ikkis

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD