शहीदी सभा के दूसरे दिन, पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया आज यहाँ श्री फतेहगढ़ साहिब गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक हुए। दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह सहित माता गुजरी जी की शहादत को नमन करते हुए, राज्यपाल श्री कटारिया ने कहा कि दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा किया गया सरबंस दान पूरे विश्व में अद्वितीय है।
राज्यपाल ने कहा कि छोटे साहिबज़ादों और माता गुजरी जी के अतुलनीय और असाधारण बलिदान को आज पूरे देश में श्रद्धा और नम्रता के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर बाबा ज़ोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को ज़िंदा दीवारों में चिनवाया गया, आज पूरी दुनिया उस पवित्र भूमि फतेहगढ़ साहिब पर सिर नवा रही है और सेवा, न्याय और सत्य के लिए जीवन समर्पित करने, अत्याचार के विरुद्ध डटने तथा असाधारण आत्मबल के साथ संघर्ष करने और आवश्यकता पड़ने पर देश और धर्म के लिए प्राण न्यौछावर करने का आशीर्वाद मांग रही है।
श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि जहाँ सरबंसदानी गुरु गोबिंद सिंह जी के पिता श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं जयंती मनाई गई, वहीं बड़े साहिबज़ादे अजीत सिंह जी और जुझार सिंह जी की श्री चमकौर साहिब की धरती पर मुगल सत्ता के विरुद्ध हुए युद्ध में दी गई शहादत को भी स्मरण किया गया है। इसके साथ ही हम माता गुजरी जी की महान शहादत को भी नमन करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने क्रमशः 9 और 7 वर्ष की आयु में साहस और निर्भयता के साथ अत्याचारी मुगल सत्ता का सामना करते हुए निडरता और दृढ़ता के साथ धर्म पर अडिग रहते हुए महान शहादत देकर एक विलक्षण उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस पवित्र भूमि पर सिर नवाने का अवसर मिला, जहाँ गुरु साहिब के साहिबज़ादों ने संसार को धर्म, सत्य और नेक मार्ग को हर प्रकार की सांसारिक लालसाओं से ऊपर रखने का अटल आध्यात्मिक संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि छोटे साहिबज़ादों की यह अनुपम और महान शहादत सदा याद रखी जाएगी। इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर डॉ. सोना थिंद, ज़िला पुलिस प्रमुख शुभम अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।