पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग ने सोमवार को वैदिक खगोल विज्ञान में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया, जो पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के साथ जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उद्घाटन समारोह कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी, मुख्य अतिथि डॉ. मणिकांत पासवान (निदेशक, एसएलआईईटी लोंगोवाल), और विशिष्ट अतिथि डॉ. रविकांत मिश्रा (गणित के प्रोफेसर, एसएलआईईटी लोंगोवाल) की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. गौरी शंकर द्वारा पाठ्यक्रम के उद्देश्यों के परिचय से हुई, जिसके उपरांत डीन, छात्र कल्याण, प्रो. संजीव ठाकुर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञ व्याख्यान सत्र में डॉ. रविकांत मिश्रा और डॉ. मणिकांत पासवान ने भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं वैदिक खगोल विज्ञान के विविध आयामों पर विचारोत्तेजक व्याख्यान दिए।
उन्होंने प्राचीन भारतीय आचार्यों के योगदान, ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता की अवधारणा तथा पारंपरिक अनुष्ठानों के खगोलीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. मिश्रा ने आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, आदि शंकराचार्य एवं अन्य विद्वानों के मूलभूत कार्यों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. पासवान ने शून्य के दर्शन तथा कुंभ मेले जैसे आयोजनों के खगोलीय आधार को स्पष्ट किया, जो बृहस्पति के 12 वर्षीय चक्र से संबंधित है।
अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन के बीच गहरे अंतर्संबंध पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों में समग्र शिक्षा और नवीन सोच को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक ज्ञान को समकालीन शिक्षा में समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में पाठ्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन और सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन कुमार ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर, पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अशोक कुमार पाठक ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अभिनव पाठ्यक्रम के शुभारंभ के साथ, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) ढांचे के तहत वैदिक खगोल विज्ञान में संरचित शिक्षा प्रदान करने वाले देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल हो गया है।