श्री गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व को समर्पित छठे हरे नगर कीर्तन की शुरुआत पांच प्यारों ने बुड्ढे दरिया के किनारे पौधे लगाकर की। यह पहली बार है जब बुड्ढे दरिया के किनारे से हरा नगर कीर्तन सजाया गया। नगर कीर्तन के दौरान गुरबाणी के साथ हवा, पानी और धरती मां की रक्षा पर विशेष चर्चा हुई। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्र छाया में, पांच प्यारों की अगुवाई में निकला यह नगर कीर्तन देर शाम गुरुद्वारा गाऊघाट पहुँचकर संपन्न हुआ।
घाट पहुंचते ही संगतों में भारी उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। स्थानीय लोग सुबह से ही नगर कीर्तन के आगमन की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया ने नगर कीर्तन में शिरकत करते हुए कहा कि बुड्ढे दरिया से शुरुआत करके संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के गंदे होते जल स्रोतों की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया है।
उन्होंने कहा कि यह नगर कीर्तन गुरु ग्रंथ साहिब जी की छाया में एक नई राह दिखाता है। मुंडिया ने संत सीचेवाल के साथ मिलकर संगतों में बड़े स्तर पर पौधों का प्रसाद भी वितरित किया। बुड्ढे दरिया को प्रदूषणमुक्त करने के लिए लगातार संघर्षरत राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने आशा व्यक्त की कि एक दिन यह दरिया फिर पहले की तरह कल–कल करता बहेगा।
उन्होंने बताया कि भूखड़ी खुर्द से लेकर संगतघाट तक पानी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखा गया है। छठे हरे नगर कीर्तन को श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित करते हुए संत सीचेवाल ने पूरे वर्ष में 3 लाख 50 हज़ार पौधे लगाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले पाँच नगर कीर्तनों में भी बड़े पैमाने पर पौधों का प्रसाद वितरित किया गया है।
उनका कहना था कि पंजाब को हरा-भरा बनाकर ही इसे स्वस्थ बनाया जा सकता है, और इस बार के छह हरे नगर कीर्तनों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नगर कीर्तन के दौरान संत सीचेवाल ने पंजाब के अन्य ज्वलंत मुद्दों के साथ-साथ पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा चल रहे संघर्ष का भी डटकर समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय राज्य की धरोहर है। विश्वविद्यालयों में शोध होनी चाहिए ताकि वैज्ञानिक तैयार हों—छात्रों को संघर्ष के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से अपील की कि विश्वविद्यालयों को अपनी राजनीति का मंच न बनाएं। साथ ही राज्य की यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों में छात्र चुनाव करवाने की वकालत की ताकि युवा नेतृत्व पैदा हो सके।
इस हरे नगर कीर्तन में लगभग आठ हज़ार पौधे प्रसाद स्वरूप वितरित किए गए। भुखड़ी खुर्द, भुखड़ी कला, गुरु रामदास नगर, खांसी कला, चक्क चेला, अमर कॉलोनी और सीचेवाल सहित कई गांवों के सरपंचों, गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटियों और बड़ी संख्या में संगतों ने इसमें भाग लिया। संत अवतार सिंह यादगारी स्कूल के बच्चों ने रस-भरे कीर्तन द्वारा संगत को गुरबाणी से जोड़ा, वहीं तख्तियों के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया। गतका खिलाड़ियों ने नगर कीर्तन के आगे-आगे शानदार प्रदर्शन किया।
बुड्ढे दरिया को प्रदूषणमुक्त करने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पहली बार नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। भूखड़ी के गुरुद्वारा साहिब से शुरू होकर गुरुद्वारा गाऊघाट तक के पूरे मार्ग में संगतों ने गुरु ग्रंथ साहिब जी का आदर–सत्कार किया। समाजसेवी संस्थानों और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों ने नगर कीर्तन में शामिल संगतों के लिए जगह–जगह चाय, पकोड़े और फलों का लंगर लगाया। संगतों के घाट पहुंचने पर आज बुड्ढे दरिया के पानी का टीडीएस 144 के आसपास दर्ज किया गया।