क्या आपका बच्चा भी लगातार स्क्रीन देख रहा है और उसके चश्मे का नंबर तेज़ी से बढ़ रहा है? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। तीन दशकों से अधिक समय से नेत्र देखभाल में अग्रणी सोहाना आई हॉस्पिटल, मोहाली, ने ट्राईसिटी के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है।
अस्पताल ने यहाँ के पहले समर्पित 'मायोपिया मैनेजमेंट क्लिनिक' का उद्घाटन किया है, जिसके साथ ही इसने बच्चों और किशोरों में तेज़ी से बढ़ रहे नज़दीकी दृष्टि दोष (मायोपिया) की समस्या से लडऩे की जि़म्मेदारी उठाई है। २५ लाख से अधिक सफल सर्जरी और २० 0+ सीनियर कंसल्टेंट्स की विशेषज्ञ टीम के साथ, सोहाना हॉस्पिटल हमेशा उत्तरी भारत में उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल का प्रतीक रहा है।
लेकिन, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद मायोपिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए, अस्पताल ने इस नई और अत्यंत ज़रूरी सेवा की शुरुआत की है।
केवल चश्मा नहीं, अब नजऱ को बढऩे से रोकने का इलाज
क्लिनिक का मुख्य उद्देश्य बच्चों में दृष्टि दोष को केवल चश्मे का नंबर 'बदलना' नहीं, बल्कि उसे 'बढऩे से रोकना' है। यहाँ बच्चों की नजऱ को स्थिर करने के लिए अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक और उपचार सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। सोहाना हॉस्पिटल की सी.ओ.ओ. और सीनियर सर्जन, डॉ. अमनप्रीत कौर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में, खासकर कोविड महामारी के बाद, बच्चों में मायोपिया तेजी से बढ़ी है।
मोबाइल फोन, ऑनलाइन क्लास और अधिक स्क्रीन टाइम ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। डॉ. कौर ने ज़ोर देते हुए कहा मायोपिया केवल एक साधारण नुस्खा नहीं है; यह एक गंभीर बीमारी है जो बड़े होकर आँखों को और नुकसान पहुँचा सकती है।
हमारा नया क्लिनिक, विशेषज्ञ डॉक्टरों, थेरेपिस्टों और आधुनिक तकनीकों की एक समर्पित टीम के साथ, इस समस्या को जड़ से रोकेगा। इस ऐतिहासिक पहल पर बोलते हुए, ट्रस्ट के सचिव सरदार गुरमीत सिंह ने कहा सोहाना हॉस्पिटल ने हमेशा जनता की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी है।
हमने महसूस किया कि इस मायोपिया क्लिनिक की कितनी ज़रूरत है। यह क्लिनिक नवीनतम उपकरणों से लैस है, जो हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगा। यह विशेष क्लिनिक हर हफ्ते मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को शाम ३ बजे से ५ बजे तक खुला रहेगा।
प्रतिदिन ८०० 0 मरीज़ों की देखभाल करने वाला सोहाना हॉस्पिटल इस नए कदम से उत्तरी भारत में नेत्र स्वास्थ्य के मानक को एक नई ऊँचाई पर ले गया है।