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कैट के मूल उद्देश्य को कायम रखने के लिए अनावश्यक अपीलों में कमी लाएं : डॉ. जितेंद्र सिंह

मंत्री ने न्यायपालिका से राष्ट्र सेवा में कैट के कार्यों के लिए स्वेच्छा से आगे आने का आग्रह किया

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 20 Sep 2025

Last updated on: Sep 22, 2025, 12:43 IST

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी;पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सभी संबंधित पक्षों से यह सुनिश्चित करने में मदद करने का आग्रह किया कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) उच्च न्यायालयों में सेवा-संबंधी लंबित मामलों को कम करने के अपने मूल उद्देश्य को पूरा करे। 

उन्होंने उच्च न्यायालयों में अनावश्यक अपीलों से बचने के तरीके खोजने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि कैट का उद्देश्य कर्मचारियों को न्याय दिलाने में आसानी के लिए न्यायाधिकरण स्तर पर अंतिम निर्णय प्रदान करना और न्यायिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है।

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुएडॉ. जितेंद्र सिंह ने न्यायपालिका के सदस्यों से "न्याय प्रशासन के हित में और राष्ट्र की सेवा में" कैट में कार्यभार संभालने के लिए स्वेच्छा से आगे आने का आग्रह किया। 

उन्होंने कहा कि ऐसी भूमिकाओं को स्वीकार करने में अनिच्छा के कारण, अतीत में, न्यायाधिकरण के कामकाज में संशोधन करने पड़े थे। इन संशोधनों में न्यायिक सदस्यों की अनुपस्थिति में प्रशासनिक सदस्यों को न्यायपीठों का नेतृत्व करने की अनुमति देना भी शामिल था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उपस्थित लोगों याद दिलाया कि कैट की स्थापना 1985 में संविधान के अनुच्छेद 323-ए के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को शीघ्र और सस्ता न्याय प्रदान करने के लिए की गई थी, साथ ही उच्च न्यायालयों को सेवा-संबंधी मुकदमों के भारी बोझ से भी मुक्त किया गया था।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि न्यायाधिकरण (कैट) में सभी रिक्तियां भरी जाएं, जिससे यह पूरी क्षमता से कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि अगली चुनौती लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाना और मामलों के आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने न्यायिक प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुएई-फाइलिंग, अभिलेखों के डिजिटलीकरण और वर्चुअल सुनवाई में हुई प्रगति की ओर इशारा किया, जिसने कोरोना महामारी के दौरान भी निरंतरता सुनिश्चित की है। उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता किए बिना, तेज़ और अधिक सुसंगत न्यायनिर्णयन में मदद के लिए एआई-सक्षम केस प्रबंधन प्रणालियों की योजनाओं की भी चर्चा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि कैट निपटान दर,लंबित मामलों में कमी,प्रौद्योगिकी का उपयोग और वादी संतुष्टि जैसे मानदंड शामिल करते हुए अपनी पीठों में निष्पादन मानकों को अपना सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उपाय सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे और पारदर्शिता में सुधार करेंगे।

डॉ सिंह ने सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि अधिकांश कैट पीठों के पास अब अपना परिसर हैं और बुनियादी ढांचे तथा जनशक्ति को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए अपने संबोधन का समापन किया कि सरकार संसाधन और प्रौद्योगिकी प्रदान कर सकती है, लेकिन ईमानदारी और सेवा की भावना न्याय प्रदान करने वालों की ज़िम्मेदारी है।

देश के मुख्य न्यायाधीशन्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने अपने उद्घाटन भाषण में न्याय तक पहुंच को आसान बनाने और उच्च न्यायालयों पर बोझ कम करने में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। न्यायमूर्ति गवई ने प्रस्ताव दिया कि सरकारी विभाग आगे के मुकदमों पर निर्णय लेने से पहले मामलों की समीक्षा के लिए नोडल कार्यालय स्थापित करें। 

उन्होंने न्यायाधिकरणों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस के निर्माण के साथ-साथ मामलों के वर्गीकरण और निर्णयों को कई भाषाओं में अनुवाद करनेके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने को भी कहा। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोरे ने अपने स्वागत भाषण मेंनियमित अदालतों से अलग न्यायाधिकरण की अनूठी भूमिका और आवश्यकताओं के बारे में बात की। 

उन्होंने प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया और देश भर में कैट की पीठों और सर्किट पीठों की स्थापना की व्याख्या की,जिनकी स्थापना वादियों को उसके पास ही न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने सेवा न्यायशास्त्र में न्यायाधिकरण (कैट) की बढ़ती भूमिका और सरकार के नेतृत्व तथा समर्थन में समय पर और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने में इसके महत्व पर ज़ोर दिया।

केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कैट के फैसले सराहनीय हैं, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा अपीलों का चक्र न्याय में देरी करता है और इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल केस प्रबंधन और पारदर्शिता सुधार के लिए जरूरी हैं। 

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने एक विश्वसनीय संस्थान के रूप में कैट के विकास पर विचार किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि नियुक्तियों की गुणवत्ता इसकी सफलता की कुंजी है। उन्होंने न्यायाधिकरण के सदस्यों के लिए और अधिक कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण का भी जरूरी बताया। 

इस कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई के साथ-साथ विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, बार काउंसिल और एसोसिएशन के सदस्य तथा विधिक बिरादरी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

 

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