अजनाला क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव गुझापीर, डायल भट्टी, सम्मोवाल और लंगोमहल आदि का आज हलका विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब सरदार कुलदीप सिंह धालीवाल ने दौरा कर भारी बारिश और बाढ़ के कारण हुई फसलों और अन्य तबाही का जायज़ा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार बाढ़ पीड़ित किसानों और मजदूरों को मुआवजा देने के लिए वचनबद्ध है।
बाद में बातचीत के दौरान विधायक और पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा पंजाब में आई भयंकर बाढ़ की तबाही से प्रभावित लोगों की सुध लेने के लिए करीब दो महीने बाद दौरा करने को केवल एक औपचारिक (फर्ज़ी) राजनीतिक कवायद करार दिया। साथ ही राहुल गांधी द्वारा पंजाब में बाढ़ की तबाही के मद्देनज़र मोदी सरकार द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपये के राहत पैकेज को नाकाफी बताते हुए इस मुद्दे को संसद में उठाने के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया।
विधायक और पूर्व मंत्री सरदार धालीवाल ने कहा कि अगर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के प्रति दिल से गंभीर हैं, तो प्राकृतिक आपदा से इतर बाढ़ के लिए समान रूप से दोषी ठहराए जा रहे *भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB)* के उस प्रबंधन को पंजाब को वापस सौंपने की मांग कर सकते हैं, जिसे उनके (राहुल गांधी) की दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पंजाब से लेकर केंद्र सरकार को सौंप दिया था।
धालीवाल ने कहा कि राहुल गांधी को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर संसद में प्रस्ताव लाकर केंद्र की मोदी सरकार को फैसला लेने के लिए मजबूर करें। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे पंजाब के दरियाई पानी से जुड़े मामले को कांग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 1982 में वापस लेने और सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के निर्माण के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा दिए गए अवॉर्ड को रद्द करवाने के लिए भी आवाज़ उठाएं, ताकि वह अपनी दादी के पंजाब विरोधी फैसलों पर पछतावा ज़ाहिर कर सकें।
धालीवाल ने यह भी कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में पंजाब के बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने में संवेदनशील होते, तो लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के करीब 150 सांसदों के खातों से 2-2 करोड़ रुपए यानी कुल 300 करोड़ रुपये की राशि जारी कर सकते थे। लेकिन ऐसा न होने के कारण फिलहाल राहुल गांधी की पंजाब यात्रा बाढ़ पीड़ितों के लिए निराशाजनक और बिना किसी ठोस मदद के ही रही।