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बिहार विधानसभा चुनाव : दरभंगा ग्रामीण में राजद की बादशाहत को भाजपा-जेडीयू की चुनौती

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 29 Aug 2025

Last updated on: Aug 29, 2025, 16:07 IST

दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में एक बेहद खास जगह रखता है। यह क्षेत्र दरभंगा लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस विधानसभा में संपूर्ण मनीगाछी प्रखंड और दरभंगा ब्लॉक की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका दरभंगा शहर की नगरपालिका सीमा से सटा हुआ है, इसलिए यहां ग्रामीण और उभरते शहरी स्वरूप का मिला-जुला रंग दिखता है। 

कृषि अभी भी यहां की मुख्य पहचान है, लेकिन शहर से निकटता ने शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों तक पहुंच आसान कर दी है। दरभंगा ग्रामीण विधानसभा का गठन वर्ष 1977 में हुआ था। शुरुआत में यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित थी। 

हालांकि, 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश पर इसे सामान्य श्रेणी में बदल दिया गया और 2010 से यह परिवर्तन प्रभावी हो गया। आरक्षण में बदलाव के बावजूद यहां राजनीतिक वर्चस्व पर खास असर नहीं पड़ा। वर्ष 2000 से लेकर अब तक राजद ने लगातार छह चुनावों में यहां जीत दर्ज की है। 

साल 2000 और 2005 में पिताम्बर पासवान ने राजद की तरफ से जीत हासिल की, जबकि 2010, 2015 और 2020 में लालित कुमार यादव लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इससे पहले जनता पार्टी और जनता दल ने 1977, 1980, 1990 और 1995 में दो-दो बार जीत दर्ज की थी। 

इस सीट पर कांग्रेस को सिर्फ 1985 में जीत मिली थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने यह सीट तो बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर बेहद कम रह गया। इससे यह साफ संकेत मिला कि यहां विपक्ष धीरे-धीरे अपनी पैठ बना रहा है और राजद के लिए चुनौती बढ़ रही है।

इस क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक संरचना अब भी दलित वोट बैंक और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से प्रभावित है। खासकर मनीगाछी ब्लॉक में दलित वोटरों की संख्या निर्णायक मानी जाती है। दूसरी तरफ, दरभंगा शहर से जुड़ाव ने इलाके में बदलाव भी लाया है। 

आंतरिक पंचायतों में अब भी सड़क संपर्क, सिंचाई, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है, जबकि शहर के निकटवर्ती इलाकों में अपेक्षाकृत विकास दिखता है। स्थानीय मुद्दों की बात करें तो रोजगार और पलायन सबसे अहम सवाल हैं। 

हर साल बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में बाहर जाते हैं। इसके अलावा सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर क्रियान्वयन मतदाताओं की प्राथमिकता में है। चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता 2,98,481 हैं, जिनमें 1,57,135 पुरुष, 1,41,344 महिलाएं और 2 थर्ड जेंडर शामिल हैं।

अगर 2025 के चुनावी समीकरण पर नजर डालें तो राजद यहां परंपरागत रूप से मजबूत है, लेकिन 2020 के कम अंतर की जीत यह इशारा करती है कि भाजपा और जदयू धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। भाजपा का शहरी और युवा वर्ग में असर बढ़ा है, जबकि जेडीयू ग्रामीण विकास योजनाओं को भुनाने की कोशिश में है।

 हालांकि, दलित और परंपरागत वोट बैंक पर मजबूत पकड़ के कारण राजद अब भी इस सीट का प्रमुख दावेदार बना हुआ है। कुल मिलाकर, चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। राजद अपनी परंपरागत पकड़ बचाने के लिए संघर्ष करेगा, जबकि भाजपा और जेडीयू के लिए यह सीट अपनी पैठ मजबूत करने का अहम मौका साबित हो सकती है। जनता का मूड इस बार विकास और रोजगार पर टिका है और यही तय करेगा कि दरभंगा ग्रामीण में कौन बाजी मारेगा।

 

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