वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री जावेद अहमद राणा ने नागरिक सचिवालय में जम्मू-कश्मीर वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के साथ बैठक में निगम के कामकाज की समीक्षा की। बैठक का उद्देश्य सतत वन प्रबंधन और राजस्व सृजन पर ध्यान केंद्रित करते हुए निगम की परिचालन गतिविधियों की समीक्षा और उन्हें सुव्यवस्थित करना था।
चर्चा वन विभाग से प्राप्त चिह्नों से वैज्ञानिक तरीके से लकड़ी निकालने पर केंद्रित थी, जिसमें सूखे खड़े/गिरे हुए, उखड़े हुए और टूटे हुए पेड़, साथ ही वन संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकृत हरे पेड़ों के चिह्न शामिल थे। मंत्री ने लकड़ी और जलाऊ लकड़ी की बिक्री के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने, स्थानीय समुदायों के लिए इन आवश्यक संसाधनों की आवश्यकता को पूरा करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के महत्व पर जोर दिया।
बैठक में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत स्वीकृत विकास परियोजनाओं के लिए स्थलों की मंजूरी और निगम की परिचालन गतिविधियों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसमें क्षेत्रीय प्रभागों द्वारा वृक्षों की गणना और चिह्नांकन, परियोजना प्रस्ताव तैयार करना, पेड़ों को निकालने, पेड़ों की कटाई, उन्हें छोटे लट्ठों में बदलने, परिवहन और ई-नीलामी के लिए ढेर लगाने, छंटाई और लॉटरी निकालने के लिए ई-टेंडरिंग शामिल है।
मंत्री ने वृक्षों की गणना से लेकर नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की और निगम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी गतिविधियाँ स्थायी और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तरीके से की जाएँ। मंत्री ने कहा कि निगम के संचालन को अनुकूलित करके, सरकार का उद्देश्य राजस्व सृजन को बढ़ाना, स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करना और जम्मू-कश्मीर में स्थायी वन प्रबंधन को बढ़ावा देना है।