मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को देश के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में पुनः स्थापित करना तथा इसे कायम रखना सरकार तथा पर्यटन हितधारकों का सामूहिक कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में फिक्की तथा जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘जम्मू-कश्मीर पर्यटन पुनरुद्धार संवाद’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “यह हमारा दायित्व है कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करें कि जम्मू-कश्मीर देश के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में पुनः अपनी स्थिति में आए तथा वहीं बना रहे।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार समग्र पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित नई पहलों पर काम कर रही है।
हाल की चुनौतियों पर विचार करते हुए मुख्यमंत्री ने 21 अप्रैल की आशावादिता और 22 अप्रैल की मंदी के बीच तीव्र अंतर को याद किया, दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद पर्यटकों की संख्या में अचानक गिरावट का जिक्र करते हुए। उन्होंने कहा, “डल झील के ऊपर से उड़ान भरने और सैकड़ों शिकारे देखने से लेकर कुछ ही दिनों बाद एक भी शिकारा न देखने तक यह एक क्रूर अनुस्मारक था कि अतीत हमारे वर्तमान और, भगवान न करे, हमारे भविष्य में घुसपैठ कर सकता है।“
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के क्षेत्र में दशकों से देखी गई अस्थिरता को स्वीकार किया और अनुकूलषीलता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “अन्य स्थानों के विपरीत, जहां पर्यटन की योजना कई वर्षों के लिए बनाई जा सकती है, यहां हम सप्ताह-दर-सप्ताह योजना बनाते हैं।
लेकिन फिर भी-हम योजना बनाते हैं और हम दृढ़ रहते हैं।“ उन्होंने अच्छे और चुनौतीपूर्ण समय में जम्मू-कश्मीर के साथ खड़े रहने के लिए फिक्की और बड़े पर्यटन समुदाय का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी, विधायक फारूक अहमद शाह, सलमान सागर, अल्ताफ अहमद कालू, तनवीर सादिक, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरज गुप्ता, आयुक्त सचिव पर्यटन यशा मुदगल, फिक्की की पूर्व अध्यक्ष ज्योत्सना सूरी, फिक्की जम्मू-कश्मीर चैप्टर के प्रमुख मुश्ताक बुर्जा और कई फिल्म निर्माता, एमआईसीई आयोजक, वेडिंग प्लानर, गोल्फ खिलाड़ी और पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के हितधारक शामिल हुए।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने क्षेत्र में पर्यटन के क्षेत्र को व्यापक बनाने के प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “हम ‘एसपीआरईएडी’ नामक एक परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य कश्मीर और जम्मू दोनों में नौ नए पर्यटन स्थलों को विकसित करना है, जिसमें बहुपक्षीय वित्त पोषण एजेंसियों से अपेक्षित समर्थन प्राप्त होगा।“
मुख्यमंत्री ने जम्मू और कश्मीर में पर्यटन के अवसरों की विविधता पर भी जोर दिया। “हम खुद को तीन या चार स्थलों तक सीमित नहीं रख सकते। जम्मू तीर्थयात्रा और सीमा पर्यटन प्रदान करता है। कश्मीर दर्शनीय, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन प्रदान करता है।
साथ मिलकर, हम एक अधिक समग्र पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर सकते हैं।“ कनेक्टिविटी पर चर्चा करते हुए, सीएम ने रेलवे के बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्लेख किया “सुरंगों और दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल से घाटी में ट्रेन से यात्रा करना एक शानदार अनुभव है।
हमारे पास अभी तक दिल्ली-श्रीनगर लाइन नहीं है, लेकिन वह दिन दूर नहीं है।” उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास और विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। “हम गुलमर्ग में एसकेआईसीसी जैसे स्थलों के पूरक के रूप में एक विश्व स्तरीय सम्मेलन सुविधा को पूरा करने के करीब हैं।
डप्ब्म् पर्यटन, गोल्फ, फिल्म और गंतव्य विवाह जैसे क्षेत्र हमारी भविष्य की रणनीति के महत्वपूर्ण घटक हैं।” मुख्यमंत्री ने पर्यटन बिरादरी से सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया। “हम आपके समर्थन, सुझावों और सबसे महत्वपूर्ण बात जब ज़रूरत हो तो आपकी आलोचना को महत्व देते हैं।
साथ मिलकर, हम एक जीवंत पर्यटन क्षेत्र बना सकते हैं जो न केवल आगंतुकों को आकर्षित करता है बल्कि उन्हें वापस आने के लिए प्रेरित करता है।” इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने अतुल दीर द्वारा लिखित एक पुस्तक ‘गोलिं्फग इन पैराडाइज़’ का विमोचन किया, जो एक प्रमुख गोल्फ़ पर्यटन स्थल के रूप में जम्मू और कश्मीर की बढ़ती अपील का जश्न मनाती है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत के अन्य राज्यों से बहुत पहले एक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है और अब हमें जम्मू-कश्मीर में साहसिक पर्यटन, अवकाश पर्यटन, एमआईसीई पर्यटन जैसी विशिष्ट पर्यटन गतिविधियों की पूरी श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता है, साथ ही कश्मीर को एक किफायती और अद्भुत विवाह स्थल के रूप में बढ़ावा देना है।