हर इंसान की जिंदगी में एक ना एक घटना ऐसी होती है जिसे वो चाह कर भी भूल नहीं पाता। भूलने की कोशिश तो कहता है लेकिन वो घटना उसके मन में ऐसा घर कर लेती है कि इंसान उसे मरने के बाद ही छोड़ पाता है। आज हम आपको एक ऐसे फोटोग्राफर के बारे में बताएंगे जिसने एक तस्वीर की वजह से अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया। उस मशहूर फोटोन जर्नलिस्ट का नाम है केविन कार्टर। उनके द्वारा खींची गई गिद्ध और बच्ची की फोटो उनकी जिंदगी की आखिरी फोटो थी। आज भी इस तस्वीर के चर्चे होते हैं। शायद आज तक कोई ऐसी तस्वीर खींच ही ना पाया हो और शायद भविष्य में कभी खींच भी ना पाए। यह फोटो साउथ सूडान में भुखमरी से जूझ रही एक बच्ची की थी, जो अपने माता पिता की झोंपड़ी की ओर रेंगकर जाने की कोशिश कर रही थी। काफी दिनों से उस बच्ची ने कुछ खाया नहीं था।
भूख के कारण वो उठ भी नहीं पा रही थी। मातापिता खाना ढूंढने जंगल गए हुए थे। भूख ने उस बच्ची को बेदम कर रखा था, शरीर में सिर्फ हड्डियां ही दिख रखी थी। एक गिद्ध उसकी ताक में बैठा था, जोकि उसके मरने का इंतजार कर रहा था। केविन ने फोटो खींची चल दिए। केविन ने लिखा कि उन्होंने 20 मिनट तक उस गिद्ध के वहां से उड़ने का इंतजार किया और जब वो नहीं उड़ा तो उन्होंने ये फोटोग्राफ क्लिक किया। इस फोटो ने केविन को पुलिट्जर प्राइज जिताया। यह प्राइज जीतने के तीन महीने बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।फोटो खींचने के बाद केविन अपने घर को चल दिए और केविन ने इस फोटो को न्यू यॉर्क टाइम्स को बेच दिया। यह फोटो पहली बार 26 मार्च 1993 को New York Times में प्रकाशित हुआ था। फोटो का केप्शन था metaphor for Africa’s despair। फोटो के प्रकाशित होते ही लाखों लोगों ने केविन कार्टर से इस इथोपियाई बच्ची के बारे में हजारों सवाल किए।
यह तस्वीर दुनिया के लगभग सभी बड़े अखबारों और मेगजीनों में पहले पेज पर छपी। लोगों ने तस्वीर को खूब सरहाया लेकिन सवाल ज्यादा किए। कईयों ने उस पर यह आरोप भी लगाए कि उसने उस समय फोटो खींचना ज्यादा उचित समझा, जबकि वह उस रेंगती हुई बच्ची को बचा सकते थे। वहीं कुछ लोगों ने ये भी पूछा कि आखिर इसके बाद उस बच्ची का क्या हुआ। क्या गिद्ध वहां से उड़ गया था या फिर उसके माता पिता वहां आ गए थे। क्या उस लड़की को बचा लिया गया था? कुछ इसी तरह के सवालों ने केविन को हिलाकर रख दिया। वो टूटने लगे। केविन को हमेशा उस इथोपियाई बच्ची की याद आती रही। लोगों के सवाल और उलाहने उनको परेशान करते रहे। उनको यह दर्द और अपराध बोध सताता रहा कि उन्होंने उस बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश नहीं की और न ही यह देख पाए कि वो जिंदा रही या मर गई। वो खुद को उस लड़की की मौत का दोषी मानने लगे। उन्हें खयाल आने लगे कि वो उस बच्ची को उस गिद्ध से बचा सकते थे। लेकिन उन्होंने इसके बारे में सोचा ही नहीं, उन्हें उस समय सिर्फ अपनी नौकरी और करियर की फिक्र थी। इस घटना के करीब तीन महीने बाद केविन कार्टर ने आत्महत्या कर ली और यह तस्वीर उनकी आखिरी तस्वीर बनकर रह गई।