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प्राकृतिक कृषि राज्य बनने की ओर बढ़ते हिमाचल के कदम

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शिमला , 05 Jan 2020

Last updated on: Jan 05, 2020, 00:00 IST

प्रदेश की खेती को जहरमुक्त करने व स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए सरकार के प्रयास रंग दिखाने लगे हैं। प्रदेश के किसान सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना को अपना रहे हैं जिसमें प्रदेश की महिलाएं अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही है। बड़े पैमाने पर लोग एकल रूप में और स्वयं सहायता समूह बनाकर प्राकृतिक विधि से हरी सब्जियों व अन्य फसलों को उगाने लगे है।प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की 3226 पंचायतों में से 2664 पंचायतों में योजना को लागू किया जा चुका है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती के लिए 44325 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है, जिसके लिए विभिन्न स्थानों पर लगभग 1031 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। निर्धारित 50 हजार किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 39124 किसान प्रदेश में प्राकृतिक खेती को कर रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगभग 1650 हैक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेतर की जा रही है। प्रदेश के सभी 9.61 लाख किसान परिवारों को 2022 तक प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2019 में 50,000 किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, वहीं 2020 में दो लाख किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।जिला मंडी के करसोग क्षेत्र के पांगणा गांव ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है। गांव के लगभग 20 कृषक परिवारों की महिलाएं सब्जी उत्पादन कार्य से जुड़ी हैं। जिला शिमला की घैणी व पाहल पंचायत की महिलाओं ने प्राकृतिक सब्जियां उगाने के लिए विलेज आर्गेनाइजेशन हिमालय संस्था का गठन किया है।घैणी पंचायत में 8 स्वयं सहायता समूह गठित किए है। यह समूह पंचायत के हलोट, सनौर, चटयाड, जेलीधार, दायला व बेई गांव में गठित किए गए है। पाहल पंचायत के पांच गांवों टभोग, बमोत, बाग इत्यादी में लगभग 120 लोग प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं जिसमें लगभग 80 महिलाएं शामिल है।समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने-अपने खेतों में प्राकृतिक विधि से हरी सब्जियां उगा कर अपने समूह के माध्यम से ही मार्केट में लोगों को भी उपलब्ध करवा रही है।घैणी पंचायत में गठित स्वयं सहायता समूह जय मां कनक धारा की सचिव प्रोमिला ठाकुर ने बताया कि पंचायत के विभिन्न गांवों में गठित स्वयं सहायता समूहों से लगभग 80 महिलाएं जुड़ी है, जो प्राकृतिक सब्जियां उगा रही है। प्राकृतिक सब्जियों उगाने में कीटनाशक दवाईयों, खाद इत्यादी के स्थान पर गाय के गोबर, गौमूत्र इत्यादी का प्रयोग कर उससे विशेष खाद तैयार की जाती है।

प्राकृतिक खेती को अपनाने में युवा भी आगे

ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जियों के अलावा अन्य फसलों को भी किसान अब प्राकृतिक विधि से उगाने लगे है जिसमें युवा वर्ग भी आगे आया है। बिलासपुर जिला के घुमारवीं ब्लाक के अजय रत्न ने सहायक अभियंता की नौकरी छोड़कर लगभग दो हैक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती को अपनाया है। सिरमौर जिला के नाहन ब्लाक के दो युवा हरिंद्र और अर्जुन अत्री गेहूं, चना, जौ तथा लहसुन की खेती कर रहे है। वे मार्केटिंग करने के लिए सोशल मिडिया का सहारा लेकर अपनी सब्जियों व अन्य फसलों के वीडियो बनाकर यूट्ब पर डाल रहे है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को जागरूक कर प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा सके। वहीं इसी जिला की पांवटा ब्लाक की जसविंद्र कौर ने अपने पूरे परिवार सहित प्राकृतिक खेती को अपनाया है और लगभग सात बीघा जमीन पर ब्रोकली सहति अन्य नगदी फसलों को उगा रहे है। जिला सोलन के गंबरपुल के शेर सिंह, धर्मपुर ब्लाक के संजीब और सोहन लाल ने गोभी तथा लहसून की खेती को अपनाया है। सोहन लाल ने इस खेती में 1490 रुपए खर्च करके 60 हजार रुपए का मुनाफा इसी सीजन में कमा कर माडल प्रस्तुत किया है। उना के मनजीत सिंह ने आईटी इंजीनियर की नौकरी छोड़ पालीहाउस और बाहर खेतों में हरी सब्जियां उगाकर जिला के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं। जिला कुल्लू के बंजार वैली के लगभग 28 बागवानों ने समूह बना कर अपने बगीचों में प्राकृतिक खेती में बदल दिया है। हमीरपुर जिला के भोरंज ब्लाक के दयोट गांव में किसानों ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाया है और लगभग 12 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, चना तथा मटर उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे है। शिमला जिले के चैपाल ब्लाक के निवासी सूरत राम, चिड़गांव के अनिल कुमार, रोहडू के सुभाष चैहान ने भी अपने सेब के बगीचों को प्राकृतिक खेती में बदलकर हरी सब्जियों को उगाने की ओर कदम आगे बढ़ाए हैं।

सरकार दे रही है यह सुविधा

योजना के अन्र्तगत सरकार की ओर से लोगों को गाय खरीदने के लिए 50 फीसदी अनुदान जो कि अधिकतक 25 हजार रूपये है, दिया जा रहा है। गौशाला में गोमूत्र एकत्रीकरण के लिए फर्श को पक्का करने के लिए 8 हजार रूपये व तीन प्लास्टिक के ड्रम उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

2022 तक प्राकृतिक कृषि राज्य बनाने का लक्ष्य

प्रदेश के कृषि मंत्री राम लाल मारकंडा ने बताया कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति को शुरू किया है जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगभग 1650 हैक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को जा रही है। राज्य सरकार ने 2022 तक प्रदेश के सभी 9 लाख 61 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर पूरे देश में हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक कृषि राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है।

 

Tags: Agriculture

 

 

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